श्री राम सेवा समिति भिवाड़ी: जहां अपनों ने छोड़ा साथ, वहां संस्था बनी आखिरी सहारा

श्री राम सेवा समिति भिवाड़ी: जहां अपनों ने छोड़ा साथ, वहां संस्था बनी आखिरी सहारा

भिवाड़ी। कहते हैं कि इंसान की असली पहचान उसके अंतिम समय में होती है—लेकिन जब उसी वक्त अपने ही साथ छोड़ दें, तब दर्द और भी गहरा हो जाता है। ऐसे ही दर्दनाक हालातों में श्री राम सेवा समिति ने इंसानियत की वो लौ जलाई, जो आज के समय में कम ही देखने को मिलती है। लगातार दो दिनों में दो लावारिस शवों को सम्मानजनक अंतिम विदाई देकर समिति ने साबित कर दिया कि रिश्ते सिर्फ खून से नहीं, संवेदनाओं से भी बनते हैं।


प्रधान विनीत सिसोदिया ने बताया कि पहला दृश्य फूलबाग थाना क्षेत्र का था, जहां करीब 40 वर्षीय एक अज्ञात व्यक्ति का शव एसपी ऑफिस के पास पड़ा मिला। न कोई पहचान, न कोई अपना… सिर्फ खामोशी और इंतजार। पुलिस ने हर संभव कोशिश की, लेकिन जब कोई सामने नहीं आया, तब श्री राम सेवा समिति आगे बढ़ी। समिति के सदस्य पहुंचे, उस अनजान को अपना माना और पूरे विधि-विधान के साथ उसकी अंतिम यात्रा को सम्मान दिया—जैसे वह कोई अपना ही हो।


दूसरा मामला 30 अप्रैल का है, जब बाबा मोहन राम के पास मिले लगभग 62 वर्षीय व्यक्ति के शव की पहचान रामपाल निवासी पीलीभीत के रूप में हुई। पहचान तो मिली, लेकिन अपनों का साथ नहीं। इस दर्द भरे पल में भी श्री राम सेवा समिति ने ही कंधा दिया, अंतिम संस्कार किया और यह एहसास दिलाया कि दुनिया में इंसानियत अभी भी जिंदा है।


दो दिनों में दो ऐसे लोग, जिनका इस दुनिया में कोई नहीं था… लेकिन उनकी अंतिम यात्रा में कमी नहीं रहने दी गई। हर विधि, हर संस्कार, हर सम्मान—सब कुछ वैसे ही जैसे किसी अपने के लिए किया जाता है। यह सिर्फ अंतिम संस्कार नहीं था, यह इंसानियत की सबसे सच्ची तस्वीर थी।


समिति के सचिव विनय पाण्डेय ने भावुक होकर कहा कि “हमारा प्रयास सिर्फ शव का दाह संस्कार करना नहीं, बल्कि उस इंसान को वह सम्मान देना है, जिसका वह हकदार है। चाहे कोई अपना हो या अनजान, अंतिम विदाई सबको सम्मान के साथ मिलनी चाहिए।”


श्री राम सेवा समिति पिछले लंबे समय से इसी भावना के साथ कार्य कर रही है और अब तक 91 से अधिक लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर उनकी अस्थियों को गढ़ गंगा तक पहुंचा चुकी है। हर सेवा कार्य के साथ समिति यह संदेश देती है कि इंसानियत कभी मर नहीं सकती।


इस सेवा कार्य में प्रधान विनीत सिसौदिया, सचिव विनय पाण्डेय, महावीर सिंह मेहरा, विजय गुप्ता, डॉ. गौरव भरद्वाज, चंद्रभान, राजवीर स्वामी, राजबीर, शुभकरण, राहुल खंडेलवाल, बलदेव सहित अन्य सदस्य एवं पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।

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