द्वारका एक्सप्रेसवे का सीएंडडी वेस्ट प्लांट बना दूसरा बंधवाड़ी, मलबे के पहाड़ों से फैल रहा प्रदूषण
अब दूसरे बंधवाड़ी जैसे हो गए हैं। ज्ञात रहे सीएंडडी वेस्ट प्लांट के पास ही भगवान परशुराम की मूर्ति भी लगी हुई है जो कि अब बिल्कुल छोटी दिखाई पड़ रही है इस कूड़े पहाड़ के सामने
मलबे के पहाड़ों से स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा
शिकायत में कहा गया है कि प्लांट परिसर में मलबे के विशाल पहाड़ बन गए हैं, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि मलबे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) नहीं किया जा रहा है। खुले में पड़े इस मलबे से उडऩे वाली धूल के कारण आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा तक बढ़ गया है, जिससे स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
वित्तीय और पर्यावरणीय अनियमितताओं का आरोप
प्रदीप कटारिया ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि लाखों टन मलबा वर्षों से वहां पड़ा है, तो अब तक एजेंसी ने कितना प्रोसेसिंग किया है और निगम द्वारा उस पर कितनी राशि खर्च की गई है? उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी वास्तविक प्रसंस्करण के कंपनी को भुगतान किया जा रहा है, जो कि एक बड़े वित्तीय घोटाले की ओर इशारा करता है। उन्होंने पूछा कि जब सामान्य नागरिकों पर निर्माण सामग्री ढंकने में लापरवाही बरतने पर भारी जुर्माना लगाया जाता है, तो फिर इस एजेंसी को पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की छूट क्यों दी जा रही है?
शिकायतकर्ता ने नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि प्लांट में मौजूद मलबे की वास्तविक मात्रा का पता लगाने के लिए स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी द्वारा ड्रोन और वॉल्यूमेट्रिक सर्वे कराया जाए। नियमों के उल्लंघन और प्रदूषण फैलाने के लिए एजेंसी पर भारी जुर्माना लगाया जाए। एजेंसी की स्वीकृत क्षमता और वास्तविक प्रसंस्करण का वर्षवार वित्तीय व तकनीकी ऑडिट हो। जांच पूरी होने तक एजेंसी को किए जाने वाले सभी प्रकार के भुगतानों और मलबे की ढुलाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। पूरी जांच प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
