सावित्री बाई फुले के जन्मदिवस को महिला शिक्षिका दिवस घोषित करने की मांग

 सावित्री बाई फुले के जन्मदिवस को महिला शिक्षिका दिवस घोषित करने की मांग

-समाज उत्थान न्यास गुरुग्राम की ओर से किलकारी चैरिटेबल सोसाइटी में मनाई गई सावित्री बाई फुले की जयंती  

गुरुग्राम। समाज उत्थान न्यास गुरुग्राम की ओर से नारी मुक्ति आंदोलन की अगवा और प्रथम महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले की जयंती धूमधाम से मनाई। इस दौरान महिलाओं को समाज में अहम स्थान दिलाने के साथ-साथ शिक्षा की अलख जगाने वाली सावित्री बाई फुले के जन्मदिवस को महिला शिक्षिका दिवस घोषित करने की मांग की गई। इसी मांग को लेकर नायब तहसीलदार सुशील कुमार को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन दिया। समाज उत्थान न्यास के ओर से दिये गए ज्ञापन में कहा गया। 

माता सावित्री बाई फुले जी के जन्मदिवस के उपलक्ष में किलकारी चैरिटेबल सोसाइटी में चेयरमैन अशोक गोरे की अध्यक्षता में सावित्री बाई फुले जयंती, उपस्तिथ अध्यापिकाओं को सम्मानित करके मनाई गयी। समाज उत्थान न्यास गुरुग्राम संस्था के संरक्षक सूबे सिंह , बुद्धराम सैनी, चेयरमैन नरेश सैनी, महेंद्र सिंह (लीलू प्रधान), तेजिंदर सैनी प्रधान सैनी सभा जैकमपुरा, संस्था के कानूनी सलाहकार एडवोकेट मुकेश, नानक चंद, जगदीश, गौतम भाई, महेंद्र, कुलवंत, हितेश और गगनदीप समेत समाज के अनेक लोगों ने सावित्री बाई फुले को नमन किया। सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि 19वीं सदी तक नारी केवल एक भोग की वस्तु थी। नारी महागुलाम बनकर सामाजिक व्यवस्था की चक्की में पिसती रही। अज्ञानता के अंधकार, कर्मकांड, वर्णवाद, जातिवाद, बाल विवाह, विधवा विवाह न होना, मुंडन एवं सती प्रथा आदि कुप्रथाओं में नारी जाति जकड़ी हुई थी। उस समय नारी को विद्या ग्रहण कराने का अधिकार नहीं था। प्रचलित धारणा के अनुसार अगर नारी को शिक्षा मिल जाएगी तो वह कुमार्ग पर चलेगी। जिससे घर का सुख-चैन सब नष्ट हो जाएगा। उसी समय महात्मा ज्योतिराव फुले ने समाज में फैली रूढि़वादी और गैर मानवतावादी परंपराओं से लड़ते हुए कन्या विद्यालय खोले और नारी शक्ति को शिक्षित करने के लिए पहले प्रयास में अपनी धर्मपत्नी सावित्री बाई फुले को पढ़ाया। उसके बाद सावित्री बाई की मदद से स्त्री शिक्षा का सूत्रपात हुआ। वहीं सावित्री बाई फुले ने पहली भारतीय महिला अध्यापिका बनने का गौरव हासिल किया। 

किलकारी चैरिटेबल सोसाइटी में चेयरमैन अशोक गोरे

ने कहा कि भारतीय नारी की शिक्षा एवं चेतना को एक दिशा देने एवं जागरुकता पैदा करने में पहला और बुनियादी काम महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले जी का ही था। अगर आज संपूर्ण भारतवर्ष में महिला सशक्तिकरण, नारी शिक्षा एवं नारी सम्मान की बात हो रही है तो उसका सारा श्रेय सावित्री बाई फुले व उनकी कड़ी मेहनत को जाता है। संस्था के संरक्षक बुधराम ने बताया कि उनका स्त्री हक, नारी शिक्षा एवं मानवतावाद के लिए विषय एवं विपरीत परिस्थितियों में दिया गया योगदान आने वाली पीढिय़ां सदा याद रखेंगी। हर महिला उनके इस योगदान को अपने जहन में संभाले। साथ ही सरकार सावित्री बाई फुले के जन्मदिवस तीन जनवरी को महिला शिक्षिका दिवस घोषित करे। यह महिलाओं को आगे बढऩे में प्रेरणादायी होगा।

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