वैक्सीन के खिलाफ एकजुट हुए गुरुग्राम के वकील व स्वयं सेवी संस्थाए

वैक्सीन की गैरकानूनी जबरदस्ती , मास्क के गैरकानूनी चालान रोकने व अन्य महत्त्वपूर्ण दिशा निर्देश जारी करने हेतु यश गर्ग जिला उपायुक्त को ज्ञापन दिया गया ।



गुरुग्राम: यश गर्ग जिला उपायुक्त गुरुग्राम हरियाणा) से वार्तालाप करने लगभग 60 लोग पहुंचे जिसमे Awaken India Movement Team , गुरुग्राम बार से वकील व अन्य सामाजिक कार्यकर्ता सम्मिलित रहे ।


इस वार्तालाप में स्कूलों में वैक्सीन सर्टिफिकेट की मांग खारिज करने , पूरे जिले में मॉल व दुकानों को आधे समय खोलने के अवैज्ञानिक आदेशों को खारिज करने , मास्क के गैरकानूनी चालानो को तुरंत बंद करने , वैक्सीन की गैरकानूनी बाध्यता को लेकर सरकारी व गैर सरकारी विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने व अन्य महत्त्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी करने को लेकर जिला उपायुक्त से वार्तालाप हुई । इस मीटिंग में माननीय सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट  के ऑर्डर , आरटीआई व अन्य सरकारी सबूतों को उपायुक्त के समक्ष पेश किया गया ।

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जिला उपायुक्त यश गर्ग ने इस विषय पर कहा आपकी मांगो को लेकर हम गंभीर है हम सरकार के आदेशों के तहत कार्य कर रहे हैं आपकी मांगो को सरकार के पास पहुंचा दिया जाएगा ।

अजेय भारत मीडिया से बात करते हुए एडवोकेट मोहित खटाना ने बताया मास्क के नाम पर देश के नागरिकों के जो चालान काटे जा रहे हैं उन पर्चियों पर ये उल्लेखित नही है की किस धारा के तहत मास्क का चालान काटा गया है लोगो को डरा धमका कर जेल भेजने के नाम पर एक तरह से अवैध वसूली की जा रही है । मुंबई हाई कोर्ट में इसी तरह के एक मामले में पीड़ित के ऊपर गलत तरीके से दर्ज की गई एफआईआर को खारिज कर दिया गया है सरकारी अमला पक्ष कोई भी वैज्ञानिक आधार पेश नही कर पाया जिससे ये साबित हो सके की मास्क पहनने से कोरोना वायरस रुकता है सीनियर एडवोकेट निलेश ओझा इस पूरे मामले में पीड़ित की और से पैरवी कर रहे हैं ।


वैक्सीन को लेकर भी इसी तरह की गैर कानूनी सरकारी व गैर सरकारी मनमानी एक प्रथा के रूप में पूरे देश में चलाई जा रही है जबकि ये सरासर संवैधानिक अधिकारो का हनन है व माननीय कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है


स्कूलों में नाबालिक बच्चो तक को वैक्सीन सर्टिफिकेट पेश करने के लिए टॉर्चर किया जा रहा है जिसके बिना परवेश नही करने तक के गैर कानूनी आदेश दिए जा रहे हैं । खटाना ने आगे बताया इन सभी कृत्यों को देखकर ऐसा प्रतित होता है विदेशी ताकतों के साथ मिलकर सत्ता व विपक्ष के पदों पर विराजमान राजनेता लोग भारत के संविधान को नष्ट करने की साजिश रच रहे हैं जिससे देशवासियों को गुलाम बनाया जा सके । अगर समय रहते देशवासी नही जागे तो आगे चलकर ये सभी ताकते मिलकर देशवासियों को गुलामी को बेड़ियों में जकड़ लेंगी ।


इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए जिला उपायुक्त से वार्तालाप करने को Awaken India Movement टीम , गुरुग्राम बार से वकील व भाई राजीव दीक्षित समर्थक एकत्रित हुए थे व इस दौरान कुछ महत्तवपूर्ण दिशा निर्देश जारी करने को लिखित में ज्ञापन सौंपा गया था जोकि इस प्रकार है


1. सभी स्कूलों को निर्देश दिए जाएं कि पेरेंट्स-टीचर मीटिंग में सभी नाबालिक बच्चो के माता पिता को वैक्सीन निर्माता कंपनियों के द्वारा फेक्ट शीट में बताये गए कोरोना वैक्सीन के दुष्प्रभावों इसमें इस्तेमाल किये गए तत्त्वों व INFORMED CONSENT FORM के बारे में अवगत कराए व किसी भी अभिभावक पर वैक्सीन लगाने का दबाव ना दिया जाये, जोर जबरदस्ती नहीं की जाये व वैक्सीन सर्टिफिकेट पेश करने का दबाव ना दिया जाये क्योकि माननीय बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश अनुसार Writ Petition No. 1820 of 2021 कोरोना वैक्सीन स्वेछिक है , माननीय सुप्रीम कोर्ट में केंद्रीय सरकार के हलफनामे अनुसार कोरोना वैक्सीन पूर्णतः स्वेच्छिक है |



2. वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों के द्वारा फेक्ट शीट में बताये गए दुष्प्रभावों को लेकर प्रचार प्रसार के लिए दिशा निर्देश दिए जाये जोकि इस प्रकार है ( बेहोशी महसूस होना , रक्त के थक्के बनना ,चक्कर आना , दिल की धड़कन में परिवर्तन , सांस फूलना , होठ/चेहरे या गले में सूजन आना , मांसपेसियों/जोड़ो में दर्द, सिर दर्द, कपकपी आना तबियत ठीक ना लगना , चकत्ते या पित्ती आना , पेट में दर्द , उलटी या दस्त लगना , रक्त में प्लेटलेट्स की कमी व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के अनुसार मौत भी इसका कारण बन सकती है ) |


3. कोरोना वैक्सीन लगाने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा नागरिको को वैक्सीन के दुष्प्रभावों व सहमति पत्र (Consent letter) पर हस्ताक्षर के बारे में अवगत नहीं कराया जा रहा है जोकि धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है जबकि कोरोना वैक्सीन की फेक्ट शीट में कोरोना वैक्सीन निर्माता कंपनियों के द्वारा इसके दुष्प्रभावो व सहमति पत्र (Consent letter) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी दी हुई है ऐसे गैर जिम्मेदार अधिकारियो / स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ जल्द से जल्द सख्त कार्यवाही की जाये |


4. वैक्सीन के विकल्प के रूप में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के द्वारा भी रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है इसको लेकर आयुष मंत्रालय भारत सरकार ने अपनी वेबसाइट में पूरा उल्लेख किया हुआ है व RTI के जवाब में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के द्वारा रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के बारे में बताया गया है अतः कोरोना वैक्सीन लगवाने से पहले नागरिको को आयुष मंत्रालय द्वारा बताई गयी ओषधियो व तरीको को प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जाये व इसका प्रचार प्रसार भी किया जाये l  


5. माननीय सुप्रीम कोर्ट में केंद्रीय सरकार के हलफनामे अनुसार कोरोना वैक्सीन पूर्णतः स्वेच्छिक है , माननीय बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश अनुसार Writ Petition No. 1820 of 2021 कोरोना वैक्सीन स्वेछिक है , केंद्र सरकार से प्राप्त RTI के जवाब अनुसार कोरोना वैक्सीन स्वेछिक है अतः हमारे मौलिक अधिकारो का उलंघन नहीं किया जा सकता इसका हनन करना अपराध की श्रेणी में आता है मौलिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए मुख्य सार्वजनिक स्थलों , कोरोना वैक्सीन लगाने के सभी स्थलों, सरकारी हस्पतालो , स्वास्थ्य केन्द्रो , सरकारी व गैर सरकारी विभागों पर कोरोना वैक्सीन में इस्तेमाल किये गए सभी तत्त्वों के नाम व कोरोना वैक्सीन के स्वेछिक होने के बड़े-बड़े होर्डिंग लगाएं जाये जिससे नागरिको में वैक्सीन में इस्तेमाल किये गए सभी तत्त्वों की जानकारी हासिल हो सके व वैक्सीन की अनिवार्यता को लेकर भ्र्म की स्थति खत्म हो सके l 



6. कोरोना की वैक्सीन को सिर्फ Clinical Trial हेतु Emergency Use Authorization आपात स्थिति में सीमित इस्तेमाल करने कि अनुमती दी गई है वैक्सीन निर्माता कंपनियों ने फेक्ट शीट में बकायदा इसका हवाला दिया हुआ है जबकि आये दिन सरकारी व गैर सरकारी विभागों में वैक्सीन की बाध्यता की खबरे सामने आ रही है कानूनन वैक्सीन को किसी भी सरकारी या गैर सरकारी विभाग के द्वारा अनिवार्य नहीं किया जा सकता (माननीय हाई कोर्ट्स के आदेश इस विषय में दिए जा चुके है [Registrar General High Court of Meghalaya Vs. State of Meghalaya 2021 SCC Online Megh 130, Re Dinthar Incident Vs. State of Mizoram 2021 SCC Online Gau 1313, Common Cause Vs. Union of India (2018) 5 SCC ) ऐसे सभी विभागों के गैर जिम्मेदार अधिकारियो के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाये l


