भगवान परशुराम जन्मोत्सव को अन्य महापुरुषों की जयंती की तरह सरकारी उत्सव घोषित किया जाए

 गुडग़ांव, 24 मई – आज जेष्ठ माह कृष्ण पक्ष की नवमी के शुभ दिन 24 मई 2022 को कश्यप ऋषि की जयंती मनाई जा रही है जोकि एक खुशी की बात है। हरियाणा सरकार द्वारा इस समारोह को राज्य स्तर पर कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री महोदय के मुख्य अतिथेय में मनाया जा रहा है ।यहां कुछ आवश्यक बातों का उल्लेख करना जरूरी हो जाता है जैसे कि महर्षि कश्यप ब्रह्मा जी के मानस पुत्रों में से, मानस पुत्र मरीचि एवं कला के पुत्र थे ।पुराणों में महर्षि कश्यप को सृष्टि की संरचना करने का श्रेय प्राप्त हुआ है। देव, दैत्य, दानव, मुनि, ऋषि, यक्ष, गन्धर्व, किन्नर और यहां तक की पशु-पक्षी, वनस्पति और अन्य जीवों की रचना भी महर्षि कश्यप द्वारा की गई थी। पुराणों में ऋषि कश्यप जी की जन्म तिथि का जिक्र नहीं मिलता परंतु उनकी महानता को विशेष स्थान प्राप्त है, जिसका हम सभी को सम्मान करना चाहिए।

लेकिन एक बात का प्रश्न उठता है कि क्या जिस तरह से अन्य ऋषि-मुनियों व महापुरुषों की एक श्रेणी बनाई गई है जिनकी जयंती/ जन्मोत्सव सरकारी तौर पर राज्य स्तर पर सरकार द्वारा मनाया जाता है उस सूची से भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम जी को क्यों आज तक बाहर रखा गया है।



अतः इन परिस्थितियों में मेरा हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर से निवेदन है कि अविलंब भगवान परशुराम जी के जन्मोत्सव, अक्षय तृतीया को भी अन्य महापुरुषों की जिनकी जयंतिया राज्य स्तर पर मनाई जाती हैं उसी सूची में सम्मिलित किया जाए और प्रत्येक वर्ष भगवान परशुराम के जन्मोत्सव को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर राज्य/केन्द्रीय सरकारों द्वारा धूमधाम से मनाया जाए।

आज के समय में ब्राह्मण अपने आप को वर्तमान सरकार में उपेक्षित महसूस कर रहा है ।अतः सरकार को अपना मत स्पष्ट करते हुए कि वह ब्राह्मणों की उपेक्षा नहीं कर रही बल्कि उनका उचित सम्मान उन्हें देने के लिए सदैव तत्पर है, इसलिए ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन किया जाए ताकि गरीब एवं निर्धन ब्राह्मणों का कल्याण संभव हो सके। आशा है सरकार भगवान परशुराम जन्मोत्सव को सरकारी उत्सव और ब्राह्मण कल्याण बोर्ड के गठन की प्रक्रिया को तुरंत लागू करके अपना मत स्पष्ट करेगी।

ब्राह्मण सदैव सभी बिरादरी और वर्गों का सम्मान करता आया है लेकिन वह सम्मान किसी मजबूरी या दबाव में नहीं करता बल्कि अपने स्वभाव/प्रवृत्ति के अनुसार करता है , क्योंकि उसने सदैव सभी के सुख की कामना की है और, ‘सर्वे भवंतु सुखिनः, सर्वे संतु निरामया ।सर्वे भद्राणि पश्यंतु मां कश्चित् दुख भाग भवेत्।’ की नीतियों का पालन किया है। इसलिए कोई भी सरकार ब्राह्मणों को लाचार समझने की भूल ना करें, यदि ब्राह्मणों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई गई और ब्राह्मणों की उपरोक्त दो मांगे पूर्ण नहीं की गई, तो ब्राह्मण जिस भगवानपरशुराम का वंशज है उसके आचरणों पर चलने को विवश होगा जो सरकार की भारी भूल साबित होगी।


योगेश कौशिक, अधिवक्ता, सेवा निवृत्त, मुख्य लेखाधिकारी,

प्रदेश महामंत्री, विप्र फाउण्डेशन, मुख्य संरक्षक, आदर्श ब्राह्मण सभा, गुरुग्राम, हरियाणा


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