बिक्री केंद्र नहीं तो वितरण केंद्र भी नहीं कहना चाहिए प्रशासन को : माईकल सैनी (आप)



गुरुग्राम 5/8/22, तरविंदर सैनी आम आदमी पार्टी नेता का कहना है कि स्वम् सेवी संस्थाओं ,समाजिक संस्थाओं द्वारा अनुदान व निजी कंपनियों से सीएसआर फंड के रूप में धन लिया जा रहा है  तो 25₹/झंडे का शुल्क क्यों लिया जा रहा हैं और लिया ही जा रहा हैं तो चिन्हित स्थानों को वितरण केंद्रों का नाम क्यों दिया जा रहा है  अर्थात हमारी जानकारी अनुसार किसी भी चीज का वितरण तो सदैव निशुल्क ही होता है  अगर कीमत ली जा रही है तो इसका नाम बिक्री केंद्र नहीं रखा जा सकता है तो वितरण केंद्र भी नहीं रखा जाना चाहिए था प्रशासन द्वारा ? 


हर घर तिरँगा राष्ट्रीयता जगाने के लिए बताया जा रहा है  तो क्या इससे पहले राष्ट्रप्रेमियों में राष्ट्र के प्रति कम भावनाएं थी  जो हर घर पर तिरँगा नहीं फहरने के बावजूद देश पर मर मिट गए , हंसते हंसते फांसी के फन्दों को चूमकर कुर्बान हो गए ? 

आज भी कोई भारतीय चाहें वह किसी भी जाती धर्म पंथ समुदायों का ही क्यों न हो किसी मे भी राष्ट्रप्रेम की भावनाओं   तिरँगे के प्रति सम्मान में कोई अभाव नहीं है , हमारे अपने बुजुर्गों ने बलिदान दिए हैं और हमारे भीतर भी कम जज्बा नहीं था ना है और ना होगा   मगर जिनमें कमी रह गई थी शायद  वह आज अपनी रास्ट्रभगति दिखा रहे हैं  दमगज्जे भर रहे हैं ।


आज भाजपा और संघ जिन्होंने आज़ादी के आंदोलन में कोई योगदान नहीं दिया और जिन्होंने 52 वर्षों तक तिरँगे झंडे को सम्मान नहीं दिया ,जिन्होंने अपने कार्यालयों पर देश की शान तिरँगे झंडे से ऊपर भगवा झंडे को महत्व दिया और तिरँगा फहराने वालों पर मुकद्दमे दर्ज कराए वह जिन्होंने संविधान को नकारा उसकी प्रतियां फाड़ी थी कम स कम वह औरों को तो राष्ट्रीयता पर ज्ञानवर्धन ना करे , हालाँकि वह अपने द्वारा किए गए पापों को ढकना चाहते है  हर-घर तिरँगा फहराने की मुहिम चलाकर तो स्वागत है  उनका मगर इसके लिए वह जनता के टैक्स के पैसे और स्वम् सेवी संस्थाओं और निजी कंपनियों से तो अनुदान ना ले  अपने निजी कोष से चलाए मुहिम को  अगर सभी से सहयोग ले रहे हैं तो  फिर श्रेय अकेले भाजपा को ही क्यों ? 


प्रशासनिक अधिकारियों को चाहिए कि केंद्र सरकार की योजना है तो उसी तर्ज पर नीति निर्धारण करे  बजाय किसी सत्ताधारी दल की प्रशंसा करने व उसके लिए प्रचार करने में मशगुलियत दिखाने के - हम जानते हैं तिरँगा झंडा बिक्री नहीं किया जाता है और गैर  संवैधानिक है  बिक्री केंद्र नाम नहीं रखा जा सकता है मगर वितरण केंद्र भी तो नहीं रखा जाना चाहिए था  जब्कि 25₹/झंडा शुल्क लिया जा रहा है तो  कुछ अन्य नाम ही रख लेना चाहिए था ।


प्रतियोगिताएं आयोजित करना अच्छी बात है और माईकल सैनी ने सुझाव भी दिए थे  तथा जिनपर अमल भी किया गया प्रशासन द्वारा जो सराहनीय प्रयास भी है , ध्यान देने योग्य बात यह है कि तिरँगा झंडा फहराने के कुछ नियम है उनकी अनुपालना भी नियमानुसार की जानी चाहिएं जिसके लिए जानकारों के अभिभाषण , प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित की जानी चाहिए और शहीदों के बारे जानकारियां सांझा की जानी चाहिए  ताकि अधिक से अधिक युवा पीढ़ी को उनके विषय में जानकारियां हासिल हो सके ।

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