"103वीं अंतिम विदाई: जब अपनों ने साथ छोड़ा, तब श्री राम सेवा समिति ने निभाया इंसानियत का फर्ज"

 "103वीं अंतिम विदाई: जब अपनों ने साथ छोड़ा, तब श्री राम सेवा समिति ने निभाया इंसानियत का फर्ज"



भिवाड़ी। किसी भी व्यक्ति की अंतिम यात्रा में अपने कंधों का साथ सबसे बड़ा सहारा होता है, लेकिन जब कोई अपना ही न हो, तब इंसानियत आगे बढ़कर अपना धर्म निभाती है। इसी मानवीय संवेदना को जीवंत करते हुए श्री राम सेवा समिति, भिवाड़ी ने 103वें लावारिस शव का पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों और पूर्ण सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कराया।


समिति का यह सेवा अभियान आज मानवता की एक ऐसी मिसाल बन चुका है, जिसने अनगिनत अनजान और असहाय लोगों को सम्मानजनक अंतिम विदाई देकर समाज के सामने सेवा का नया आदर्श प्रस्तुत किया है। 103 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार केवल एक आँकड़ा नहीं, बल्कि 103 ऐसे अनमोल सेवा कार्य हैं, जिन्होंने यह साबित किया है कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है।


समिति के अध्यक्ष विनीत सिसोदिया ने कहा कि किसी भी असहाय व्यक्ति को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देना ईश्वर की सच्ची सेवा है। श्री राम सेवा समिति भविष्य में भी इसी समर्पण और सेवा भाव के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक अपनी जिम्मेदारी निभाती रहेगी।


इस सेवा कार्य में सचिव विनय पाण्डेय, चेयरमैन चंद्रभान, राजवीर, शुभकरण, लोकेंद्र, दीपक तथा पुलिस विभाग के सब-इंस्पेक्टर उपस्थित रहे। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न कराया।


श्री राम सेवा समिति ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि सेवा का वास्तविक अर्थ केवल जीवितों की सहायता करना ही नहीं, बल्कि उन लोगों को भी सम्मान देना है, जिनकी अंतिम यात्रा में कोई अपना साथ देने वाला नहीं होता। समिति का यह सेवा अभियान पूरे क्षेत्र में मानवता, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व की प्रेरणादायक मिसाल बन चुका है।

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