गुरुग्राम। राज्य सरकार की मंत्रिमंडल बैठक में आम जनता, ग्रामीण विकास, शिक्षा, परिवहन और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए। इन निर्णयों का उद्देश्य विकास कार्यों को गति देना, पारदर्शिता बढ़ाना और लोगों को सीधा लाभ पहुंचाना है।
ग्रीवेंस कमेटी सदस्य चंद्रकला यादव ने हरियाणा सरकार के द्वारा लिए गए इन महत्वपूर्ण फसलों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हए बताया कि बैठक में कृषि क्षेत्रों से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत यह तय किया गया कि 500 मीटर से अधिक दूरी पर स्थित लाइसेंस वाली भूमि यदि बाद में शहरी सीमा में आती है तो उस पर ईडीसी (External Development Charges) लागू नहीं होगा। इससे किसानों और जमीन मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए नई O&M नीति लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस नीति के तहत सरकार-समुदाय भागीदारी (GCP) को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे पानी की सप्लाई व्यवस्था अधिक मजबूत और टिकाऊ बन सके।
पंचायतों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब जितना जल शुल्क पंचायतें एकत्र करेंगी, उतनी ही अतिरिक्त राशि सरकार द्वारा दी जाएगी। इसके अलावा 6,721 गांवों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है, जिनमें 4,583 सिंगल पंचायत और 2,138 अन्य श्रेणियों में शामिल हैं। सिंगल पंचायत नीति 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी, जबकि मल्टीपल पंचायत/महाग्राम नीति 1 अप्रैल 2027 से लागू की जाएगी।
तकनीकी क्षेत्र में भी बदलाव करते हुए ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट (OTA) के पात्रता मानदंडों में संशोधन किया गया है। अब डिप्लोमा बंद होने के कारण डिग्री आधारित योग्यता को मान्यता दी जाएगी।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन सेवा नियमों में संशोधन कर उन्हें केंद्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप बनाया गया है। वहीं, हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (HORC) की लागत को बढ़ाकर ₹11,709 करोड़ मंजूर किया गया है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी।
रिठाला-नरेला-कुंडली मेट्रो (Phase-IV) परियोजना की DPR को भी मंजूरी दे दी गई है। इस परियोजना के तहत 2.726 किलोमीटर का विस्तार किया जाएगा और दो एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाएंगे।
इसके साथ ही दिल्ली-पानीपत-करनाल RRTS कॉरिडोर को भी मंजूरी दी गई है, जिसकी कुल लंबाई 136.30 किलोमीटर होगी। इस परियोजना पर ₹33,051.15 करोड़ खर्च होंगे, जिसमें हरियाणा का हिस्सा ₹7,472.11 करोड़ रहेगा।
शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा फैसला लेते हुए कक्षा-1 में प्रवेश की न्यूनतम आयु 6 वर्ष तय की गई है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप है।
सरकारी कर्मचारियों के लिए भी राहत भरी खबर है। अब कर्मचारियों के ऋण सीधे राज्य सरकार द्वारा दिए जाएंगे और PNB प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है।
सरकार के इन फैसलों को विकास, सुशासन और जनहित की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इन नीतियों का असर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में साफ तौर पर देखने को मिलेगा।
