धार्मिक रीतिरिवाजों के साथ मनाया गया दशहरा, बुराई के प्रतीक दशानन का दहन

 धार्मिक रीतिरिवाजों के साथ मनाया गया दशहरा, बुराई के प्रतीक दशानन का दहन


( सचिन त्यागी )


बागपत  जिले में शुक्रवार को विभिन्न स्थानों पर रावण के पुतले का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया। लोगों ने श्रीराम की जय के नारे लगाए। जिलाधिकारी ने जनपद के लोगों से भगवान श्रीराम के आदर्श अपनाने की अपील की। 



बागपत जिले में शहर से लेकर देहात तक रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। सभी कार्यक्रम स्थलों पर पुलिस की निगरानी रखी गयी । बागपत में नगर से बाहर रावण दहन किया गया है कस्बे में रामलीला मंचन से श्री राम रावण दहन स्थल तक सेना लेकर पहुंचे और श्रीराम व लंकापति रावण के भीषण युद्ध का मंचन किया गया जिनके बाद रावण दहन श्री राम के हाथों से किया गया। इस मौके पर बीजेपी विधायक योगेश धामा व जिलाधिकारी मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी जनपद के लोगो को विजय दशमी की शुभकामनाएं दी।  महामंडलेश्वर भैयादास ने बताया कि दशहरा पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने लंकापति रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्ति की थी। उनका कहना है कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रावण का दहन करने से व्यक्ति के अवगुणों का नाश होता है। तथा रोग, दोष, शोक, संकट आदि से मुक्ति मिलती है और ग्रह दोष खत्म होते हैं। जिले के नगर से लेकर देहात तक  विभिन्न स्थानों पर रावण के पुतले का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया। 


रटौल व ललियाना में रावण का पुतला धु धुकर जला


 रटौल रामलीला में शुक्रवार शाम रावण वध का मंचन किया गया। जिसके बाद रावण के पुतले का दहन किया गया। जिसको देखने के लिए आस पास के हजारो लोग पहुचे।रामलीला में देवेंद्र अरोरा ,पंडित कुश प्रशाद शास्त्री ,संजय अरोरा ,बंटी गुप्ता ,अंकुर गुप्ता ,राजू पाल ,पम्मी कश्यप ,महेंद्र शर्मा ,रोहित , प्रवीण गुप्ता आदि का सहयोग रहा। 

उधर ललियाना गांव में तीन दिवसीय मेले का समापन किया गया शाम के समय रावण के पुतले का दहन किया गया। बृहस्पतिवार शाम खेकड़ा सीओ युवराज सिंह व थाना प्रभारी सतेंद्र सिंह सिध्धु ने भी मेले का निरीक्षण किया । पुतले का दहन देखने के लिए सैकड़ो लोग मौजूद रहे।


इसके अलावा बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व विजयादशमी को क्षत्रिय समाज के लोगों ने भी धूमधाम के साथ मनाया। उन्होंने घरों के अलावा सामूहिक रूप से शस्त्र पूजा की। क्षत्रिय लोगों ने पूजा के दौरान अपने शस्त्रों पर कलावा बांधा और रोली से तिलक कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। 



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