लोहड़ी का त्योहार किसानों की खुशहाली का प्रतिबिंब है : प्राचार्य घनश्याम दास

 लोहड़ी का त्योहार किसानों की खुशहाली का प्रतिबिंब है : प्राचार्य घनश्याम दास

द्रोणाचार्य गवर्नमेंट कॉलेज गुरुग्राम में आज लोहड़ी का त्योहार एक अनूठे अंदाज में मनाया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज प्राचार्य घनश्याम दास ने की।उन्होंने अपनी बेटी संजीवनी के साथ सुरीली आवाज में गाना पेश कर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने प्राचार्य घनश्याम दास की धर्मपत्नी विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंची।महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक गण और सभी कर्मचारी कार्यक्रम में झूमते नजर आए।विधिवत पूजा अर्चना के बाद संजीवनी कंसल ने सभी चतुर्थ कर्मचारियों को गर्म वस्त्र दान में दिए और इसे अपने जन्म दिवस से जोड़कर और अधिक रोचक बना दिया।

बताते चलें कि लोहड़ी शब्द तिलोहड़ी शब्द से निकला है।इसका अर्थ होता है तिल और रोरही। रोरही का अर्थ है गुड़।इसे तिलोड़ी भी कहते हैं।रबी की फसल तैयार हो जाने और नई फसल की बुआई का यह समय बहुत ही मनोहारी होता है।सर्दी धीरे धीरे समाप्ति की ओर होती है और दिन बड़े होने की शुरुआत होती है।

प्राचार्य घनश्याम दास ने बताया कि कॉलेज के सभी सदस्यों की खुशहाली और उनमें सौहार्द पूर्ण वातावरण बनाने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम सुंदर माहौल में और जान डाल देते हैं।उन्होंने आगे कहा तिल और रेवड़ी अपने हाथों से बांट कर पारिवारिक सामंजस्य और स्नेह भाव का आनंद मेरे लिए अत्यंत सुखदाई है।कार्यक्रम को और अधिक रोचक बनाने के लिए मनोविज्ञान विभाग एवं महिला प्रकोष्ठ ने भी एक दिवसीय संगीत कार्यशाला का आयोजन किया जिसमें एक जानी मानी संगीत  कलाकार संजीवनी कंसल ने शिरकत की।उन्होंने पहले छात्रों के गायन और संगीत कौशल को निखारने के लिए कॉलेज में पांच दिवसीय कार्यशाला का भी आयोजन किया था।



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