क्या होगा इस नवसंवत्सर 2078 में आपके और भारतवर्ष के भविष्य में

 अभिलाषाएँ आकृति पाएँ यत्न बनें उपलब्धि,

जीवन अभिनंदन रत हो श्वास श्वास समृद्धि ।

सुख सुविधाओं से हर पल हो जावे सदा आयुष्मान,

यही कामना "नव संवत्सर" लाए आपका स्वर्ण विहान।।



विक्रम संवत 2078 की कुंडली में 6 क्रूर ग्रहो के पास महत्वपूर्ण पदों की भूमिका है।राजा,मन्त्री और वर्षा का अधिकार मंगल ग्रह के पास है।शनि को कोई भी पद नही दिया गया है।मंगल ग्रह युद्ध प्रिय, टकराव, प्रतिद्वंद्विता प्रवृत्तियां बढ़ेगी।सेना ,पुलिस, डाक्टर आदि पर विचार किया जाता है।रचनात्मक और विध्वंसक दोनो ही शक्ति के रूप मे विद्यमान रहेगा।नेतृत्व की भावना,साहस,स्वतंत्र, अनुशासन ,खोजी, लोग ज्यादा दिखाई देगे।वही स्नायुतंत्र, चेहरा व सिर,रसायन, बुखार,छोटी चेचक,रक्तपात, मस्तिष्क ज्वर,टीकाकरण आदि पर अधिकार रखेगा।

भारतवर्ष में आंतरिक क्षेत्रों में साम्प्रदायिक दंगे,उग्रवादी घटनाओं, देश की आर्थिक मन्दी, अनिश्चितता को बढ़ावा मिलेगा। भारतवर्ष,नेपाल, पाकिस्तान,चीन ,ईरान और ईराक आदि देशों में राजैनतिक हिंसा बढ़ने से तनाव का मौहाल बनेगा।  प्रधान नेतृत्व अपना निरकुंश एवं मनमानी करेगे।जिसके साधारण जनजीवन प्रभावित होगा।उपद्रव

चीन सीमाओँ पर होने से हमारी सीमाओँ पर सुरक्षित नही होंगे ।

जनता बाजार में तेजी से बढ़ती महंगाई से परेशान होंगे। भारतवर्ष को अपनी सुरक्षा के उचित कदम उठाने की जरूरत होगी।

बंदूको का व्यापार, दवा विक्रेता,  चिकित्सक,कसाई, लोह इस्पात  ,सुनार,लोहार,चोर लुटेरे,हत्यारे मनमानी करेगे जिससे कानून थलसेना के हाथ जा सकता है।



राजा का वाहन :-         

1. .राजा एवं मंत्री :- मंगल ग्रह हैं:-   मंगल: - अग्नि दुर्घटनाओं, चोरी आदि के कारण जान-माल की हानि, लोगों की शांति को भंग कर सकती है। राजाओं के बीच युद्ध, युद्ध का भय। लोगों को बीमारियों और अलगाव के कारण परेशानी का सामना करना पड़ेगा।  अल्प वर्षा।  वाहन बैल

3. सस्येश (ग्रीष्म की फसल के स्वामी):- शुक्र ग्रह हैं। वर्षा पर्याप्त मात्रा में होगी।गेहूँ,जौ,चावल, गन्ना की फसलों से लाभ होगा।मौसमी फलों की फसल अच्छी होगी।सुन्दर फूलों से संसार अच्छा लगेगा।अनाज, तेलो ,घी,सोना और चाँदी का व्यापार अच्छा होगा।     


 4.धान्येश( सर्दी फसलों के स्वामी):- बुध ग्रह है। पैदावार तो अच्छी होगी।परन्तु मंहगाई ज्यादा रहेगी। इस वर्ष पंजाब और हरियाणा में पानी की कमी रहेगी ।


 5.मेघेश (वर्षा के स्वामी) मंगल एवं चन्द्र  ग्रह है:-  जब सूर्य ग्रह आर्द्रा नक्षत्र में गोचर करते हैं। अच्छी फसलों होगी।गाय के दूध में वृद्धि होगी।फलों और फूलों की बढ़ोतरी से देश मे खुशशाली आएगी।हर स्थान,महाराष्ट्रऔर गुजरात तथा प्रत्येक राज्य अलग अलग प्रभाव दिखाई देगा।


