हरियाणा सरकार की सबसे बड़ी विफलता का नमूना है इकोग्रीन : माईकल सैनी

हरियाणा सरकार की सबसे बड़ी विफलता का नमूना है इकोग्रीन : माईकल सैनी 



समूचे एनसीआर में कूड़ा निष्पादन का कार्य बखूबी निभाया जा रहा है कहीं कोई कोताही नहीं और खर्च भी कम आता है मगर हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार के द्वारा कूड़ा-कचरा प्रबंधन का करार जबसे चाईनीज कंपनी इकोग्रीन से किया है तबसे लेकर आज दिन तक  ना तो कचरे का उठान ठीक से हो पाया है और ना ही कंपनी अपने प्रबंधन के करार वाली शर्तों पर खरा उतर पाई है उल्टे खर्चा भी बहुत अधिक हो रहा है  यूँ कहें कि काम कम और खर्च अधिक वाली तकनीक से गुरुग्राम शहरवासियों को जमकर लुटा जा रहा है  और कोई उसपर नकेल कसने वाला दिखाई नहीं देता !

इकोग्रीन कंपनी से करार के मुताबिक उसे एक साल के भीतर कचरे से बनने वाली बिजली का सयंत्र स्थापित कर ऊर्जा का उत्पादन कर वितरण करना था हरियाणा सरकार को  परन्तु  अभी तक सयंत्र चालू नहीं कर पाई और  प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी समयावधि बढ़ा दी गई  , अब कहाँ से और कोंन दे रहा है क्यों मिल रहा है एक्सटेंशन पर एक्सटेंशन इसे समझते हैं !

दरअसल करार यह हुआ था कि एक साल तक 1000₹/टन कुड़े के उठान की कीमत वसूलेगी कंपनी उस समयावधि में वह अपना कचरे से बिजली उत्पादन करने का सयंत्र स्थापित कर लेगी  जिसमे 370₹/टन कुड़े का उठान और 630₹/टन बिजली सयंत्र पर खर्च मिलेगा  !

 अब 2017-18 में हुए करार से लेकर अजतल्क बिजली सयंत्र तो लगा नहीं पाई कंपनी मगर कीमत एमसीजी से आज भी 1000₹/टन के हिसाब से ही भुगतान किया जा रहा है और यही घोटाला है जो कि 630₹/टन के हिसाब से वसूलकर आपस में बंदरबांट कर लिया जा रहा है ।

इतना ही नहीं  बल्कि जो कचरे को उठाने के लिए जेसीबी और ट्रेक्टर इस्तेमाल किए जा रहे हैं उनका भुगतान अलग से किया जा रहा है  जिसे 2017-18 में रोक दिया गया था मगर सरकार के चंडीगढ़ वाले आदेशों के कारण उक्त रकम का भुगतान जारी कर दिया गया जो कि हर लिहाज से गैरकानूनी है गलत है मगर खट्टर मेहरबान तो इकोग्रीन पहलवान हो रहा है  अर्थात चल रहा है घालमेल का खेल  फिर बेशक क्यों नहीं निकलता रहे जनता का तेल !!

मजेदार बात यह हुई कि इकोग्रीन की गाड़ियां कहाँ चल रही हैं चल भी रहीं हैं कि नहीं  उनका पता लगाने के लिए तत्कालीन निगम कमिश्नर और मौजूदा मेयर एवम विधायक महोदय तथा सभी पार्षदों के समक्ष  उन गाड़ियों में जीपीएस सिस्टम लगाने के लिए प्रस्ताव पेश किया गया और जो खर्च इकोग्रीन को करना चाहिए था वह खर्च भी नगर निगम गुरुग्राम का सदन अपने आप वहन करने पर रजु हो गया , सारा खर्चा निगम यानी गुरुग्राम की जनता उठाए हर महीने पर्ची कटवाए और फिर भी सड़ते कुड़े के ढेर लगे देखे तो इसे विफल योजना कहा जाएगा कि नहीं ?

बकौल तरविंदर सैनी ( माईकल ) आम आदमी पार्टी नेता गुरुग्राम का कहना है कि  गुरुग्राम नगर निगम अपने खर्चो के बाद फरीदाबाद नगर निगम को भी पैसा दे रहा है बल्कि उसके कचरा प्रबंधन का खर्च भी  निगम ही उठा रहा है  उसके बावजूद बंधवाड़ी में कचरे का पहाड़ लग गया  और अब हालात यह तक हैं कि कचरा रोड पर आ गया है  बदबूदार वातावरण है और वहाँ से बंद शीशों की गाड़ियों में भी होकर गुजरना दूभर हो गया है  यहाँ तक कि गीले कचरे के लीचड़ से धरती के रसातल तक पानी प्रदूषित हो गया है  बल्कि आस पास के इलाकों में पीने के पानी का संकट गहरा गया है  मनुष्य तो क्या जंगली जानवर तक वहां से नहीं रुक सकता है  !

एनजीटी ने भी हरियाणा के सचिव को लताड़ लगा दी हो इस सब को लेकर  तो इसे असफल योजना ही कहा जाएगा कि नहीं ?  सवाल अनेकों बाकी हैं मगर कम लिखे को ही अधिक समझें : माईकल सैनी

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