पंजाब सरकार ने भी माना कोरोना का फैलाव किसान आंदोलन से: रमन मलिक

 पंजाब सरकार ने भी माना कोरोना का फैलाव किसान आंदोलन से: रमन मलिक



गुरुग्राम।


 पंजाब सरकार में मंत्री और कप्तान अरविंदर सिंह के करीबी त्रिपत सिंह बाजवा ने एक साक्षात्कार में यह स्पष्ट रूप से माना कि पंजाब के ग्रामीण अंचल में भी कोरोना का फैलाव किसान आंदोलन से वापस आ रहे लोगों की वजह से है।  उन्होंने स्पष्ट रूप से बोला कि किसान आंदोलन में बैठे लोगों को अपना निरंतर रूप से टेस्ट कराना चाहिए और वापस आने से पहले अपने आप को संतुष्ट करें कि वह कोविड19 से संक्रमित नहीं है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रमन मलिक ने कहा कि बहुत सारे कथित किसान नेताओं ने जब इसी प्रकार की बात हरियाणा के मंत्रियों और मुख्यमंत्री ने करी थी तो उसको किसान विरोधी करार दिया था।  उन्होंने समय-समय पर यह बोला की कोरोना कोई महामारी नहीं है, सरकार मात्र इस आंदोलन को तोड़ने के लिए इस प्रकार की बातें कर रही है।  इनमें बैठे कथित नेताओं ने सभी को वैक्सीन ना लगाने की भी बात करी और उसके उपरांत चोरी छुपे अपने आप जाकर वैक्सीन लगवा ली।  मैंने आज एक अंग्रेजी टीवी चैनल पर तिरुपति सिंह बाजवा के साथ संवाद करते हुए उनका शुक्रिया अदा करा कि कम से कम उन्होंने यह हिम्मत तो दिखाई की सत्य को बोलने की चेष्टा करी। जब पंजाब हरियाणा दिल्ली और समूचे देश में लॉकडाउन की व्यवस्था चल रही है उस समय सरकारें न्याय व्यवस्था को संभालने के लिए शायद इन कथित आंदोलन में शिरकत करने वाले लोगों पर शक्ति ना बरत रही हो लेकिन यह लोग भी अपनी जिम्मेवारी नहीं समझते। जिस प्रकार से कुछ कथित किसान नेता आवाहन करते हैं की कोरोना से मर ना हो या धरने पर तो वह धरने पर मरना पसंद करेंगे। यह दिखाता है कि उनको ना अपने प्रांत के ना अपने गांव की और ना ही अपने घर वालों की कोई फिक्र है। इस प्रकार के बयान बहुत ही गैर जिम्मेदाराना है और खासकर वह नेता जो पंजाब से आते हैं उन्हें पंजाब की स्वास्थ्य सेवाओं के असलियत पता है। इसीलिए क्या वह ऐसा कह रहे हैं। हमने हरियाणा के अंदर लगभग 8000 टीमों के माध्यम से गांव-गांव में कोरोना की टेस्टिंग और उस टेस्टिंग के उपरांत संभावित स्थिति से निपटने के लिए व्यापक रणनीति के तहत काम करना शुरू कर दिया है। लेकिन पंजाब में इस प्रकार का विश्वास लोगों में नहीं है कि सरकार हर एक गांव में जाकर लोगों के स्वास्थ्य का ध्यान रखेगी।


उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब कांग्रेस के नेता और यहां तक कि मुख्यमंत्री सीना ठोक के यह कहते थे कि हमने स्थान से, दान से,  धन से, इंधन से और यहां तक कि पुलिस को  हिदायत देकर इन लोगों की सहायता करी है। वह यह पुष्टि करते हैं कि इन्होंने ही इस आंदोलन को खड़ा करा है। हद तो तब हो गई  की  हरियाणा से एक नेत्री यहां तक बोलती हुई  दिखाई दी  की  शराब से भी इनकी सेवा करी है ।


 मलिक ने कहा कि हरियाणा प्रदेश के मुख्यमंत्री गृहमंत्री और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वह अन्य वरिष्ठ नेताओं ने, बार बार करवट विनती कर इनसे आग्रह करें कि वह इस महामारी के समय अपने घर जाकर अपने गांव और घरों को सुरक्षित करें और जिस समय यह लहर थम जाए पुनः सरकार के खिलाफ आंदोलन और सरकार का विरोध जिस तीव्रता से करना चाहे कर सकते हैं,   लेकिन मानवता की इस समय यह पुकार है की सभी लॉक डाउन का और कम से कम घर से बाहर निकलने का नियम पालन करें जिससे की  covid संक्रमण बढ़ने और फैलने का मार्ग कम हो।


मेरा अपने किसान भाइयों जो इन कथित नेताओं के भूलेखे में अपना और अपने परिवार का जीवन खतरे में डाल रहे हैं हाथ जोड़ के विनती है कि वह सब फिलहाल के लिए अपने घर लौट जाएं और अगर उनको उचित लगे तो कोविड19 महामारी  की इस लहर के बाद अपने को टीकाकरण करवा वापस अपने धरने स्थापित कर सकते हैं।

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