गुरुग्राम। श्री गुरु द्रोणाचार्य रामलीला क्लब (रजि.) की ओर से रामलीला के प्रथम दिन नारद मोह की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों को भक्ति, अहंकार और भगवान की माया का संदेश दिया।
लीला का शुभारंभ महर्षि नारद की तपस्या के प्रसंग से हुआ। तपस्या के प्रभाव से भगवान इंद्र का सिंहासन डोलने लगा। इस पर नारद मुनि को अपनी तपस्या पर अहंकार हो गया और उन्हें लगा कि उनके तप के कारण ही ऐसा हुआ है।
इसके बाद भगवान विष्णु ने अपनी माया से श्रीनिवासपुरी नगरी का निर्माण किया। वहां के राजा शीलनिधि ने अपनी पुत्री के विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन किया। स्वयंवर में राजकुमारी ने भगवान विष्णु को अपने वर के रूप में चुना। इस घटनाक्रम के बाद नारद मुनि का मोह भंग हुआ और उन्हें अहंकार के परिणाम का बोध हुआ।
नारद मोह की लीला के माध्यम से कलाकारों ने दर्शाया कि मनुष्य को अपनी उपलब्धियों पर अहंकार नहीं करना चाहिए। भगवान की कृपा और माया के आगे किसी का भी अभिमान टिक नहीं सकता। लीला के मंचन ने दर्शकों को धर्म, भक्ति और विनम्रता का संदेश दिया।

