गुरुग्राम/चंडीगढ़। हरियाणा बैरागी सभा के प्रदेश अध्यक्ष ने हरियाणा सरकार द्वारा पाठ्यक्रम में किए गए बदलावों पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इतिहास के साथ छेड़छाड़ करते हुए “वीर बंदा सिंह बैरागी” के स्थान पर “वीर बंदा सिंह बहादुर” नाम का प्रयोग किया है, जिससे बैरागी समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।
शिव बैरागी ने कहा कि वीर बंदा सिंह बैरागी बैरागी समाज से संबंध रखते थे और बचपन में उनका नाम माधो दास बैरागी था। उन्होंने बताया कि गुरु गोविंद सिंह जी के आह्वान पर उन्होंने हथियार उठाकर मुगलों के खिलाफ युद्ध किया और समाज व धर्म की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। ऐसे में उनके नाम से “बैरागी” शब्द हटाना समाज की पहचान को मिटाने जैसा है।
उन्होंने कहा कि बैरागी समाज ने हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन अब उसी समाज की ऐतिहासिक पहचान को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा कि सरकार तत्काल पाठ्यपुस्तकों में सुधार करे और “वीर बंदा बैरागी” नाम को पुनः शामिल करे।
शिव बैरागी ने कहा, “मुख्यमंत्री नायब सैनी जी, हरियाणा का बैरागी समाज आज बेहद आहत और ठगा हुआ महसूस कर रहा है। जिस समाज ने हर जिले से एकजुट होकर सत्ता के सफर में आपका साथ दिया, आज उसी समाज की अस्मिता और पहचान को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। सत्ता अस्थाई होती है, लेकिन इतिहास और समाज का सम्मान स्थाई रहता है।”
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही पाठ्यपुस्तकों में “बहादुर” शब्द हटाकर “बैरागी” शब्द नहीं जोड़ा गया, तो हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे देश का बैरागी समाज आंदोलन करने को मजबूर होगा। बैरागी समाज के लोगों में इस मुद्दे को लेकर लगातार रोष बढ़ता जा रहा है।
