बसों में आग की घटनाएं: आखिर जवाबदेही किसकी?

बसों में आग की घटनाएं: आखिर जवाबदेही किसकी?


यात्रियों की जान से खिलवाड़ कब तक?



लेखक: योगेश शर्मा

अखिल भारतीय अध्यक्ष, भारतीय प्राईवेट ट्रांसपोर्ट मजदूर महासंघ


देश में आए दिन चलती बसों में आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं। इन घटनाओं में यात्रियों की जान चली जाती है, परिवार उजड़ जाते हैं और कई लोग जीवनभर के लिए घायल हो जाते हैं।


हर हादसे के बाद कुछ समय तक चर्चा होती है, जांच के आदेश दिए जाते हैं और फिर मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाता है।


लेकिन सवाल यह है—


जब बस सड़क पर सैकड़ों यात्रियों को लेकर चल रही है, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?


क्या केवल बस चालक को जिम्मेदार ठहराकर हम अपनी जिम्मेदारी पूरी कर सकते हैं?


निश्चित रूप से नहीं।


बस की सुरक्षा एक पूरी व्यवस्था की सामूहिक जिम्मेदारी है—बस मालिक/ऑपरेटर, बस बॉडी निर्माता, फिटनेस प्रमाणित करने वाली व्यवस्था, परिवहन विभाग, संबंधित प्रवर्तन एजेंसियां और जहां लागू हो वहां अन्य नियामक संस्थाएं।


केंद्र सरकार ने बसों में fire detection, alarm और suppression systems से जुड़े मानक निर्धारित किए हैं। निर्धारित श्रेणी की बसों के लिए AIS-135 और AIS-153 जैसे सुरक्षा प्रावधान लागू हैं। स्लीपर कोच के लिए AIS-119 में भी संशोधन किए गए हैं।


फरवरी 2026 में केंद्र सरकार ने राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी कि पंजीकरण और fitness inspection के दौरान संबंधित सुरक्षा मानकों का पालन हो। एक हालिया मामले में सरकार ने यह भी बताया कि बस की लंबाई, emergency door, passage, roof hatches और fire detection/suppression system जैसी कमियों को certification के समय पकड़ा जाना चाहिए था।


तो फिर सवाल और गंभीर हो जाता है—


यदि नियम मौजूद हैं,

यदि सुरक्षा मानक मौजूद हैं,

यदि फिटनेस जांच की व्यवस्था मौजूद है,

तो फिर सड़क पर ऐसी बसें कैसे पहुंच जाती हैं जिनमें यात्रियों के सुरक्षित बाहर निकलने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होती?


🔴 जिम्मेदारी तय होनी चाहिए


हमारा स्पष्ट मत है कि किसी भी बस अग्निकांड के बाद केवल चालक को दोषी ठहराना उचित नहीं है।


हर बड़े बस अग्निकांड की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच होनी चाहिए और यह सार्वजनिक किया जाना चाहिए कि—


➡️ बस की fitness कब हुई थी?

➡️ आखिरी inspection में क्या-क्या जांचा गया था?

➡️ Fire extinguisher/fire detection/suppression system की स्थिति क्या थी?

➡️ Emergency exit और evacuation passage मानकों के अनुरूप थे या नहीं?

➡️ बस में कोई unauthorized modification तो नहीं किया गया था?

➡️ बस बॉडी किस निर्माता ने बनाई थी?

➡️ वाहन का certification किस आधार पर हुआ?

➡️ ऑपरेटर ने सुरक्षा मानकों का पालन किया या नहीं?

➡️ संबंधित अधिकारियों ने अपनी वैधानिक जिम्मेदारी निभाई या नहीं?


इन सभी सवालों के जवाब जनता के सामने आने चाहिए।


🚌 हमारी मांगें


1. प्रत्येक यात्री बस की नियमित और वास्तविक safety audit हो।


2. Fitness certificate केवल कागजी प्रक्रिया न होकर वास्तविक तकनीकी जांच के बाद जारी किया जाए।


3. Emergency exit, emergency door, passage और roof hatch की अनिवार्य जांच हो।


4. निर्धारित श्रेणी की बसों में fire detection, alarm और suppression व्यवस्था की जांच fitness inspection का अनिवार्य हिस्सा बने।


5. पुरानी बसों के लिए भी जोखिम-आधारित safety audit और जहां आवश्यक हो retrofit की व्यवस्था पर विचार किया जाए।


6. बसों में यात्रियों और चालक/परिचालक के लिए नियमित fire-safety एवं emergency evacuation training कराई जाए।


7. बस में emergency exits को सामान, सीटों या अन्य modifications से बाधित करने पर कड़ी कार्रवाई हो।


8. प्रत्येक गंभीर बस अग्निकांड की जांच रिपोर्ट निर्धारित समय में सार्वजनिक की जाए।


9. दोष केवल चालक पर डालने के बजाय पूरी जिम्मेदारी की chain की जांच हो।


10. जिन अधिकारियों या ऑपरेटरों की लापरवाही जांच में सामने आए, उनके विरुद्ध कानून के अनुसार जवाबदेही तय हो।


👷 चालक भी सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है


हम यह भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमारा उद्देश्य बस चालकों को दोषी ठहराना नहीं है।


चालक भी श्रमिक है। वह स्वयं भी उसी बस में बैठकर अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रियों को सेवा देता है।


उसे पर्याप्त प्रशिक्षण, fire extinguisher चलाने की जानकारी, emergency evacuation procedure और सुरक्षित कार्य-परिस्थितियां उपलब्ध कराना भी परिवहन व्यवस्था की जिम्मेदारी है।


चालक को बलि का बकरा नहीं, सुरक्षा व्यवस्था का प्रशिक्षित हिस्सा बनाया जाना चाहिए।


🇮🇳 यात्रियों की जान सबसे पहले


सड़क परिवहन केवल एक व्यवसाय नहीं है। यह लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी सार्वजनिक सेवा है।


एक बस में बैठा प्रत्येक यात्री यह भरोसा करके यात्रा करता है कि वह सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंचेगा।


उस भरोसे की रक्षा करना केवल बस चालक की नहीं, बल्कि पूरे परिवहन तंत्र की जिम्मेदारी है।


हम सरकार और संबंधित विभागों से आग्रह करते हैं कि बस अग्निकांड को केवल हादसा मानकर भूलने के बजाय इसकी रोकथाम, निरीक्षण, प्रशिक्षण और जवाबदेही की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।


**क्योंकि सवाल केवल एक बस का नहीं है—


सवाल हर उस यात्री की जिंदगी का है जो रोज बस में सफर करता है।**


भारतीय प्राईवेट ट्रांसपोर्ट मजदूर महासंघ यात्रियों की सुरक्षा, चालकों के सम्मान और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए अपनी आवाज उठाता रहेगा।


योगेश शर्मा

अखिल भारतीय अध्यक्ष

भारतीय प्राईवेट ट्रांसपोर्ट मजदूर महासंघ

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