जैन समाज में बच्चों, बड़ों, महिलाओं को दिया सीपीआर प्रक्रिया का ज्ञान

 जैन समाज में बच्चों, बड़ों, महिलाओं को दिया सीपीआर प्रक्रिया का ज्ञान

-दोबारा से जीवन दे सकती है सीपीआर तकनीक: डा. एनके जैन

-चक्रवर्ती सेना ने रेड क्रॉस के सहयोग से की फस्र्ट एड एवं सीपीआर की जानकारी

गुरुग्राम। कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) एक आपातकालीन प्रक्रिया है, जिसमें छाती को अक्सर कृत्रिम वेंटिलेशन देकर, मुंह से मुंह तक मैन्युअल रूप से मस्तिष्क को संरक्षित किया जाता है। सीपीआर प्रक्रिया व्यक्ति को उस समय दी जा सकती है, जब उसका ब्रेन और सांसें थम गई हों। ऐसी अवस्था में व्यक्ति को सीपीआर के माध्यम से जीवनदान मिल सकता है। यह अहम जानकारी दी गई यहां जैन बारादरी जैकमपुरा में जैन परिवारों के सदस्यों को। जैन समाज ने रेड क्रास सचिव विकास कुमार का आभार जताया, जिन्होंने कम समय में यह कार्यशाला आयोजित कराई। 

जैन बारादरी जैकमपुरा में चक्रवर्ती सेना द्वारा जिला रेड क्रास सोसायटी गुरुग्राम के सहयोग से यह फस्र्ट एड एवं सीपीआर जागरुकता वर्कशाप आयोजित की गई। शुरुआत करते हुए स्वास्थ्य सेवाएं हरियाणा के पूर्व निदेशक डा. एनके जैन ने कहा कि हमारा लाइफ स्टाइल बदल गया है। खान-पान बदल गया है। ऐसे में हार्ट अटैक के केस बढ़ रहे हैं। कार्डिक अरेस्ट तुरंत आ रहे हैं। लोग चलते-चलते इसके शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा होने के बाद भी हमारा जीवन बच सकता है। इसके लिए हमें जागरुक होना चाहिए। सीपीआर तकनीक ऐसी आपातकाल प्रक्रिया है, जिससे व्यक्ति का जीवन 67 प्रतिशत तक बचाया जा सकता है। इसके लिए सभी को प्रशिक्षित होना चाहिए। जैन समाज के प्रवक्ता अभय जैन एडवोकेट ने बताया कि जैन समाज धर्म के साथ समाज को ऐसा ज्ञान भी देना चाहता है, जो उनके जीवन में लाभकारी हो। सीपीआर प्रक्रिया का ज्ञान होना तो हर व्यक्ति के लिए जरूरी है। जिस तरह से आज चलते-फिरते, बैठे, खाते, सोते हुए कार्डिक अरेस्ट आ रहे हैं, ऐसी स्थिति में सीपीआर प्रक्रिया जीवन बचाने के काम आ सकती है। 

इस अवसर पर चक्रवर्ती सेना के प्रधान पवन जैन, महामंत्री राजीव जैन, देव जैन, राकेश जैन, राजू जैन, संजय जैन, मनु जैन ने हर किसी को इस प्रक्रिया के बारे में सीखने का आग्रह किया। प्रबंधक कमेटी के महामंत्री श्रेयांश जैन ने बताया कि हमारा इस कार्यक्रम का उद्ेदश्य यही है कि हमें कुछ ऐसा ज्ञान हो, जिससे हम इमरजेंसी में अपने परिजनों, रिश्तेदारों का जीवन बचा सकें। भविष्य में भी ऐसी वर्कशाप आयोजित की जाती रहेंगी। प्रबंधक कमेटी के प्रधान संदीप जैन, उपप्रधान सीए विनय जैन, महामंत्री श्रेयांश जैन, महामंत्री पारस जैन, कोषाध्यक्ष प्रदीप जैन का सहयोग रहा। रेड क्रॉस से कविता सरकार ने भी व्यवस्था संभाली। 

रेड क्रॉस की ओर से पहुंचे सीपीआर विशेषज्ञ रमेश ने आपातकालीन समय में बिना संसाधनों के व्यक्ति की सहायता के लिए कई अहम जानकारियां दी। सीपीआर विशेषज्ञ विक्रम भटनागर ने बारीकी से सीपीआर का ज्ञान भी दिया और प्रेक्टिकल करके भी दिखाया। एक डमी पर उन्होंने सीपीआर की प्रक्रिया करके दिखाई। उन्होंने कहा कि हमें सीपीआर देने के लिए बहुत ही सावधानी भी बरतनी चाहिए। हार्ट और फेफड़े अगर काम नहीं कर रहे हैं तो सीपीआर दी जा सकती है। अगर दोनों सही हैं तो सीपीआर ना दें। 

उन्होंने बताया कि एक दिन से एक साल के बच्चे, एक साल से 12 साल के किशोर और 12 साल से अधिक की उम्र के लिए सीपीआर की प्रक्रिया थोड़ी भिन्न होती है। इसलिए इसकी जानकारी होना जरूरी है। सीपीआर हमेशा व्यक्ति को जमीन पर ही लिटाकर देनी चाहिए। रमेश भटनागर ने बताया कि सीपीआर में बच्चे की छाती को दो उंगलियों से दबाना चाहिए। किशोर की छाती को एक हाथ से और बड़ी उम्र के लोगों की छाती को दोनों हाथों से दबाना चाहिए। साथ ही मुंह से उन्हें कृत्रिम सांस देनी चाहिए। सीपीआर करने वाले व्यक्ति हमेशा घुटनों के बल ही बैठें, तभी वह सही काम कर पाएंगे।

Post a Comment

0 Comments