स्वयंवर में राम जी की हुई सीता जी

श्री गुरु द्रोणाचार्य रामलीला क्लब ( रजि.) गुरुग्राम गांव 


स्वयंवर में राम जी की हुई सीता जी



दशरथ पुत्र श्री राम व लक्ष्मण सहित मुनि विश्वामित्र जी जनकपुरी ( मिथिलापुरी ) की ओर निकल चुके निकले थे जैसे ही जनकपुरी के राजा जनक जी को मालूम चला कि मुनि विश्वामित्र जी पधारे हैं तो उन्होंने आदर सत्कार के साथ दोनों नव युवकों का परिचय पूछा और उनको अपने महलों में ले गए और सीता जी के स्वयंवर के लिए निमंत्रण भी दिया तत्पश्चात राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता का स्वयंवर रचा जिसमें कि देश विदेश के सैकड़ों राजाओं ने अपना जोर आजमाया परंतु वह शिव धनुष को उठाना तो दूर उसको टस से मस ना कर सके |  यह खबर जैसे ही लंका के राजा रावण को लगी तो अचानक रावण भी स्वयंवर में पहुंचा और जैसे ही वह शिव धनुष को उठाने वाला था आकाशवाणी हुई कि "हे रावण तेरी लंका में आग लग गई है"  भरे दरबार में रावण सीता को चेतावनी देकर गया कि "वह दिन उन्हें लंका अवश्य दिखाएगा"  उसके पश्चात राजा जनक काफी दुखी हो जाते हैं की धनुष को कोई भी राजा नहीं चिल्ला चढ़ा सका |


"हाय अफसोस अफसोस दुनिया में कोई बशर अब बहादुर नजर मुझको आता नही,  होता मालूम है पहले से मुझको अगर तो मैं कभी भी स्वयंबर रचा था नहीं" 


मुनि विश्वामित्र जी के कहने पर श्री राम जी ने शिव धनुष नमन कर उठाया व उसके दो टूक कर दिए जैसे ही सूचना परशुराम जी को मिली वह बहुत ही ज्यादा आक्रोशित होकर दरबार में आए और उन्होंने राजा जनक से पूछा कि 


"राजा जनक जल्दी बतला ये धनवा किसने तोड़ा है, भरे स्व्यंवर में सीता से नाता जोड़ा है"


सामाजिक दायित्व निभाई मंच से *सिंगल यूज पॉलिथिन* का संदेश भी दिया गया 



आज की लीला में राम बारात,  सीता जी का राम जी संग विवाह वा श्री राम जी के राज्यभिषेक की घोषणा वा कैकई मंथरा संवाद की लीला का मंचन किया जाएगा

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