6.रसेश ( रसदार फलों के स्वामी):-सूर्य  वर्षा की कमी ,घी की कमी , तेल, कपडों रहेगी।केवल अमीर मनुष्य आरामदायक जीवन जियेगे। ज्यादातर लोगों  सामान्य तौर उलझनों,परेशनियों और आर्थिक स्थिति समस्याओं से घेरे रहेंगे।


 7. निरेसेश (धातु के स्वामी ) शुक्र ग्रह हैं। कपूर, चन्दन की चीजों ,सोना,मोती,और कपड़ो में वृद्धि होगी।जिससे गरीब लोग परेशान होगी।

 8. फलेश (फलों और फूलों के स्वामी) चन्द्र हैं। सीखने वाले लोग खुश रहेंगे।शासक कानून बनाएगा और उसकी पालना के लिए बाध्य करेगा।उसकी न पालन करने वालो के प्रति कठोर होगा।

: नव संवत्सर का उदय मीन लग्न रेवती नक्षत्र सुवर्ण पाया ,गजयोनि,मेष राशि चांदी का पाया व अश्विन नक्षत्र मे,क्षत्रिय वर्ण,देव गण,मंगलवार, विष्कुभ योग व वव करण मे है।

वर्षीश मंगल मुन्था लग्न भाव और मुन्थेश गुरू 12भाव मे है।

मुन्था लग्न मे होने से भारत को शत्रुओ का संहार,पुराने रोग से मुक्ति,विभिन्न उघोगो से आय,परिश्रम व यश मिलेगा।वही मुन्थेश गुरू सबसे ज्यादा विवाह और मांगलिक कार्य होगे,सोना का खजाना,विदेश से व्यापार लाभ और धन,व्यय की अधिकता से राजकीय चिंता भी रहेगी।19जून से 22अक्टूबर तक का समय कुछ परेशानी से भरा रहेगा।

बहुत से ग्रह गंड मूल मे है।

रेवती मूल मे लग्न कालपटल का वह बिदू हे जहां सृष्टि की प्रकिया संपूर्णता पाती है।

अनंत आकाश के शून्य में पृथ्वी का सभी ग्रह नक्षत्र के साथ लोप हो जाना रेवती नक्षत्र का तात्पर्य है ,ब्रह्मरंध्र के पास सहस्त्रार चक्र जहां सभी वासनाएं, इच्छाएं शांत हो जाती है। रेवती नक्षत्र भ्रम, इंद्रजाल का संकेत दे रहा है। लोगों में महाप्रलय तो नहीं होने वाला है शंका होगी, प्रदूषित प्रथाओं का अंतर होगा ।भूमि और बीज का संरक्षण का वातावरण दिखाई देगा।रेवती का प्रभाव ज्यादा है।

 कालसर्प योग काफी सालों से बना हुआ है इस साल भी कालसर्प योग बनाए मीन लग्न  सूर्य बुध  रेवती नक्षत्र के हैं बुधादित्ययोग। मेष में शुक्र चंद्र  अश्विनी नक्षत्र के होकर जैमिनी योग, काव्य अलंकरण योग अर्थव्यवस्था का भार ,प्रतिष्ठा और नवजात शिशु को जीवनदान देते है।वृषभ में राहु और मंगल रोहिणी मृगशिरा नक्षत्र के हैं।मीडिया में भी कुछ हद तक अंकुश कसा जाएगा

पराक्रम योग मंगल और राहु से बना है।शुभ कर्तरी योग बना है।लग्न दोनो ओर शुभ ग्रह। 

 कुंभ में गुरु धनिष्ठा नक्षत्र के होकर किसी तरह का ऋण विदेश से बंधन योग बना रहा है। से हैं। मकर में शनि श्रवण नक्षत्र के हैं जो कर्म से जुडे व्यापार राहु की  दृष्टि शनि पर ठीक नही है मध्यम वर्ग समाप्त होता जायेगा और  गरीबो होकर दो भागो मे बट जायेगा।अमीर/गरीब।और वृश्चिक केतु जेष्ठा नक्षत्र के हैं।   आयुर्वेद में कुछ नयापन दिखाई देगा।  एकादश में शनि है लग्न,पंचम और अष्टम मे दृष्टि है।

लग्न ,चंद्र, नवांश, दशांश कुन्डली मे सूर्य विशेष है सरकार का अंकुश और अंहकार सरकारी तंत्र का व्यवसायिक करण होकर सारे प्रदेश आपस मे बंटते जायेगे।

इति शुभम।

ज्योतिषविद अंजना- 9407555063

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