दूषित वातावरण भी संवाहक बना कोरोना का : माईकल सैनी



प्रकृति से छेड़छाड़ का नतीजा भुगत रहे हैं लोग बात की जाए एयर क्वालिटी इंडेक्स ( AQI ) की तो NCR के प्रमुख शहरों गुरुग्राम, फरीदाबाद, बलभगढ़, बहादुरगढ़, सोनीपत सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र हैं  यहां का प्रदूषित वातावरण लोगों में स्वांस सम्बंधित परेशानियों का प्रमुख कारण है  उत्सर्जक माना जाता है  यहां पर रहने वाले लोगों के सिकुड़ते फेफड़े , कैंसर जैसी घातक बीमारियां उनके  त्वचा सम्बंधी रोगों व आंखों की परेशानियों के साथ साथ हादसों में बढ़ोतरी के लिए दूषित पर्यावरण ही जिम्मेवार है !

विकास के नाम पर इन क्षेत्रों में अनगिनत पेडों के कटान , सड़कों के चौड़ीकरण से लेकर पहाड़ों में हो रहे अंधाधुंध खनन का होना  , हरित भूमि की जमीनों को बिल्डरों के हवाले करना ,जोदड़ो (तालाबों) को नष्ट करना तथा जंगलों में बढ़ते अतिक्रमण के कारण पर्यावरण को बहुत बड़ी क्षति पहुंची है जिससे न केवल पशु पक्षियों का जीवन तो समाप्ति के कगार पर पहुंच ही गया है  मनुष्य जीवन भी असुरक्षित हो चला है !

बेतरतीब होते बड़ी बड़ी इमारतों के निर्माण , सड़कों के निर्माण , अंडरपास-फ्लाईओवरों के लिए खुदाई के कारण लगे मलबे , मिट्टी के ढेर और उनपर से गुजरते वाहनों से उड़ती धूल का दमघोटू प्रदूषण जीवन की दुश्वारियों को तो बढ़ा ही रहा है  तथा उसमें बड़े सहयोगी की भूमिका निभाते कूड़े के पहाड़ , पशुओं , जीव-जंतुओं के अंश ,मेडिकल वेस्ट ,,फैक्टियों का जहरीला धुंआ और दूषित पानी , बरसाती नालों का जाम पड़े रहना , जलभराव जैसी बड़ी समस्याएं हैं जो इन शहरों में इंसान को जीवित नहीं रहने देने के लिए काफी हैं !

बात गुरुग्राम शहर की करें तो यहां पर शाशन प्रशाशन के आगे किसी की एक नहीं सुनी जाती आम आदमी तो क्या जनप्रतिनिधि तक बेबस नजर आते हैं लालफीताशाही - ब्यूरोक्रेसी के सामने , आधिकारिक गुट इतने स्वछंद हैं कि वह प्रदेश के मुखिया के इलावे किसी का आदेश नहीं मानते हैं , उनके अपने नियम हैं अपनी योजनाए होती है जितमे कैसा भी हस्तक्षेप बर्दास्त नहीं होता है फिर चाहें वह अच्छा सुझाव ही क्यों न हो !

आजकल ऑक्सीजन की जिम्मेदारी है उनके पास स्टोर रेडक्रॉस सोसायटी के दफ्तर में करते हैं जिसका किसी को मालूम नहीं होता है और वहां पहुंचाते हैं जिनके हाथ में है वीआईपी का पास - फिर चाहें कितने भी छोटे मोटे अस्पताल ऑक्सीजन न होने का रोना रोते रहें , कितनी ही मिन्नतें करले दुहाइयाँ दें कि मर जाएंगे लोग  इनके कान पर जूं तक नहीं रेंगती है - क़ई लोगों की जाने भी जा चुकी हैं और आगे न जाने कितनी ओर जा सकती हैं अधिकारियों की आपाधापी के चलते   कुछ कहा नहीं जा सकता है  खैर अब सूबे के मुखिया ने संभाल लिया है भार देखते हैं क्या होता है  बाकि पिछले सात सालों को देखें तो नहीं लगता है कि परिस्थितियाँ सम्भलेंगी   और क्या ऑक्सीजन व दवाओं की कालाबाजारी पर नजर रख पाते हैं कार्यवाही कर पाते हैं कि नहीं   लेकिन इन व्यभिचारी लोगों को यह जरूर सोचना होगा कि विपदा में जो अवसरों का लाभ उठा रहे हैं उन्हें ऊपर वाला जरूर देख रहा है उसका न्याय सबके लिए समान है उससे डरकर काम करें  सरकार भी और अधिकारी भी !

बात वातावरण की करते हैं तो शाशन प्रशाशन ने सदर बाजार के सौंदर्यीकरण पर खासा जोर दे रखा है , भीड़-भाड़ वाले क्षेत्र बाजार समेत सभी इलाकों में कोविड महामारी को लेकर शोशल डिस्टेंसिंग और बगैर मास्क लगाए  आने-जाने पर पाबंदी व भारी जुर्माने का प्रावधान कर रखा है  मगर व्यवस्थाओं की बात करें तो निम्नस्तरीय भी नहीं है - जगह जगह गंदगी के ढेर लगे पड़े हैं ,कचरे के उठान उपरांत दवाओं के छिड़काव की कोई व्यवस्था नहीं टॉयलेट की कमी के साथ जो हैं वहां प्राय गंदगी ही पसरी रहती है जहां  किसी बीमार की तो क्या स्वस्थ आदमी की भी तबियत खराब होने में कोई कोर कसर बाकि नहीं रहती है ।

बकौल तरविंदर सैनी (माईकल ) समाजसेवी गुरुग्राम के अनुसार सरकार पर्यावरण को लेकर संजीदा नहीं दिखती ,धूल-धुश्रीत शहर का बुरा हाल है कूड़े के निष्पादन तक मे फेल हो चुकी है सरकार ! 

इसलिए लोगों की आत्मनिर्भरता देखने में आ रही है ,  संक्रमित व्यक्ति-परिवार के घर खाना व जरूरी मदद पहुंचाने से लेकर बच्चों की देखभाल तक  उनके लिए जरूरी डावाओ व ऑक्सीजन तक की व्यवस्थाओं में एक दूसरे के काम आपस में लोग ही आ रहे हैं सरकार नहीं ।

रही प्रदूषित वातावरण की बात तो सरकार स्वच्छ पीने का पानी तक मुहैया कराने में असमर्थता दिखा चुकी है पर्यावरण के विषय में तो क्या करेगी - जनता देखे कि कमी सरकार की नीतियों में है या माईकल सैनी की सोच में ?

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