राजा दशरथ को मिला पुत्र वियोग का श्राप, श्रवण कुमार के माता-पिता की पीड़ा का हुआ मार्मिक मंचन
गुरुग्राम। श्री गुरु द्रोणाचार्य रामलीला क्लब, गुरुग्राम गांव की रामलीला में भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़े प्रसंगों और श्रवण कुमार की मार्मिक कथा का मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने शानदार अभिनय और प्रभावशाली संवादों के माध्यम से दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
रामलीला के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण सुमंत के साथ निषादराज से मिलते हैं। इसके बाद गंगा नदी पार करने के लिए भगवान श्रीराम केवट से आग्रह करते हैं। रामभक्त केवट और प्रभु श्रीराम के बीच हुए संवाद की सुंदर प्रस्तुति ने श्रद्धा और भक्ति का भाव जागृत किया। इस प्रसंग के माध्यम से भगवान के प्रति भक्त के अटूट विश्वास और समर्पण को दर्शाया गया।
इसके पश्चात श्रवण कुमार की लीला का मंचन हुआ। श्रवण कुमार अपने दृष्टिहीन माता-पिता को तीर्थयात्रा पर लेकर जा रहे थे। यात्रा के दौरान जब उनके माता-पिता को प्यास लगी, तो वे उन्हें पानी पिलाने के लिए नदी पर पहुंचे। इसी दौरान वहां शिकार की प्रतीक्षा कर रहे राजा दशरथ ने पानी भरने की आवाज को किसी पशु की आहट समझकर शब्दभेदी बाण चला दिया। बाण श्रवण कुमार को लगा और उनकी मृत्यु हो गई।
जब राजा दशरथ को अपनी भूल का पता चला, तो वे अत्यंत दुखी हुए। श्रवण कुमार के माता-पिता ने अपने पुत्र की मृत्यु से व्यथित होकर राजा दशरथ को श्राप दिया कि जिस प्रकार उन्हें पुत्र वियोग का दुख सहना पड़ रहा है, उसी प्रकार राजा दशरथ को भी एक दिन पुत्र वियोग में अपने प्राण त्यागने पड़ेंगे।
इस प्रसंग के बाद राजा दशरथ द्वारा माता कौशल्या को श्रवण कुमार की घटना सुनाने और अंततः पुत्र वियोग में प्राण त्यागने का मार्मिक मंचन किया गया। इस लीला ने दर्शकों को माता-पिता की सेवा, कर्तव्यनिष्ठा और कर्मों के परिणाम का संदेश दिया।
कल होगा भरत मिलाप और खर-दूषण वध का मंचन
श्री गुरु द्रोणाचार्य रामलीला क्लब की ओर से अगले दिन की रामलीला में भरत मिलाप, शूर्पणखा की नाक काटे जाने तथा खर-दूषण वध के प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। इन प्रसंगों में भाई-भाई के प्रेम, त्याग, मर्यादा और अधर्म के विरुद्ध संघर्ष को दर्शाया जाएगा। रामलीला को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है।
