टेलीग्राम ग्रुप के जरिए अरमान निःस्वार्थ भाव से कर रहे कोरोना मरीज़ों के अरमान पूरे




टेलीग्राम ग्रुप के जरिए अरमान निःस्वार्थ भाव से कर रहे कोरोना मरीज़ों के अरमान पूरे


कहा जाता है कि किसी विशाल परिस्थिति से अकेले लड़ने की बजाय एक दूसरे का हाथ थाम कर मदद करें तो यह एक चेन बन जाती है और जब यह पूरी चेन एक साथ काम करने लगती है तो विशाल परिस्थिति भी छोटी लगने लगती है एवं हजारों-लाखों लोगों तक मदद पहुंचती है। कुछ ऐसा ही कर रहे हैं जिला सवाई माधोपुर के गंगापुर सिटी निवासी संगीतकार और लेखक अरमान राज़ आर्य।

दरअसल, जब कोरोना की दूसरी लहर आई और जयपुर में बड़ी संख्या में मरीज पॉजिटिव आने लगे तो लोगों को यह जानकारी ही नहीं थी कि किस अस्पताल में कितने कोविड बेड हैं, ऐसे में लोग दर ब दर की ठोकरे खाते रहते थे। इसी बीच स्थानीय अरमान राज़ की मुलाकात हुई एक कोरोना मरीज़ से। उन्होंने उसका हाल जानकर उसकी मदद की और उसे हर संभव मदद उपलब्ध कराई। तब उनके मन में एक नया विचार आया और उन्होंने अपने कुछ जानकारों को टेलीग्राम पर "कोविड जयपुर" नाम से ग्रुप में जोड़ा। वहाँ उन्हें एक और अनजान साथी मिला और ये मिलकर अस्पताल में बेड उपलब्धता की जानकारी इसमें शेयर करने लगे। हालांकि बाद में राज्य सरकार ने एक वेबसाइट लॉन्च की, जिसमें प्रदेशभर के अस्पतालों में उपलब्ध कोविड बेड का लाइव स्टेट्स देखा जा सकता है। अरमान और उनके अनजान साथी लोकेंद्र ने अपने साथियों के साथ संकल्प लिया कि हमें ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचानी है और मदद का यह कारवां इतना बढ़ता गया कि आज उनके साथ इस ग्रुप में छह हजार तीन सौ से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं। बड़ी बात यह है कि इस ग्रुप में अधिकांश युवा हैं। ये सभी एक दूसरे से पूरी तरह अनजान होने के बावजूद अपने अनुसार परस्पर एक दूसरे की पूरी मदद करते हैं और अब ग्रुप में 24 घंटे में हजारों की तादाद में मदद के लिए मैसेज आते हैं। जब भी कोई मदद के लिए मैसेज आता है तो अरमान के साथ ही ग्रुप में जुड़े छह हजार लोगों में से जिसे भी जानकारी होती है वे तत्काल उस मैसेज का जवाब देते हैं एवं सभी की कोशिश यह होती है कि जो भी व्यक्ति परेशानी में हैं, उसकी पूरी मदद की जाए। टेलीग्राम पर बने इस ग्रुप में मरीजों के परिजन या उनके दोस्त वेंटिलेटर, आक्सीजन बेड, आईसीयू या सामान्य बेड या ऑक्सिजन गैस तथा सिलेंडर कहां उपलब्ध है, इस संबंध में तथा हर तरह की दवाइयों एवं इंजेक्शन्स की उपलब्धता जानने के लिए सबसे ज्यादा मैसेज करते हैं। साथ ही रेमडेसिविर, लिपोसोमल, या अन्य जीवनदायी इंजेक्शन की उपलब्धता जानने के बारे में या ये इंजेक्शन कैसे मिल सकते हैं, इसका पता लगाने के लिए भी लोग मैसेज करते हैं। जैसे ही कोई मैसेज मिलता है सभी उस व्यक्ति की मदद करने लग जाते हैं तथा मरीज तक हर संभव मदद पहुँचाते हैं। इसके साथ ही किसी घर के अधिकांश सदस्य कोविड पॉजिटिव हो जाते हैं तो उन्हें घर तक खाना पहुंचाने के मैसेज भी मिलते हैं तो ये खाना भी उपलब्ध कराते हैं साथ ही मरीज के लिए खून और प्लाज्मा डिमांड भी खूब आती है। इस ग्रुप से काफी लोगों को काफी मदद मिल एवं काफी मरीजों की ज़िंदगियाँ बच रही हैं और इनके इसी जुनून को देखते हुए कलाकार सोनू सूद के सूद फाउंडेशन की तरफ से भी हाल ही में संपर्क किया गया और सूद फाउंडेशन से जुड़ने के लिए भी कहा गया।

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