सौंदर्यकरण के नाम पर रेहड़ी-पटरी पर आजीविका कमाने वालों को उजाडऩा बंद करें: पंकज डावर
-बड़े कब्जाधारियों को छूट और छोटे रेहड़ी-पटरी वालों पर चल रहा है डंडागुडग़ांव। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष (शहरी) पंकज डावर ने रेहड़ी-पटरी वाले गरीब दुकानदारों पर नगर निगम द्वारा की जा रही कार्रवाई को नाजायज बताया है। उन्होंने कहा कि एमजी रोड पर सौंदर्यकरण के नाम पर रेहड़ी-पटरी वालों को उजाडऩा बंद किया जाए। बड़े कब्जाधारियों की तरफ से ठंडी नजर रहती है। उन्हें कब्जे की छूट रहती है मगर छोटे रेहड़ी-पटरी वालों पर जुल्म किया जाता है। उन पर ही डंडा चलता है। यह दोहरी नीति नहीं चलेगी। इसलिए इस प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से रोका जाना चाहिए। साथ ही मांग की गई है कि जॉइंट कमिश्नर-3 द्वारा दिए गये अवैध आदेश एवं पथ विक्रेता (जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 के उल्लंघन के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।
नगर निगम गुरुग्राम के आयुक्त को जनजागरण रेहड़ी पटरी समिति गुरुग्राम के बैनर तले दिए गए मांग पत्र का कांग्रेस के जिला अध्यक्ष (शहरी) पंकज डावर ने समर्थन किया है। निगमायुक्त को दिए गए मांग पत्र में कहा गया है किएमजी रोड पर नगर निगम द्वारा दमनकारी नीति से काम किया जा रहा है। सौंदर्यकरण का जो छलावा दिया जा रहा है, वह वास्तविकता में उन गरीब और ईमानदार पथ विक्रेताओं का निर्मम उजाड़ीकरण है, जो दशकों से शहर की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। पंकज डावर ने कहा कि एमजी रोड पर चल रहे इस अवैध उजाड़ीकरण अभियान को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। जब्त किया गया सामान बिना किसी जुर्माने के सम्मानपूर्वक वेंडर्स को वापस किया जाए। सौंदर्यकरण की योजना में वेंडर्स को डिजाइन का हिस्सा बनाया जाए, न कि उन्हें क्षेत्र से बाहर किया जाए।
स्ट्रीट वेंडिंग एक्ट के तहत सर्वेक्षण और पहचान पत्र वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूर्ण किया जाए।
सीधे तौर पर गैर-कानूनी और असंवैधानिक कार्रवाई की जा रही: रोहतास
जनजागरण रेहड़ी पटरी समिति गुरुग्राम के महासचिव रोहतास ने कहा कि जॉइंट कमिश्नर-3 कार्यालय से जारी आदेशों के बाद जिस प्रकार की बर्बर कार्रवाई की जा रही है, वह सीधे तौर पर गैर-कानूनी और असंवैधानिक है। पथ विक्रेता (जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 की अवमानना: संसद द्वारा पारित आजीविका संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग विनियमन अधिनियम, 2014 की धारा 3 (3) स्पष्ट कहती है कि जब तक सर्वे पूरा नहीं होता और वेंडिंग सर्टिफिकेट जारी नहीं हो जाते, तब तक किसी भी वेंडर को उनके स्थान से बेदखल नहीं किया जा सकता। यहां तो निगम के द्वारा 2014 और 2018 सर्वेक्षण किया जा चुका है। धारा (18) के तहत किसी भी पथ विक्रेता को कोई लिखित नोटिस नहीं दिया गया है।
क्या विभाग ने इस अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है। उन्होंने ज्ञापन में कहा कि विभिन्न निर्णयों में कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वेंडर्स को हटाना अंतिम विकल्प होना चाहिए, पहला नहीं। बिना किसी ठोस पुनर्वास योजना के उन्हें हटाना सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना है। किसी भी क्षेत्र को नो-वेंडिंग जोन घोषित करने या वेंडर्स को हटाने का अधिकार केवल टाउन वेंडिंग कमेटी को है। प्रशासन का एकतरफा निर्णय लोकतंत्र की मूल भावना के विरुद्ध है। बिना नोटिस दिए दुकानों को उजाडऩा और सामान जब्त करना न केवल डकैती के समान है, बल्कि उन हजारों परिवारों को भुखमरी की कगार पर धकेलना है जिनकी रोजी-रोटी इसी सडक़ से चलती है।
यह मांग पत्र मुख्यमंत्री, उपायुक्त, सचिव आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय भारत सरकार, पुलिस आयुक्त गुरुग्राम, निदेशक एनयूएलएम निर्माण भवन, निदेशक शहरी स्थानीय निकाय हरियाणा को भी भेजा गया है।
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Pankaj dawar
