हरियाणा एमएसपी पर सबसे अधिक फसल खरीद करने वाला देश का पहला राज्य: रमन मलिक

 हरियाणा एमएसपी पर सबसे अधिक फसल खरीद करने वाला देश का पहला राज्य: रमन मलिक



गुरुग्राम।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रमन मलिक ने कहा कि एमएसपी पर सबसे अधिक फसलों की खरीद करने के मामले में हरियाणा पहला राज्य बन गया है। गेहूं, धान, सूरजमुखी, मूंग, सरसो, चना व बाजरा की फसलें सबसे अधिक खरीद की हैं। वित्त वर्ष 2020-21 के लिए कृषि क्षेत्र का बजट 5474.25 करोड़ रुपए निर्धारित किया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत गत 6 वर्षों में 12 लाख 80 हजार 545 किसानों को 2943 करोड़ 92 लाख 86 हजार रुपए की राशि क्लेम के रुप में दी। जबकि बीमा प्रीमियम के रुप में 913.93 करोड़ रुपए किसानों से लिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि प्राकृतिक आपदा में फसल खराब होने पर 2692 करोड़ 67 लाख रुपए की मुआवजा राशि वितरित की गई। 6 साल में भाजपा सरकार में कुल मुआवजा 5636 करोड़ 59 लाख रुपए की राशि वितरित की गई है। जबकि कांग्रेस की हुड्डा सरकार के समय संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत 2 लाख 59 हजार 416 किसानों को 46 करोड़ 95 लाख 48 हजार रुपए की राशि क्लेम के रुप में दी गई थी। जबकि बीमा प्रीमियम के रुप में 61 करोड़ 69 लाख 51 हजार रुपए किसानों से लिए गए। मलिक ने बताया कि पिछली हुड्डा सरकार में प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने दस साल में 800 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि वितरित की गई। पिछली हुड्डा सरकार के समय का 268 करोड़ 93 लाख रुपए का मुआवजा मनोहर सरकार ने बांटा है।


[25/05, 20:00] Krishna Bhardwaj: हरियाणा एमएसपी पर सबसे अधिक फसल खरीद करने वाला देश का पहला राज्य: रमन मलिक

गुरुग्राम।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रमन मलिक ने कहा कि एमएसपी पर सबसे अधिक फसलों की खरीद करने के मामले में हरियाणा पहला राज्य बन गया है। गेहूं, धान, सूरजमुखी, मूंग, सरसो, चना व बाजरा की फसलें सबसे अधिक खरीद की हैं। वित्त वर्ष 2020-21 के लिए कृषि क्षेत्र का बजट 5474.25 करोड़ रुपए निर्धारित किया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत गत 6 वर्षों में 12 लाख 80 हजार 545 किसानों को 2943 करोड़ 92 लाख 86 हजार रुपए की राशि क्लेम के रुप में दी। जबकि बीमा प्रीमियम के रुप में 913.93 करोड़ रुपए किसानों से लिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि प्राकृतिक आपदा में फसल खराब होने पर 2692 करोड़ 67 लाख रुपए की मुआवजा राशि वितरित की गई। 6 साल में भाजपा सरकार में कुल मुआवजा 5636 करोड़ 59 लाख रुपए की राशि वितरित की गई है। जबकि कांग्रेस की हुड्डा सरकार के समय संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत 2 लाख 59 हजार 416 किसानों को 46 करोड़ 95 लाख 48 हजार रुपए की राशि क्लेम के रुप में दी गई थी। जबकि बीमा प्रीमियम के रुप में 61 करोड़ 69 लाख 51 हजार रुपए किसानों से लिए गए। मलिक ने बताया कि पिछली हुड्डा सरकार में प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने दस साल में 800 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि वितरित की गई। पिछली हुड्डा सरकार के समय का 268 करोड़ 93 लाख रुपए का मुआवजा मनोहर सरकार ने बांटा है।

[25/05, 20:11] Raman Malik Gurugram: ऊपर दिए गए आंकड़े स्पष्ट रूप से बताते हैं कि यह सरकार किसानों की खुशहाली के लिए समर्पित है।  इस कथित किसान आंदोलन के संचालन में लगे प्रत्यक्ष कथित किसान नेता और अप्रत्यक्ष धन्ना सेठ यह भूल गए हैं, इस आंदोलन से  उनकी राजनीति नहीं संभलने वाली जिस तरीके से वह जनता की नजरों से लुढ़कते गए हैं वह इस लायक नहीं बचे हैं कि वह अपना अस्तित्व बचा सकें। 

 मलिक ने कहा कि वह सरकार के निरंतर करी गई कोशिशों  के उपरांत भी अड़ियल रवैया अपनाने वाले कथित किसान नेताओं से पूछना चाहते हैं कि आज लगभग 6 महीने में वह यह नहीं बता पाए कि इन कानूनों से किसान का नुकसान कैसे होता है। वह यह नहीं बता पाए कि वह अपने आप 50 लाख की गाड़ी में घूम पाते हैं लेकिन किसान के पास ₹50000 जमा पूंजी नहीं होती इसका राज क्या है?  यह कथित किसान नेता गरीब किसान को करुणा के खिलाफ टीका लगाने से मना करते थे और आज अपने आप यह टीका लगवा कर बैठे हैं गरीब किसान के साथ इस प्रकार का दोगला व्यवहार क्यों? करुणा से होने वाली मृत्यु जो कि किसान आंदोलन के ठिकानों से संक्रमित आए लोगों से हुई उसको 5G की तरंगों से हुई मौत बताने वाले नेताओं पर किसान क्यों विश्वास करें?

बिना जमीन बेचे या किसी और आय के स्रोत होने के अभाव में कौन से किसान ने अपने जमीन के किलों में इजाफा करा है?

 यह आह्वान करते हैं कि 3 टन गेहूं 1 तोले सोने बराबर होनी चाहिए तो फिर लगभग ₹160 किलो गेहूं और 300 रुपए किलो आटा कौन सा गरीब किसान खरीद पाएगा?


 इस करो ना काल में निरंतर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी खट्टा और पूर्व कृषि मंत्री वर्तमान में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी ओमप्रकाश धनखड़ निरंतर इन नेताओं से आह्वान करते रहे की करुणा काल के समय किसानों को इस जमावड़े से परहेज करनी चाहिए आप बेशक सांकेतिक आंदोलन को जारी रखें और जिस समय यह करुणा काल प्रकोप खत्म हो जाए उस समय दोबारा से सरकार का विरोध करने आ जाए लेकिन इस त्यौहार पर भी इन्होंने कोई संज्ञान नहीं लिया और गरीब किसान को इस महामारी की भट्टी में झोंक दिया।

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