जिंदा कब्रगाहें हैं भृस्टाचार की बुनियाद पर खड़ी आलीशान इमारतें गुरुग्राम की : माईकल सैनी

जिंदा कब्रगाहें हैं भृस्टाचार की बुनियाद पर खड़ी आलीशान इमारतें गुरुग्राम की : माईकल सैनी 



तरविंदर सैनी ( माईकल ) आम आदमी पार्टी गुरुग्राम  का कहना है कि जब सरकार करे नजरअंदाज और ठेकेदार लापरवाह अपराधिक परवर्ती के और चोर हो तो हादसों में भला कैसे कमी आ सकती है  अर्थात पैसा कमाना ही मकसद बन जाए जब चंद बेईमान लोगों का तो  मर जाएं लोग किसे परवाह है !  



जी हाँ कुछ ऐसा ही देखने को मिला गुरुग्राम शहर के सेक्टर -109 में निर्मित रिहायशी इमारत  चिंटल पैराडिसो  डी-ब्लॉक इमारत के धराशाही हो जाने पर , जहाँ हुए हादसे में करीब तीन लोगों की मौत हो गई और कई गंभीर हालत में घायलावस्था में पहुँच गए , हंसती-खेलती जिंदगियां तबाह हो गई , लोगों के सुनहरे सपनों के आशियाने चकनाचूर हो गए जब भरभरा कर जमींदोज हो गई इमारत  जिसे जीवनभर की कमाई लगाकर खरीद किया था   क्या मालूम था उन्हें कि वह खुद एक दिन दुखद हादसे का शिकार बन जाएंगे   मगर बड़ा सवाल तो यह है कि जिन्हें मालूम था उन्होंने क्या किया ? 

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2002-03 में चौटाला सरकार द्वारा इस पूरे क्षेत्र की भूगोलिक स्तिथि को समझते हुए यहाँ आर-जोन बनाने और सीएलयू देने से इंकार कर दिया था तो किस सरकार ने यह रिहायशी इलाके की मंजूरी एव भवन निर्माण के आदेश जारी किए , क्या जाँच होगी ? अब हादसे के बाद फिर एक बार शिकायत दर्ज हुई है देखना होगा ।



खैर...हद तो तब हो जाती है जब सोसायटी में रहने वालों ने कई मर्तबा पहले भी बिल्डर अशोक सोलेमान व ठेकेदार के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई , इमारत की बालकनी सहित अनेकों बार ब्लॉक् के हिस्से टूटकर गिरने की भी शिकायतें दी  तमाम आला अधिकारियों से गुहार लगाई हुआ कुछ नहीं , 

यहाँ तक कि एक राष्ट्रीय अखबार ने इमारत में इस्तेमाल घटिया निर्माण सामग्री की शिकायतों के साथ बिल्डिंग स्ट्रक्चर प्लान की जाँच करने की खबरों को प्रमुखता से छापा था अनेकों बार परन्तु ढाक के वही तीन पात , जिसकी बाद में नगर निगम गुरुग्राम अधिकारी डिटीपीई आरएस बाठ साहब से एक्शन लेने की मांग की  तथा उन्होंने भी कार्यवाही करने का आश्वासन दिया   फिर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई बेइमान बिल्डर पर  नतीज़तन खोखली चमक देख आकर्षित हो विभिन्न शहरों से यहाँ बसने आए लोगों को आखिरकार तबाही और मौत मिल ही गई और  भविष्य में भी यही सिलसिला जारी रहने का अनुमान है यदि कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो ।


कुछ तो आकर चले गए कुछ जाने को तैयार ,

वर्षों से नहीं परषों से तो खबरे देख ही रहे हैं आप तो होशियार भई खबरदार ।

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