देश में सभी धर्म व जातियों के लिए समान अधिकार व कानून का दायरा होना जरूरी: रमन मलिक

 देश में सभी धर्म व जातियों के लिए समान अधिकार व कानून का दायरा होना जरूरी: रमन मलिक



गुरुग्राम।


भाजपा के वरिष्ठ नेता रमन मलिक ने कहा कि (यूसीसी) यूनिफाइड सिविल कोड की मांग हो रही है। जब देश में सभी धर्म व जातियों के लिए समान अधिकार व समान सजा होनी चाहिए। सभी के मौलिक अधिकार बराबर हो। सभी के अधिकार व कर्त्तव्य भी समान होने चाहिए। जबकि पिछड़ों का संरक्षण समान होना चाहिए। चाहे कोई व्यक्ति जाति या आर्थिक रूप से पिछड़ा हो तो उसे सरकार से संरक्षण व सहायता मिलनी चाहिए।


उन्होंने कहा कि एक निरपेक्ष संविधान किसी भी धर्म विशेष का पक्ष नहीं ले सकता। मलिक ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट विवाह, तलाक, उत्तराधिकार आदि के लिए समान नागरिक संहिता की आवश्यकता पर बल देता है, जिससे कि स्थापित सिद्धांतों, सुरक्षा उपायों और प्रक्रियाओं को निर्धारित किया जा सके। साथ ही नागरिकों को विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों में संघर्षों और विरोधाभासों के कारण संघर्ष करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सके।


वर्ष 2015 में एससी ने यूसीसी (यूनिफाइड सिविल कोड) की आवश्यकता पर जोर दिया था। 2019 में, सुप्रीम ने यूनिफाइड सिविल कोड के गठन की वकालत की और कहा कि सरकार ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की है।मलिक ने कहा कि भारत को द्वंद्व नागरिक संहिता प्रणाली की आवश्यकता है, सऊदी और ईरान की तरह ही शरिया कानून अगर हर अपराधिक मामले के निर्णय लेने का आधार बना दिया गया तो, , दो सप्ताह में 90% मुसलमान हिंदू धर्म में परिवर्तित हो जाएंगे, 400 प्लस साल की समस्या कुछ ही हफ्तों में हल हो जाएगी।


देखा गया है कि गैर मुस्लिम भारतीय नागरिकों को भारत के वर्तमान पर्सनल लॉ से कोई आपत्ति नहीं है। मलिक ने आगे बताया कि गोवा गोवा भारत का एकमात्र राज्य है जहां पर गोवा सिविल कोर्ट लागू है जो कि सभी नागरिकों के लिए सामान्य है। ना सिर्फ यह बल्कि भारत के संविधान की धारा 44 के अंतर्गत यह कहा गया है कि यह संविधान की आवश्यकता है की सभी भारतीयों के लिए भारत की संपूर्ण सीमा के अंदर एक ही तरीके के कानून हो।

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