कुम्भ मेला ब्राह्मण सेवा संघ शिविर में एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन



वृन्दावन ।टीम अजेयभारत।

कुम्भ मेला ब्राह्मण सेवा संघ शिविर में एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन महेश खंडेलवाल व अनुराग गोयल के सौजन्य से किया गया तथा 11 किलो का लड्डू डा०सुयस त्रिपाठी ने बाँकेबिहारी जी का भोग लगवाकर प्रसाद बँटवाया प्रारम्भ में दीप प्रज्वलन के उपरांत माँ सरस्वती की रचना सुनील पाराशर सरल ने प्रस्तुत की तथा श्री बाँकेबिहारीजी की अध्यक्षता की संचालन अशोक अज्ञ ने सँभाला जिसमें कवियों ने अपनी रसमयी रचनाओं के द्वारा जहाँ दर्शकों को भाव विभोर किया वहीं हास्य रचनाओं से गुदगुदाया 

श्री स्यामसुंदर अकिंचन ने होली रचना ऐसी कर मती गैल रोके मती सास सुनिकै हमारी खिवर जायगी

नन्द के लाल तेरौ न बिगरै कछू,चूँदरी मेरी कोरी बिगर जायगी।।

अलवर से पधारे व्यंग्यकार सुरेन्द्र सार्थक ने किसानों की समस्या को कुछ इस अंदाज में व्यक्त किया।


खुँले आकाश में अपनी कमाई छोड़ देते हैं।

मठा से पेट भरते हैं मलाई छोड़ देते हैं।

अगर तुम झूँठ भी कहदो मवेशी खेत में तेरे,

कड़कती ठंड में झट से रजाई छोड़ देते हैं।

ब्रजभूषण चतुर्वेदी दीपक ने कहा,

टरत न टार्यौ मन ब्रज की इन गलियन सौं,

उमगि उमगि छलकत जहँ प्रेम रस गागरी।

श्री जगदीश नीलम ने होली का वर्णन छंदों के माध्यम से व्यक्त किया,

नैनन नेह अबीर लिए मद यौवन रूप भरी पिचकारी।

प्रीति के रंग रंगीली रंगीली रंगी छकि भंग मृदंग बजावत नारी।।

मैनपुरी से पधारे श्री विनोद राजयोगी ने कहा कि

धन्य आज मैं होगया,पीकर जमुना नीर।

हमें भाग्य ले आगया,वृन्दावन के तीर।

दरियाब सिंह राजपूत ब्रजकन ने लोकगीत प्रस्तुत किया।

उड़ रह्यौ रंग गुलाल,ब्रज की गलियन में।अशोक अज्ञ ने लड्डू को ब्रज प्रेम का रूप दर्शाते हुए कहा 

ब्रज प्रेम भक्ति कौ लड़ुआ है,

चखियो पर चूरों मति करियो।

हर लता पता वन बेल वृक्ष,

इनकौ तू घूरौ मति करियो।

ये कंकरीट कौ महल बनै, 

यह सपनौ पूरौ मति करियो,

जब आयौ द्वार बिहारी के, 

बिसवास अधूरौ मति करियो।

कवयित्री रुचि चतुर्वेदी नेे सवैया के माध्यम से कहा

ब्रजराज कौ नाम रटै रसना,बस राधे राधे गाय रह्यौ।

सिगरौ ब्रजधाम कन्हैया की,मुरली के गीत सुनाय रह्यौ।

रेनु उपाध्याय ने ब्रजभासा की महत्ता समझाते हुए गीत पढ़ा.

है धन्य धन्य तू धन्य,न लागै तोसी कोऊ अन्य,मोर मन तोर पिपासा,धन्य तोकूँ ब्रजभाषा।

दिल्ली से आई कवयित्री अंजना अंजुम ने श्रंगार पढ़ा

चाँद तारों पै हक जताने की तैयारी है।

स्वार्थ में डूबे हैं सब क्या गजब खुमारी है।। काँमा से पधारे पवन शर्मा नीरज ने प्रेम को कुछ इस तरह दर्शाया। प्रेम पावन सुखद एक अहसास है,प्रेम जीवन की नैया की पतवार है।

प्रेम धरती गगन प्रेम नदिया पवन,प्रेम ही सारी सृष्टि का आधार है। कार्यक्रम के समापन पर अध्यक्ष श्री आनंद वल्लभ गोस्वामी ने सभी कवियों का पटुका व स्मृति चिन्ह भेट कर सम्मान किया 



इस अवसर पर युगल किशोर कटारा, चंद्रप्रकाश द्विवेदी ,सौरभ गॉड, सुरेश चंद्र शर्मा ,श्री नागेंद्र महाराज ,विमल चैतन्य ब्रह्मचारी ,अशोक व्यास, नंदकिशोर शर्मा ,गंगाधर पाठक ,जय नारायण बृजवासी, मनोज मोहन शास्त्री, राज नारायण द्विवेदी, मुकेश सारस्वत,नंद कुमार पाठक, बिहारी लाल शास्त्री, संजय पंडित, लाला व्यास, राजकुमार शर्मा, योगेश द्विवेदी, आचार्य रसिक शास्त्री, श्रीमती शशि शुक्ला, श्रीमती मुदिता शर्मा, श्वेता गोस्वामी, प्रतिभा शर्मा, रमेश चंद्र विधि शास्त्री, राजेंद्र त्रिवेदी,  भागवत शरण, राजेश कृष्ण सारस्वत, तपेश पाठक, विनीत द्विवेदी, नीरज गॉड, संतोष चतुर्वेदी, बृजभूषण मिश्रा, अविनाश शर्मा, नरेंद्र शर्मा. आदि अनेक लोग उपस्थित थे।

Post a Comment

0 Comments