मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में गुरुग्राम में नर्सिंग ऑफिसर्स ने लगाए काले बिल्ले
-बुधवार, गुरुवार दो दिन काले बिल्ले लगाकर करेंगे काम
-अगले सोमवार, मंगलवार, बुधवार को दो दो घंटे रखेंगे हड़ताल
गुरुग्राम। हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग में मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने के विरोध में प्रदेश भर के नर्सिंग कैडर ने बुधवार से शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू कर दिया। गुरुग्राम सहित प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में आंदोलन के तहत नर्सिंग ऑफिसर्स ने काले बिल्ले लगाकर ड्यूटी शुरू की है। साथ ही कहा है कि तीन दिन तक दो घंटे की हड़ताल की जाएगी, इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगीं।
गुरुग्राम में सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल सहित जिला के सभी पीएचसी, सीएचसी में सभी नर्सिंग ऑफिसर्स ने नर्सिंग ऑफिसर वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा के बैनर तले यह विरोध शुरू किया। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने यह पॉलिसी वापस नहीं ली तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। एसोसिएशन द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार आंदोलन के पहले चरण में 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को प्रदेश के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी में नर्सिंग स्टाफ काले बिल्ले लगाकर काम करेगा। इसके बाद दूसरे चरण में 5, 6 और 7 अक्टूबर को तीनों दिन सुबह 10 बजे से 12 बजे तक दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल की जाएगी।
महिलाओं की सुरक्षा और परिवार की जिम्मेदारियों का हवाला
एसोसिएशन का कहना है कि पूरे भारत में किसी भी राज्य में नर्सिंग कैडर पर ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू नहीं है। शिक्षा विभाग और अन्य विभागों में महिलाएं केवल दिन में ड्यूटी करती हैं, जबकि नर्सिंग स्टाफ 24 घंटे, तीन शिफ्ट- मॉर्निंग, इवनिंग और नाइट में ड्यूटी करता है। नर्सिंग ही एकमात्र ऐसा कैडर है जो अस्पताल में 24 घंटे मौजूद रहकर मरीजों की सेवा करते है। नर्सिंग ऑफिसर्स की ओर से कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग के नर्सिंग कैडर में लगभग 95 प्रतिशत महिलाएं हैं। उन पर घर के बुजुर्गों, बच्चों की परवरिश, शिक्षा और घर-परिवार की पूरी जिम्मेदारी है। अगर उन्हें परिवार से सैकड़ों किलोमीटर दूर ट्रांसफर किया जाएगा तो वे मानसिक तनाव में रहेंगी। जिसका सीधा असर उनकी ड्यूटी और मरीजों की देखभाल पर पड़ेगा।
दूर इलाकों में महिला स्टाफ को ड्यूटी करना कठिन
एसोसिएशन ने यह भी तर्क दिया कि हरियाणा के कई स्वास्थ्य संस्थान गांवों और कस्बों से बाहर सुनसान इलाकों में बने हैं। रात की शिफ्ट में वहां पहुंचना महिला स्टाफ के लिए बेहद कठिन और असुरक्षित है। शिफ्टिंग ड्यूटी में भी नर्सिंग ऑफिसर्स का घर जाने का समय तय नहीं है। सरकार को महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखना चाहिए, लेकिन यह पॉलिसी उनकी सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। नर्सिंग ऑफिसर्स ने कहा कि सरकार की सभी स्वास्थ्य योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में नर्सिंग स्टाफ की सबसे अहम भूमिका होती है। कोरोना काल में भी नर्सिंग स्टाफ ने अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा की थी। ऐसे में सरकार को ऐसी कोई पॉलिसी नहीं लानी चाहिए जो उनके हितों के खिलाफ हो। उन्होंने मांग की है कि मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को बिना किसी शर्त के तुरंत वापस लिया जाए। अगर सरकार ने मांग नहीं मानी तो प्रदेश भर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