7. मास्क को लेकर गैर कानूनी तरीके से किये जा रहे चालान पर तुरंत रोक लगाने के आदेश दिए जाये व मास्क के लिए नागरिको को बाध्य करना अपराध की श्रेणी में आता है ये नागरिको के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है मास्क को लेकर जो पर्चियां काटी जा जारी है वो गैरकानूनी है | पर्चियों पर ये तक उल्लेखित नहीं है की किस धारा के तहत मास्क ना लगाने को लेकर धनराशि ली गयी है व माननीय मुंबई हाई कोर्ट के आदेश अनुसार WRIT PETITION NO. 1546 OF 2020 मास्क अनिवार्य नहीं किया जा सकता है , दिल्ली सरकार के आदेश No.52/DGHS/PH-IV/COVID-19/2020/prsecyhfw/1230-84 के अनुसार मास्क अनिवार्य नहीं है व अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक तथ्य वैज्ञानिको, डॉक्टरों के पास उपलब्ध नहीं है जिससे ये साबित हो सके की किसी भी प्रकार का मास्क कोरोना के अति सूक्षम वायरस को रोकने में सक्षम है (कोरोना वायरस का आकार 60-140 नैनोमीटर है) जबकि किसी भी प्रकार के मास्क के छिद्रो का आकार माइक्रो मीटर में होता है विश्व भर में मास्क के इस्तेमाल को लेकर दर्जनों स्टडीज के अनुसार मास्क जानलेवा व घातक हो सकता है तथा RTI के जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग ने कहा है मास्क स्वेच्छिक है |


8. ONLINE Class की वजह से बच्चो के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है जल्द से जल्द सभी स्कूलों को खोलने के आदेश दिए जाये |


9. बाजारों , मॉल के खुलने व बंद करने को लेकर सिमित समय निर्धारण की पाबंदिया हटाई जाये क्योकि अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक तथ्य वैज्ञानिको, डॉक्टरों के पास उपलब्ध नहीं है जिससे ये साबित हो सके की कोरोना एक सिमित समय तक ही बाजारों , मॉल या अन्य भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर संक्रमण फैलाता है इस प्रकार की गैर वैज्ञानिक पाबंदिया हटाए जाने से व्यापारियों की आर्थिक हालत में भी सुधार होगा |


10. वैक्सीन लगने के बाद जिन नागरिको में इसके दुष्प्रभाव सामने आ रहे है उन सभी दुष्प्रभाव पीड़ितों की लिखित शिकायते लेने के लिए सरकारी हस्पताल / मिनी सचिवालय में एक सरल प्रक्रिया चालू की जाये |


11. उन सभी पत्रकारों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाये जो कोरोना को लेकर गलत रिपोर्टिंग करते हुए नागरिको में डर व भय का माहौल बना रहे है |


मोहित खटाना के अनुसार मास्क को लेकर माननीय बॉम्बे हाई कोर्ट का आर्डर , मास्क को लेकर दिल्ली सरकार के आदेश , वैक्सीन स्वेच्छिक को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा दिया गया हलफनामा , RTI व उक्त बिन्दुओ के अन्य सरकारी दस्तावेज पत्र के साथ संलगित है जिनको लिंक के द्वारा पीडीएफ प्रारूप में डाउनलोड किया जा सकता है ।


https://drive.google.com/file/d/1htJLf6TmHk9JZs-fidkwNVi5wUprC5BT/view?usp=drivesdk

इस मौके पर लगभग 60 लोग  एडवोकेट अंजू जगदम्बिनी , एडवोकेट कुलभूषण भारद्वाज , कर्नल सर्वदमन ओबेरॉय , एडवोकेट रविंद्र यादव , एडवोकेट संजय लंबा , एडवोकेट हिमांशी यादव ,  एडवोकेट राजीव खटाना , एडवोकेट योगेश भारद्वाज , एडवोकेट राहुल शर्मा , एडवोकेट कमलदीप सिंह , एडवोकेट कपिल , एडवोकेट गौतम गंभीर , एडवोकेट सुनील यादव , एडवोकेट सोनम , एडवोकेट विनोद कुमार , एडवोकेट राजेश कुमार , सूबेदार सुलेख खटाना , अजय बैंसला , आशुतोष सिंह , सुलभा चौधरी , वीना पदमनाबन , डॉक्टर मेघा , विमी रथ , अनुराग शर्मा , अंकुर तिवारी , श्याम सुंदर यादव प्रधान , अक्षय वत्स, अनिल सेठी , योगेश सेठ , मानसी कुमारी , समुद्र सूद , अनिल सेठी , माइकल सैनी , मनोज बंसल, उमेद सिंह प्रधान , मृदुल साह , मोहित कुमार जावलिया ,  राजीववादी गोविंद मिश्रा , राजीववादी अशोक कुमार , राजीववादी कृष्ण कुमार , राजीववादी सुरेंद्र शर्मा , राजीववादी योगेश अरोड़ा , राजीववादी एडवोकेट मोहित खटाना व अन्य सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे ।

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