गणेशोत्सव में पर्यावरण और राष्ट्र-निर्माण का संदेश: वेम्बली एस्टेट में दुर्गमवार परिवार की 'शिवाजी महाराज' थीम बनी आकर्षण का केंद्र
बच्चों के साथ मिलकर घर पर ही पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से तैयार की सजावट, रोज़ाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु ले रहे बप्पा का आशीर्वाद
गुरुग्राम। शहर की वेम्बली एस्टेट सोसाइटी में इन दिनों गणेशोत्सव की रौनक देखते ही बन रही है। सोसाइटी निवासी श्वेता और वेंकट दुर्गमवार के घर विराजमान गणपति बप्पा के दर्शन के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। दुर्गमवार परिवार हर वर्ष 11 दिनों के लिए अपने घर में गणेश प्रतिमा की स्थापना करता है और हर बार अपनी सजावट के माध्यम से समाज को कोई न कोई सार्थक संदेश देता है।
योद्धा से आगे — दूरदर्शी शासक के रूप में शिवाजी महाराज
इस वर्ष परिवार ने छत्रपति शिवाजी महाराज की थीम पर सजावट तैयार की है। इस थीम का उद्देश्य शिवाजी महाराज को केवल एक वीर योद्धा के रूप में देखने से आगे बढ़कर उनके सिद्धांतों को सामने लाना है, जिनके बल पर वे एक दूरदर्शी शासक, प्रगतिशील विचारक और राष्ट्र-निर्माता के रूप में जाने जाते हैं। उल्लेखनीय है कि शिवाजी महाराज को स्वराज्य की अवधारणा, सुव्यवस्थित प्रशासन, प्रजा और किसानों के हितों की रक्षा, महिलाओं के सम्मान तथा सभी धर्मों के प्रति आदर जैसे मूल्यों के लिए आज भी याद किया जाता है। सजावट के ज़रिए परिवार ने इन्हीं आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास किया है।
हर वर्ष पर्यावरण और स्थिरता पर केंद्रित संदेश
दुर्गमवार परिवार की गणेश सजावट सोसाइटी में हर साल चर्चा का विषय रहती है। परिवार अपनी झाँकियों के माध्यम से विशेष रूप से सस्टेनेबिलिटी (सतत विकास), पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी बचाने जैसे विषयों पर जागरूकता फैलाता रहा है। पूरी सजावट घर पर ही पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से तैयार की जाती है, ताकि उत्सव की भव्यता के साथ प्रकृति का भी ध्यान रखा जा सके।
बच्चों के लिए सीखने का अनुभव
इस सजावट की एक खास बात यह भी है कि इसे तैयार करने में परिवार के बच्चे अन्वेष और अवनिशा पूरी सक्रियता से भाग लेते हैं। सामग्री जुटाने से लेकर झाँकी को आकार देने तक, बच्चे हर चरण में शामिल रहते हैं। इससे उन्हें न केवल रचनात्मकता और टीमवर्क सीखने का अवसर मिलता है, बल्कि वे इतिहास, संस्कृति और पर्यावरण से जुड़े विषयों को भी व्यावहारिक रूप से समझ पाते हैं।
श्वेता और वेंकट दुर्गमवार का कहना है, "हमारा प्रयास रहता है कि त्योहार केवल पूजा-अर्चना तक सीमित न रहे, बल्कि उसके माध्यम से समाज तक कोई सकारात्मक संदेश भी पहुँचे। बच्चों को इसमें शामिल करने से वे अपनी परंपराओं से भी जुड़ते हैं और ज़िम्मेदार नागरिक बनने की सीख भी पाते हैं।"
श्रद्धालुओं में उत्साह
सोसाइटी के निवासी और आसपास के श्रद्धालु प्रतिदिन बप्पा के दर्शन करने और सजावट देखने पहुँच रहे हैं। आगंतुकों का कहना है कि इस तरह की पहल आस्था के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय चेतना को भी मज़बूत करती है। 11 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव सोसाइटी में भक्ति, संस्कृति और जागरूकता का सुंदर संगम बन गया है।
