विप्र समाज को चाहिये कि वे भावी पीढ़ी को अपने गरिमामय अतीत से परिचित कराएं:आचार्य आनन्दवल्लभ गोस्वामी




वृन्दावन -  ब्राह्मण सेवा संघ ने वामन जयंती के पावन अवसर पर परिक्रमा मार्ग  स्थित हरिदास धाम में भगवान श्री वामन देव के वैदिक विधि विधान के साथ चित्रपट का पूजन अर्चन व दीप प्रज्जलित कर आस्था व्यक्त की। इस अवसर पर विप्र संगोष्ठी का आयोजन ब्राह्मण सेवा संघ के संस्थापक पं. चंद्रलाल शर्मा की अध्यक्षता में किया गया।



संगोष्ठी को सम्भोधित करते हुए पं. चन्द्रलाल शर्मा ने कहा  कि सतयुग में परमात्मा ने दैत्यराज बलि के अहंकार को ध्वस्त करने एवं दान की महिमा को प्रतिष्ठापित कर सत्य की स्थापना के लिये वामन अवतार लिया। हमें अवतार के उद्देश्य से प्रेरणा लेकर कल्याणकारी, उदार एवं सहयोगी भावना से समाज के लिये सदैव तत्पर रहना चाहिये।



प. सत्यभान शर्मा एवं प. जगदीश प्रसाद शास्त्री ने कहा कि संस्कारवान  युवा ही देश व समाज को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि विप्र समाज ने सदैव से ही समाज एवं राष्ट्र को समय-समय पर उचित मार्ग दर्शन दिया है तथा सर्व समाज की कल्याणकारी शैली का परिचय देकर अपने गरिमामय स्वरूप का परिचय दे अभिभूत किया है। ब्राह्मण सेवा संघ के अध्यक्ष आचार्य आनन्दवल्लभ गोस्वामी ने कहा कि विप्र समाज को चाहिये कि वे भावी पीढ़ी को अपने गरिमामय अतीत से परिचित कराएं तथा सामाजिक कुरीतियों से दूर रहकर आपसी मतभेद भुलाकर रचनात्मक कार्यों में अग्रणी भूमिका निर्वाह करने को प्रेरित करें।

श्यामसुंदर भक्तमाली एवं प. सतीशचन्द्र पाराशर ने कहा कि विप्र सदैव सर्वेभवन्तु सुखिनः की कामना ही करते हैं, वे अपने ज्ञान से सभी को योग्य,सक्षम एवं निपुण बनाते हैं, विश्व में भारत को जगत गुरु की उपाधि से अलंकृत करने का  श्रेय ब्राह्मण समाज को ही जाता है।

राम नारायण ब्रजवासी एवं प. रामजीवन शर्मा ने कहा कि बहु संख्यक एवं सवर्ण के नाम पर ब्राह्मण समाज का शोषण एवं उत्पीड़न बर्दास्त नहीं किया जायेगा, हमें अपने शक्ति पहचाननी होगी और संगठित होकर अधिकार प्राप्त करने होंगे। उन्होंने कहा कि आरक्षण के कुठाराघात से विप्र समाज अपने अधिकारों से वंचित है।

वरिष्ठ ब्रजभाषा कवि अशोक अज्ञ ने काव्यमय भावांजलि प्रस्तुत की।

संगोष्ठी का संचालन महासचिव जगदीश नीलम ने किया।

इस अवसर पर प. सुरेशचंद्र उपाध्याय, नरेंद्र शर्मा, डॉ आर सी द्विवेदी, नंदकिशोर शर्मा, ब्रजेश शर्मा, रसिक दीक्षित, महन्त प्रिया शरण महाराज, कन्हैया पाण्डे, आचार्य ऋषिकुमार, अविनाश शर्मा, जितेंद्र महाराज, चिंतन वल्लभ गोस्वामी आदि ने भी विचार व्यक्त किये।

आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

समारोह में अनेक विप्र महानुभाव उपस्थित रहे।


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