ब्लूमिंग डेल इंटरनेशनल स्कूल में डांडिया नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया



गुरुग्राम: ब्लूमिंग डेल इंटरनेशनल स्कूल (सरस्वती एन्क्लेव, गुरुग्राम) में  डांडिया नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें विद्यालय के छोटे नन्हें नोनिहाल विद्यार्थियों व सभी बड़े विद्यार्थियों ने भाग लिया। सभी छात्र-छात्राओं ने डांडिया नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर सभी आगंतुक अभिभावकों व शिक्षकों का मन आनंदित कर दिया। इस डांडिया नृत्य में विद्यालय की शिक्षिकाओं ने भी नृत्य की प्रस्तुति की साथ ही समस्त अभिभावकों ने भी इस डांडिया नृत्य में अपना प्रदर्शन किया। 



गुजरात की लोक प्रसिद्ध डांडिया नृत्य काफी लोकप्रिय नृत्य है। विद्यालय की संचालिका व प्राचार्य श्रीमती रजनी तँवर ने कहा दुर्गा पूजा के अवसर पर विद्यालय के नन्हे मुन्ने विद्यार्थियों ने डांडिया नृत्य की प्रस्तुति देकर कर सब को आनंदित किया। नवरात्रि आते ही सभी का मन खुशी से झूम उठता है क्योंकि नौ दिन मां दुर्गा की आराधना में समर्पित किए जाते हैं।इसके अलावा इन नौ दिनों में गरबा और डांडिया खेलने की परम्परा भी काफी समय से चली आ रही है। बहुत कम लोग जानते हैं कि गरबा खेलने की शुरुआत कैसे, कब और कहां से हुई।



नवरात्रि में गरबा और डांडिया खेलने की परंपरा कई वर्षों पुरानी है। पहले इसे भारत के गुजरात और राजस्थान जैसे पारंपरिक स्थानों पर खेला जाता था, लेकिन धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता बढ़ती गई है। यदि हम गरबा शब्द की तरफ ध्यान दें तो यह शब्द गर्भ और दीप से मिलकर बना है। नवरात्रि के पहले दिन मिट्टी के घड़े में बहुत से छेद करके इसके अंदर एक दीपक प्रज्वलित करके रखा जाता है।इसके साथ चांदी का एक का सिक्का भी रखते हैं। इस दीपक को ही दीप गर्भ कहा जाता है।



दीप गर्भ की स्थापना के पास महिलाएं रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर माता शक्ति के आगे नृत्य कर उन्हें प्रसन्न करती हैं।यदि बात करें दीप गर्भ की तो यह नारी की सृजन शक्ति का प्रतीक है और गरबा इसी दीप गर्भ का अपभ्रंश रूप है।



गरबा नृत्य कई तरह से और कई चीजों के साथ किया जाता है। गरबे में महिलाएं और पुरुष ताली, चुटकी, डांडिया और मंजीरों का उपयोग करते हैं। ताल से ताल मिलाने के लिए महिलाएं और पुरुषों का दो या फिर चार का समूह बनाकर नृत्य किया जाता है। गरबे के नृत्य में मातृशक्ति और कृष्ण की रासलीला से संबंधित गीत गाए और बजाए जाते हैं। गुजरात के लोगों का यह मानना है कि गरबा नृत्य माता को बहुत प्रिय है, इसलिए उन्हें प्रसन्न करने के लिए गरबे का नवरात्रि में प्रतिवर्ष आयोजन किया जाता है।



गरबा नृत्‍य के दौरान आपने देखा होगा कि महिलाएं 3 तालियों का प्रयोग करती हैं। ये 3 तालियां इस पूरे ब्रह्मांड के त्रिदेव ब्रह्मा, विष्‍णु और म‍हेश को समर्पित होती हैं। गरबा नृत्‍य में ये तीन तालियां बजाकर इन तीनों देवताओं का आह्वान किया जाता है।इन 3 तालियों की ध्‍वनि से जो तेज प्रकट होता है और तरंगें उत्‍पन्‍न होती हैं, उससे शक्ति स्‍वरूपा मां अंबा जागृत होती हैं।



पहले गरबा का आयोजन केवल गुजरात में हुआ करता था। यह नृत्‍य केवल गुजरातियों की ही शान माना जाता है। आजादी के बाद से गुजरातियों ने प्रांत के बाहर निकलना शुरू किया तो अन्‍य प्रदेशों में भी यह परंपरा पहुंच गई। आज यह अपने देश अलावा, विदेश में भी आयोजित होता है।

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छोटे बच्चों ने रंगीन पोशाक पहनकर कार्यक्रम को मनमोहक बना दिया।

ब्लूमिंग डेल इंटरनेशनल स्कूल (सरस्वती एन्क्लेव, गुरुग्राम) की सह-प्राचार्य ने सभी अभिभावकों का स्कूल पहुँच कर कार्यक्रम में भाग लेने पर धन्यवाद किया।


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