जानिए श्री राम जी ने 14 वर्ष वनवास में क्या खाया डॉ अर्चिता महाजन

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार ने बताया कि श्री राम जी को जब 14 वर्ष का वनवास हुआ तो उन्हें शाही भोज मना था यहां तक की किसी मित्र या सगे संबंधियों  के जहां भी खाना मना था। तब उन्होंने 14 वर्ष तक कंदमूल खाकर ही समय व्यतीत किया आज मैं इस फल के फायदे बताने जा रही हूं यह ही एकमात्र भोजन है, जिसे भगवान श्री रामचन्द्र जी ने पत्‍नी सीता  और भाई लक्षण के साथ 14 साल के वनवास के दौरान खाया था।कंदमूल को कई स्थानों पर रामफल के नाम से भी जाना जाता है. वैसे तो यह एक जंगली फल है, जिसकी खेती नहीं की जाती, क्योंकि यह खेतों और जंगलों में अपने आप उग जाता है. 

लेकिन इस जंगली फल में कई ऐसेफायदे छिपे हैं, जो इंसानों के लिए बेहद फायदेमंद हैं कंद फल कैल्शियम, आयरन और विटामिन सी से भरपूर होता है. इसके साथ ही यह फल इम्युनिटी बूस्टर भी होता है, दरअसल, इसे खाने के बाद जल्दी भूख नहीं लगती थी. कंदमूल फल खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता था और ऊर्जा मिलती है। कंदमूल जंगली फल है, अपने आप उगता है। .खांसी, अस्‍थमा, कंजेशन और ब्रोंकाइटिस जैसी स्वास्थ्य समस्याओं को खत्म करने के लिए कंदमूल वरदान से कम नहीं है.कंद मूल खाने से पाचन बेहतर होती है.


इस फल में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं. गठिया, जोड़ों के दर्द और सूजन जैसी समस्याओं से यह राहत दिलाने का काम करता है.यह वजन घटाने में है होता है मददगार। इसके सेवन से जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।बैड कोलेस्ट्रॉल कम करके दिल महफूज रखता है। मौसमी बीमारियों से बचाता है, इम्यूनिटी बढ़ाता है।इसके सेवन से खून की कमी दूर होती है।यह भूरे रंग का होता है. कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्‍ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्‍सों में यह पाया जाता

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