कोरोना की तीसरी लहर आ नहीं रही है तो क्या लाई जा रही है ? माईकल सैनी



कोरोना की तीसरी लहर आ नहीं रही है तो क्या लाई जा रही है ? माईकल सैनी

गुरूग्राम। वैश्विक महामारी कोरोना जिसकी पहली लहर से तबाह हुए लोग संभले भी नहीं थे कि दूसरी लहर ने कोहराम मचा दिया था , चारो तरफ इंसानों के ही शव नजर आ रहे थे  , एक ओर लोगों की लापरवाही को जिम्मेवार ठहराया जा रहा था तो  दूसरी ओर सरकार की अव्यवस्थाओं को दोषी करार दिया गया   फिर चाहें वैक्सिन्स के उत्पादन में देरी का विषय रहा हो या  वह टिका लोगों को लगाने में देरी बरती गई हो  और या फिर सरकार का गैरजिम्मेदाराना रवैया रहा हो   जोड़कर तो आईसीयू बैडस और वेंटीलेटर्स के निर्माण तथा जरूरी दवाओं के अभाव को भी देखा जाएगा , और इस बात से भी कतई इंकार नहीं किया जा सकता है कि ऑक्सीजन तक उपलब्ध कराने में सरकार के पास संसाधन तक उपलब्ध नहीं थे और विदेशों से मदद की भीख मांगने के इलावे अन्य कोई  विकल्प भी नहीं था ,  हैरत में डालने वाली बात तो यह रही कि उस पहुंची हुई मदद को भी सही से वितरण नहीं कर पाई केंद्र सरकार  , सारे विश्व ने देंखा फेल होते मोदी सरकार को  !  

खैर बात सुनने में आ रही है तीसरी लहर की  जो मासूम बच्चों के लिए घातक बताई जा रही है !

दिन-रात केंद्र सरकार प्रचार कर रही है कि उसने अनुमन सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं   सभी जिलों में ऑक्सीजन प्लांट्स लगा दिए हैं और ऑक्सीजन कंसनटेटर्स तैयार कर रखे हैं फिर आईसीयू बैडस की बात हों या वेंटीलेटर्स को स्थापित करना हो  सरकारी प्रचार के दावों अनुसार वह पूर्ण रूप से तैयार दर्शा रही है अपने आप को ,  मगर सवाल यह उठता है कि हॉस्पिटलों की संख्या में बढ़ोतरी कर डॉक्टरों का व नर्सिंग स्टाफ का इंतजाम भी किया गया है क्या ?

यह विषय तो गंभीर प्रधानमंत्री जी द्वारा किए गए दावे से हो जाता है  जिसमे उन्होंने स्वम् अक्टूबर माह तक बच्चों को लगने वाली वैक्सिन्स के सभी ट्रायल पूरे हो जाने व उनके निर्माण की बात कही थी  , सोचो कि वैक्सीन ही अक्टूबर नवंबर में बनेगी तो उसे लगाने में भी समय तो लगेगा ही ? और जब वैक्सिनेशन ही अगले साल तक पूरा होने की उम्मीद नहीं है तो राज्य सरकारें 16 जुलाई से स्कूलों को क्यों खोलने जा रही हैं ? 

कहीं स्कूलों को खोलकर बच्चों को इकट्ठा कर संक्रमण को न्योता देकर बुलाना तो नहीं चाहती हैं ?

बड़ा सवाल है कि संक्रमण से बचाव के लिए जो जीवनरक्षक टीका बनकर आना था  वह मोदी जी के बताए समय से पहले खट्टर सरकार ने तैयार कर मंगवा लिया है क्या ? 

हो सकता है आत्मनिर्भर फैंसला ले लिया गया हो मुख्यमंत्री जी द्वारा , लेकिन फिर भी लोगों को कुछ क्यों नहीं बता रहे हैं मुख्यमंत्री जी ?

अभिभावकों को बताएँ कि बगैर वैक्सिनेशन के आप स्कूलों को खोलने का आदेश क्यों दे रहे हैं ?

तरविंदर सैनी (माईकल ) नेता आम आदमी पार्टी गुरुग्राम की अपील है अपने देशवासियों से कि जबतल्क बच्चों को वैक्सिनेट नहीं किया जाता है तबतल्क उन्हें स्कूल भेजने का निर्णय न लें , रही बात बच्चों की पढ़ाई की तो वह ऑनलाइन क्लास के रूप में बच्चे ले ही रहे हैं  उसे ही पर्याप्त समझें  क्योंकि सरकारों के अनीतिगत निर्णयों वाली जोखिमो से भरी भट्ठी में बच्चे नहीं धकेलने हैं !

जान है तो जहान है  या कहें कि बचेंगे बच्चे" तभी तो पढ़ेंगे"

व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि अभी स्कूलों को खोलकर कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर जो अपने आप नहीं आ रही है बल्कि उसे लाया जा रहा है ऐसे असुरक्षित माहौल में बच्चों को स्कूल बुलाने वाले निर्णय लेकर ।

Note:- एंटीबॉडी चैक नहीं कर रही है सरकार ,जिसे जरूरत नहीं उसे भी वैक्सिन्स लगा रही है , तो कृप्या कर डोज लेने से पहले ऐंटीबॉडी चैक करा लें अपना एवं बच्चो का भी हो सकता है वैक्सीन लेने की जरूरत ही न पड़े ।

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