विभाजन के समय के बच्चे आज के बुजुर्गों से प्रेरणा लेने का आह्वान

 विभाजन के समय के बच्चे आज के बुजुर्गों से प्रेरणा लेने का आह्वान  



-विभाजन विभिषिका स्मृति दिवस मनाकर बुुजुर्गों को दिया सम्मान



गुरुग्राम। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विभाजन विभिषिका स्मृति दिवस की घोषणा के बाद पहले वर्ष का कार्यक्रम यहां आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उस दौर के समय को उन लोगों के जहन में में मिले दर्द को सांझा किया गया। आज बुजुर्ग हो चुके उस समय के बच्चों ने जब अपनी दास्तां सुनाई तो हर किसी की आंखें नम थीं। समारोह में अपना संबोधन देते हुए मुख्य अतिथि हरियाणा भाजपा अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ की भी आंखें भर आई। उन्होंने उस दौर को कभी ना भूलने की बात कही। 



विभाजन विभिषिका स्मृति दिवस आयोजन समिति की ओर से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस समिति के पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर संयोजक हैं और सीएसआर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष बोध राज सीकरी सदस्य हैं। कार्यक्रम में विभाजन के समय के उन बच्चों को भी यहां सम्मानित किया गया, जो आज 80 साल या इससे अधिक उम्र के हो चुके हैं। उन्हें पटके, टोपी, माला पगड़ी, पौधा और तिरंगा आदि देकर सम्मान दिया गया। 


इस अवसर पर अपने संबोधन में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने कहा कि आजादी हमें बहुत बड़ी कीमत पर मिली थी। यह विभाजन की कीमत के साथ 10 लाख बेकसूर लोगों की मौत और डेढ़ करोड़ लोगों के शरणार्थी की कीमत पर मिली थी। इसके साथ 10 हजार बहन, बेटियों की इज्जत लुटी गई। उस समय कांग्रेस के नेताओं ने भले ही कुछ आश्वासन दिए हों, लेकिन उनके सामने ही यह सब हुआ। वे खुद सुरक्षित हुए लेनिक 10 लाख लोग मारे गए। एक लाइन खींच देने से ही बंटवारा हो गया। आजादी के लिए शहीद भगत सिंह की तीन पीढिय़ों ने लड़ाई लड़ी। 



 धनखड़ ने विभाजन के पीडि़तों, उनसे जुड़े लोगों और आम नागरिकों से कहा कि हम बुरे दिन भूल गए तो वे दिन फिर से आ जाएंगे। अपने बच्चों को, युवाओं को उस समय के घटनाक्रम से अवगत कराएं, ताकि उन्हें पता रहे कि उनके बुजुर्गों ने कितनी यातनाएं झेली हैं। वे भविष्य में ऐसे हालातों से सतर्क रहें। उन्होंने अंडेमान निकोबार द्विप समूह में भी जाकर देखा। वहां ऐसा इतिहास पता चला, जो कि हमसे छुपाया गया। नेताजी ने अंडेमान निकोबार को आजाद कराकर झंडा फहराया था। वह तारीख इतिहास से गायब कर दी गई। उन्होंने कहा कि जीवन में चुनौतियां कभी खत्म नहीं होती। यह कार्यक्रम उन दर्द भरी यादों को याद करना मात्र नहीं हो। इसे अपने लिए प्रेरणा बनाना है।  सूरजपाल अम्मु ने प्रेरणात्मक संदेश दिया । 


विभाजन की त्रासदी एक दुखद घटना: गार्गी कक्कड़ 

 भाजपा ज़िला अध्यक्ष गार्गी कक्कड़ ने कहा कि 1947 में बंटवारे से दो अलग-अलग देश बन गए लेकिन उस दिन केवल दो देश का बंटवारा ही नहीं हुआ बल्कि इसके  साथ-साथ परिवारों, रिश्तो और दिलों का भी बंटवारा हो गया, इस बंटवारे ने बहुत से परिवारों को तबाह कर दिया। जिला अध्यक्ष ने अपने अनुभव साझा कर समापन किया और धन्यवाद प्रस्ताव दिया 


हमें विभाजन विभिषिका कभी नहीं पढ़ाया: सीकरी

समारोह में बुजुर्गों को नमन करते हुए बोधराज सीकरी ने कहा कि हमारे इतिहास के साथ खिलवाड़ किया गया है। हमें विभाजन विभिषिका के बारे में कभी नहीं पढ़ाया गया। विभाजन के समय को सोचकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। दंगों में किसी की जान गई तो किसी के अपनों की जान गई। इज्जत की खातिर अपनी बेटियों तक को मारना पड़ा था। उस दौर के घटनाक्रम को तस्वीरों के माध्यम से भी देखते हैं तो हकीकत सामने आ जाती है।  सीकरी ने कहा कि हमें अपने इन बुजुर्गों से शिक्षा लेनी चाहिए। इनके श्रम से सीखना चाहिए। इनकी नन्हीं आंखों के सामने तब सब कुछ लूट लिया गया। फिर भी उस समय के बड़ों ने इन्हें बड़े करने के लिए, पालन करने के लिए कठोर मेहनत की। छोटे से छोटा काम किया। 

कुछेक बुज़ुर्गो ने अपने अपने दर्द भरे अनुभव साझा किए।  धर्मबीर गाबा जो कांग्रिस से पाँच बार विधायक और एक बार मंत्री रह चुके है उन्होंने भी मंच साझा किया और अपने दर्द भरे शब्दों से मन मोह लिया। 


वीडियो के माध्यम से दिखाई विभिषिका

समारोह में एक वीडियो के माध्यम से विभाजन की विभिषिका दिखाई गई। जिसे देखकर उस दौर के हर व्यक्ति की आंखें नम हो गई। विभाजन में जिन्हें मार दिया गया, उनको दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर आरएसएस से जगदीश ग्रोवर, भाजपा जिला अध्यक्ष गार्गी कक्कड़, पूर्व सांसद सुधा यादव, मेयर मधु आजाद, डा. अशोक दिवाकर, प्रमोद सलूजा, पूनम भटनागर, सूरजपाल अम्मू, रमेश कालरा, नवीन गोयल, धर्मसागर, मनीष गाड़ौली, महेश यादव कार्टरपुरी,कन्हैया लाल आर्य, कंवरभान वधवा, राम बहादुर समेत अनेक लोग मौजूद रहे।

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