सच्चे शिक्षक के बिना विद्यार्थियों को लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो सकती है:डॉ सुलक्षणा अहलावत

 भविष्य के निर्माता एवं सच्चे मार्गदर्शक होते हैं शिक्षक : डॉ सुलक्षणा अहलावत



अजमेर । सामाजिक संस्था विलक्षणा एक सार्थक पहल समिति, रोहतक और स्नातकोत्तर समाजशास्त्र विभाग, दयानंद कॉलेज, अजमेर द्वारा कॉलेज प्रांगण में शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी तथा विलक्षणा ग्लोबल एजुकेटर अवार्ड 2021 का आयोजन किया गया। "बदलती शिक्षा पद्धति एवं शिक्षकों की भूमिका" दो दिवसीय संगोष्ठी का विषय रहा। हरियाणा कला परिषद के अतिरिक्त निदेशक महाबीर गुड्डू इस सम्मान समारोह एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्यातिथि के रूप में सम्मिलित हुए तथा दयानंद कॉलेज के प्रधानाचार्य लक्ष्मीकांत शर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। टांटिया विश्वविद्यालय, श्रीगंगानगर के शोध निर्देशक डॉ नरेश सिहाग, एमिटी विश्वविद्यालय, गुरुग्राम की सहायक आचार्य डॉ सुप्रिया संजू तथा दयानंद महाविद्यालय, अजमेर की सहायक आचार्य प्रो. उन्नति शर्मा ने संगोष्ठी में वक्ता के रूप शिरकत की। इस कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों एवं शोधार्थियों को सम्मानित किया गया। इस सम्मान समारोह में मुख्यातिथि ने अपने कर कमलों से 15 राज्यों की 65 विभूतियों को सम्मानित किया।



 सम्मानित शिक्षकों को सम्बोधित करते हुए अतिरिक्त निदेशक महाबीर गुड्डू ने कहा कि आज हमारे समाज को ऐसे शिक्षकों की जरूरत है जो हाथ पकड़कर गलती को बताए, समझाए और बच्चे को गलती का अहसास करवाकर उन्हें सही मार्ग पर चलना सिखाए। वहीं दयानंद कॉलेज के प्राचार्य लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा कि हमें शिक्षा मूलभूत ढांचे में अपेक्षित सुधार करने होंगे और बच्चों के दिमाग पर पढ़ाई के दबाव को घटाना होगा तथा उन्हें समझाना होगा कि केवल नंबर या डिग्री मायने नहीं रखते हैं, उनके साथ ज्ञान मायने रखता है। डॉ सुलक्षणा अहलावत ने अपने सम्बोधन में कहा कि असली मायनों में एक शिक्षक ही भविष्य निर्माता एवं सच्चा मार्गदर्शक होता है। सच्चे शिक्षक के बिना विद्यार्थियों को लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो सकती है। कार्यक्रम में मुख्यातिथि द्वारा डॉ मंजु नावरिया की पुस्तक "जनसंचार माध्यम एवं युवा संस्कृति" का विमोचन भी किया गया।

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