सेव द सेवियर्स - आईएमए ने स्वास्थ्यकर्मियों के लिए केंद्रीय सुरक्षा अधिनियम की मांग की



गुरुग्राम।टीम अजेयभारत।

 भारत के विभिन्न हिस्सों में डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा के कई मामले सामने आए हैं। रोगी की मृत्यु के लिए डॉक्टरों को दोष देना और निकटतम स्वास्थ्यकर्मी पर हाथ उठाना शुरू कर देना एक आम बात हो गई है l

 


 डॉ वंदना नरूला अध्यक्ष आईएमए गुरुग्राम ने आज कहा कि हम स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा पर जीरो टॉलरेंस की मांग करते हैं। कोविड महामारी में 1500 डॉक्टरों की मौत हो गई है और अब स्वास्थ्यकर्मियों के लिए एक केंद्रीय सुरक्षा अधिनियम बनना चाहिए ताकि जो कोई भी डॉक्टर पर हमला करे या अस्पताल में संपत्ति तोड़ दे, उसे गैर-जमानती आरोपों के तहत गिरफ्तार किया जाए ।



 आईएमए गुरुग्राम के डॉक्टरों ने आज सुबह लीजर वैली पार्क में काले मास्क और सफेद कोट पहनकर डॉक्टरों की स्थिति के बारे में जागरूकता पैदा की। आईएमए गुरुग्राम सचिव डॉ सारिका वर्मा ने कहा कि 88% डॉक्टर अपने कार्यस्थल पर हिंसा से डरते हैं और हर मौत अस्पताल में तनाव का कारण बन जाती है। कोई भी यह सुनिश्चित नहीं कर सकता है कि सभी मरीज जीवित रहेंगे और यह समझना महत्वपूर्ण है कि डॉक्टर बहुत कठिन काम कर रहे हैं। सभ्य समाज में हिंसा की कोई भूमिका नहीं होती।


 डॉ. करण जुनेजा राष्ट्रीय जूनियर डॉक्टर विंग अध्यक्ष ने कहा कि हम जूनियर डॉक्टरों ने 15 महीने पीपीई किट पहनकर कोविड ड्यूटी में काम करते हुए बिताए हैं, जबकि मरीज के अपने परिवार के सदस्य भी अपने मरीजों की देखभाल नहीं करे। नर्स, सफाईकर्मी, तकनीशियन, एम्बुलेंस कर्मचारी और जूनियर डॉक्टर अंतिम सांस तक मरीजों की देखभाल करते रहे। जब भी एक डॉक्टर को मार पड़ती है इसका असर पूरे देश के डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है।


 आईएमए गुरुग्राम के निर्वाचित अध्यक्ष डॉ.एनपीएस वर्मा ने कहा कि हमले के डर से कई डॉक्टर अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने से हिचकिचाते हैं , हिंसा बहुत लंबी चली है और अब इसे खत्म होना है।


 डॉ एमपी जैन पूर्व आईएमए गुरुग्राम अध्यक्ष, डॉ अजय अरोड़ा अध्यक्ष राष्ट्रीय आईएपी, डॉ दिनेश हंस, डॉ रमेश गोयल, डॉ पुष्पा सेठी, डॉ अभिषेक गोयल, डॉ मदनजीत पसरीचा, डॉ ज्योति यादव और कई वरिष्ठ डॉक्टर आज के विरोध में शामिल हुए।

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