एमसीजी द्वारा जारी ओ एंड एम ठेके बने विवाद की जड़ कर्मचारी नाखुश : माईकल सैनी (आप)


एमसीजी द्वारा जारी ओ एंड एम ठेके बने विवाद की जड़ कर्मचारी नाखुश : माईकल सैनी (आप)


कम पगार व कर्मचारियों की संख्या घटाना ही गतिरोध की प्रमुख वजह है,


यूनियन नेताओं पर पुराने ठेकेदारों से मिलीभगत करने के आरोप लगा रहे अधिकारी,


ओ एंड एम ठेकों में अधिकारियों से हुई किसी चूक के कारण पेच फंसा क्या ?


कम सैलरी काम का अत्याधिक दबाव होने की आशंका चिंता का विषय,


गुरुग्राम 8 दिसंबर 2023 सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से इतर एमसीजी प्रशासन द्वारा कचरा उठा लिए जाने के दावे की भी हवा निकलती नजर आ रही है , निगम प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद शहर में सफाई व्यवस्था खराब हो चली है !

माईकल सैनी आम आदमी पार्टी जिला मीडिया प्रभारी ने बताया कि प्रशासनिक पहल तो की गई मगर वह ऊंट के मुँह में जीरा समान ही सिद्ध हो रही है, खबरों में निगम अधिकारियों के अनुसार एक हजार टन कचरा प्रतिदिन उठाया जा रहा है  यदि इस दावे को मान भी लिया जाए तो 1200 टन कचरा रोजाना अकेले गुरुग्राम शहर से निकलता है अर्थात 200 टन कचरा तो इसमें से बच गया और दो महीने से पड़ा लगभग 60 से 72 हजार टन कचरे का क्या हुआ ? सवाल यह है ! 

सैनी ने बताया कि सफाई हो नहीं पा रही हैं  वजह कर्मचारी यूनियन और अधिकारियों के बीच मजबूत मध्यस्थता का नहीं हो पाना जिस कारण दिन ब दिन स्तिथियाँ गंभीर और विस्फोटक हो चली हैं  शहर में कुछ भी अनिष्ट होने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है  हालात यह हैं  जिसकी प्रमुख वजह ओ एंड एम के ठेके हैं  जिनका करार करते समय बड़ी चूक अधिकारियों द्वारा होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता, जैसे कर्मचारियों की संख्या, सैलरी का तय नहीं होना है  कर्मचारियों को लगता है कि इससे कार्यभार अधिक हो जाएगा और पक्के न होने व पीएफ, ईएसआई की चिंता अलग से, अन्य सुविधाओं की तो बात ही क्या ! 

चर्चाओं में अधिकारियों की मानें तो विवाद खत्म करने के लिए कुछ शर्तें शासन-प्रशासन भी तय करा सकता है मगर यूनियन नेताओं का बातचीत की टेबल आना और नई-नई मांगों को रखने से पेच फंस जाता है, इसके पीछे उन्हें लगता है कि पुराने ठेकेदार अपनी कोई भूमिका निभा रहे हैं  यहाँ माईकल सैनी ने निगम प्रशासन से सवाल करते हुए पूछा कि  ऐसी किसी भी साजिश को नाकाम करने में क्या निगम अधिकारी सक्षम नहीं ? दूसरे ओवरऑल मेंटिनेंस अर्थात ओएंडएम के ठेके देने में ततपरता क्यों दिखाई और क्या कर्मचारी यूनियनों से सलाह-मशविरा करना भी मुनासिब नहीं समझा ?

निगम कमिश्नर बताएं कि ओएंडएम के ठेकों में तय शर्त अनुसार जारी वर्कऑर्डर के तहत क्षेत्र साफ नहीं होने पर जुर्माने का प्रावधान है तो जिन ठेकेदारों के ठेके जारी हैं और उनसे सफाई भी नहीं हो पायी है  तो फिर उनपर कितना जुर्माना( पैनल्टी) लगाया और क्या कोई कार्यवाही की ? सवाल यह है

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