यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध में अभी भी फसें है ये छात्र और उनका भविष्य

दिल्ली । यूक्रेन -युद्ध संकट के बीच भारत सरकार द्वारा ऑपरेशन गंगा के तहत भारत वापस लाये गए भारतीय मेडिकल विद्यार्थियों को अब शेष शिक्षा भारत मे ही पूर्ण कराने की पुरज़ोर मांग अभिभावकों ने दिल्ली जंतर मंतर पर उठाई है।



उक्त जानकारी एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव पंकज धीरज ने देते हुए बताया कि गुरुवार को पूरे देश के करीब 16 प्रदेशों से - पेरेंट्स एसोसिएशन ऑफ यूक्रेन एमबीबीएस स्टूडेंट्स के अध्यक्ष डॉ आर बी गुप्ता के आह्वान पर पहुंचे सैंकड़ों  अभिभावकों व विद्यार्थियों ने जहां ऑपरेशन गंगा के लिए पीएम मोदी व भारत सरकार का आभार जता इसे  अभूतपूर्व प्रयास बताया



वहीं भारत सरकार द्वारा भारत वापस लाये गए विद्यार्थियों को देश के ही 1100 से अधिक मेडिकल कॉलेजों में उनके सेमिस्टरो के आधार पर आगामी शिक्षा जारी रखने की मांग भारत सरकार से की। 


साथ ही यूक्रेन में शहीद हुए कर्नाटक के छात्र नवीन कुमार को मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि भी दी गई।

इस दौरान शांत प्रदर्शन में संबोधित करते हुए एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ आर बी गुप्ता ने कहा कि यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध में सब कुछ बर्बाद हो गया है।


 यूक्रेन में एमबीबीएस करने गए सभी छात्रों का भविष्य खतरे में है। क्योंकि यूक्रेन का बुनियादी ढांचा तहस नहस हो चुका है। इस समय वहां छात्रों के प्रयोगात्मक अध्ययन के लिए सभी आवश्यक चीजें उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। अपनी ये ही अपील करने के लिए पीएम मोदी से हमे जल्दी ही व्यक्तिगत रूप से समय मिलने जा रहा है।

 राष्ट्रीय महासचिव पंकज धीरज ने कहा कि यदि भारत में एमबीबीएस की सीटें अपेक्षाकृत पर्याप्त होतीं और शिक्षा सस्ती होती, तो हमारे छात्र दूर देश मे नहीं जाते और हजारों विद्यार्थियों की जान खतरे में नहीं पड़ती।

अब ,यहीं आगामी शिक्षा जारी रखने से अमेरिकी डॉलर में भारतीय मुद्रा का भारी हस्तांतरण होने से भी बचेगा।

एसोसिएशन के डॉ विश्व मित्र आर्य व मोर मुकुट यादव ने कहा कि वर्तमान सत्र से ही भारतीय मेडिकल कॉलेजों में  उत्तीर्ण सेमेस्टर/विषयों के अनुसार यूक्रेन से लौटे विद्यार्थियों को समायोजित किया जाए ।

एसोसिएशन के आमोद उपाध्याय व डॉ मनवीर सिंह ने सभा मे कहा कि कई नए मेडिकल कॉलेजों में केवल प्रथम वर्ष की सीटें भरी गई हैं जबकि द्वितीय वर्ष के बाद की सीटें अभी भी खाली हैं , जिनमे इन छात्रों की शिक्षा जारी रखी जा सकती है।

 वक्ताओं ने यह भी बताया कि चीन के एमबीबीएस छात्रों के अध्ययन को एनएमसी द्वारा ऑनलाइन होने से खारिज कर दिया गया है और वही मानदंड यूक्रेनी ऑनलाइन एमबीबीएस पर लागू हो सकते हैं।  इसलिए इस परिदृश्य से बचने के लिए इन छात्रों को भारतीय  चिकित्सा में ही समायोजित करना अत्यंत आवश्यक है।अंततोगत्वा , भारतीय विद्यार्थियों को अपने देश मे ही चिकित्सीय सेवा प्रदान करनी है। इस सभा मे दिल्ली,हरियाणा, वेस्ट बंगाल,यूपी,एमपी,राजस्थान, पंजाब , तेलंगाना , मुम्बई आदि सहित 16 राज्यों के अभिभावकों व मेडिकल विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।जबकि, एसोसिएशन के  सचिव प्रमोद कपूर,मनोज भारद्वाज,उमा गुप्ता, डॉ संजय बेदी,डॉ हरीश बतीस ,एड नरिन्द्र कुमार, हर्षा सिंघल,पंकज अग्रवाल,डॉ किरण श्रीवास्तव ,किशन अरोरा, रमेश सिंघल,जेपी सहारन,शम्भू दयाल शर्मा,वी प्रसाद , राम मेहर,सोनिया लाम्बा ,डॉ बीएन मौर्या, सरत सत्यपथे डॉ आर बी गुप्ता सहित अन्य अभिभावक व विद्यार्थी उपस्थिति रहे।

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