आर्वी हेल्थकेयर द्वारा 'सर्जिगाइनेकॉन 2026' का सफल आयोजन; लाइव सर्जरी के माध्यम से युवा सर्जनों ने सीखीं आधुनिक तकनीकें
गुरुग्राम के सेक्टर 90 स्थित आर्वी हेल्थकेयर (Aarvy Healthcare) ने आज 'सर्जिनकॉन 2026' (SURGYNCON 2026) नामक एक अत्यंत वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह उत्तर भारत में पोस्ट-ग्रेजुएट छात्रों और युवा सर्जनों के लिए अपनी तरह की पहली 'लाइव ऑपरेटिव वर्कशॉप' रही। गौरतलब है कि आर्वी हेल्थकेयर उभरते हुए सर्जनों के लिए डीएनबी (DNB) कोर्स के एक प्रतिष्ठित 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।
आधुनिक तकनीक और एआई (AI) का संगम
आर्वी हेल्थकेयर के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. विक्रम सिंह के साथ देश के प्रख्यात सर्जन डॉ. सतपाल भनोट, प्रोफेसर डॉ. सुंदर गोयल, प्रोफेसर डॉ. आर. के. कड़वासरा और प्रोफेसर डॉ. प्रदीप गर्ग ने कार्यक्रम को संबोधित किया।
डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि आजकल ऐसी नई सर्जिकल तकनीकें विकसित हो रही हैं, जिनसे मरीजों की रिकवरी बहुत तेजी से होती है, शरीर पर निशान कम पड़ते हैं और रक्त की हानि लगभग शून्य होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन तकनीकों और 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) के मेल ने सर्जरी के क्षेत्र को एक नया आयाम दिया है, जिसे सीखना युवा सर्जनों के लिए बेहद अनिवार्य है।
आर्वी हेल्थकेयर की निदेशक और सीईओ डॉ. रेनू यादव ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समावेश ने स्त्री रोग संबंधी देखभाल में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है। इस तकनीकी तालमेल से सर्जन अभूतपूर्व सटीकता के साथ जटिल प्रक्रियाओं को अंजाम दे सकते हैं, जिससे ऑपरेशन के बाद होने वाले दर्द में काफी कमी आती है और महिलाओं के ठीक होने का समय भी कम हो जाता है।
लाइव सर्जरी के जरिए सीधा संवाद
इस सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता 'पुराने अनुभव और नई ऊर्जा' का संगम रहा। अस्पताल के 5 अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटरों से 10 से अधिक जटिल सर्जरी का सीधा प्रसारण (Live Streaming) कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया। यहाँ उपस्थित युवा सर्जनों ने न केवल लाइव सर्जरी को बारीकी से देखा, बल्कि ऑपरेशन कर रहे वरिष्ठ सर्जनों से सीधे सवाल-जवाब भी किए। हॉल में मौजूद वरिष्ठ विशेषज्ञों के एक पैनल ने सर्जरी की छोटी-छोटी बारीकियों पर लाइव चर्चा कर छात्रों का मार्गदर्शन किया।
उत्तर भारत से जुटे 60 से अधिक युवा सर्जन
इस कार्यशाला में उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों से 60 से अधिक युवा सर्जनों ने भाग लिया। साथ ही, विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के 20 से अधिक प्रोफेसरों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। रविवार का दिन होने के कारण बड़ी संख्या में डॉक्टर और छात्र इस ज्ञानवर्धक सत्र का हिस्सा बन सके।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. विक्रम सिंह ने सभी प्रतिभागी डॉक्टरों, प्रोफेसरों और वरिष्ठ सर्जनों का उनके उत्साहपूर्ण योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि भविष्य में भी इस प्रकार के और अधिक सत्र आयोजित किए जाएंगे।
