ब्लूमिंग डेल इंटरनेशनल स्कूल (सरस्वती एन्क्लेव, गुरुग्राम) में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी बड़ी धूमधाम से मनाई गया।

 ब्लूमिंग डेल इंटरनेशनल स्कूल (सरस्वती एन्क्लेव, गुरुग्राम) में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बड़ी हर्ष हुल्लास से मनाया गया।


विद्यार्थी राधा व श्रीकृष्ण बन कर आए और अलग अलग भजन पर नृत्य से सभी को आनन्दित कर दिया।

गुरुग्राम।


 स्कूल संचालिका श्रीमती रजनी तँवर ने भगवान श्रीकृष्ण जी की के जीवन के बारे में बताया की, आप सब को पता है की कन्हैया जी ने मथुरा में जन्म लिया, गोकुल में पालन पोषण हुआ और राज द्वारकाधीश में किया। आप सब जानते है कि अनेकों राक्षसों का उद्धार किया यहाँ तक कि अपने मामा का वध करके अपने माता पिता व अन्य इंसानों को मुक्त कराया। ये सब तो आप को पता है कि कृष्णलीला व महाभारत से उनके बारे में पता है।श्रीकृष्ण भगवान के जीवन की समग्रता और जीवन की परिपूर्णता के लिए जाना जाता है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि केवल और केवल एकमात्र भगवान श्रीकृष्ण ऐसे देव अथवा व्यक्तित्व हैं जो चौसठ कलाओं से परिपूर्ण हैं। भगवान श्रीकृष्ण जी को अलग अलग नामो से भी जाना जाता है कोई उन्हें लडू गोपाल कहते है तो कोई कन्हैया तो कोई नंद गोपाल तो कोई मोहन तो कोई केशव तो कोई माधव तो कोई मुकुंद आदि नाम है।इनमें जीवन की चौसठ कलाओं के साथ साथ सर्वगुण संपन्न है हमारे गिरिधर गोपाल।

एक तरफ युद्ध में परिपूर्ण हैं तो दूसरी तरफ शांति में, एक तरफ शस्त्र में परिपूर्ण हैं तो दूसरी तरफ शास्त्र में, परिपूर्ण वक्ता हैं तो परिपूर्ण श्रोता भी,परिपूर्ण नृत्यकार हैं तो परिपूर्ण गीतकार भी, परिपूर्ण भगवान हैं तो परिपूर्ण भक्त भी हैं। 

जिस प्रकार से संसार की सभी नदियाँ  सागर में मिल जाती हैं उसी प्रकार मनुष्य जीवन इन की भक्ति करता है व इनके दिए हुए संदेश जिसे हम भगवत गीता कहते है उस के पदचिन्हों पर अपने जीवन को चलाते है तो एक दिन श्रीकृष्ण में ही समा जाते हैं।




इसलिए जब जब इस धरती पर अत्याचार बढ़ता है तब तब धर्म की रक्षा के लिए अलग अलग रूप में जन्म  लेते हैं। अंत मे रजनी तँवर ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की अनेक कहानियां हैं अगर इनके बारे में बताने लग जाए तो समय भी कम पड़ जाता है।

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