सेक्टर-5 वार्ड संख्या-35 दलबदल की राजनीति का शिकार, शिकायत के बावजूद ग्रीन बेल्ट में टॉयलेट निर्माण दोबारा शुरू

 सेक्टर-5 वार्ड संख्या-35 दलबदल की राजनीति का शिकार, शिकायत के बावजूद ग्रीन बेल्ट में टॉयलेट निर्माण दोबारा शुरू



सेक्टर-5 की ग्रीन बेल्ट में स्थानीय निवासियों के तीव्र विरोध और लिखित शिकायतों के बावजूद टॉयलेट निर्माण कार्य दोबारा शुरू किए जाने पर पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिनेश वशिष्ठ ने इसे वार्ड संख्या-35 में दलबदल की राजनीति और जनभावनाओं की खुली अनदेखी बताया है।


दिनेश वशिष्ठ ने कहा कि वार्ड-35 के पार्षद परमिंदर कटारिया ने निर्दलीय चुनाव लड़कर जनता से समर्थन प्राप्त किया, लेकिन चुनाव जीतने के बाद भाजपा में शामिल हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता ने विकास के नाम पर जिस विश्वास के साथ उन्हें हरियाणा में ऐतिहासिक मतों से जिताया था, आज वही जनता अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रही है।


वशिष्ठ ने आरोप लगाया कि जब विकास कार्यों का श्रेय लेने की बात आती है तो पार्षद फोटो खिंचवाने में सबसे आगे रहते हैं, लेकिन जैसे ही किसी कार्य का विरोध होता है या कोई विवाद सामने आता है, उसकी जिम्मेदारी से बचने के लिए स्थानीय विधायक मुकेश शर्मा और सरकार पर आरोप मढ़ दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह जनता को गुमराह करने की राजनीति है।


उन्होंने कहा कि ग्रीन बेल्ट में टॉयलेट निर्माण का स्थानीय निवासियों ने शुरू से विरोध किया है। शिकायत मिलने पर निर्माण कार्य रोक दिया गया था, लेकिन अब बिना शिकायत का समाधान किए और बिना स्थानीय लोगों की सहमति के कार्य दोबारा शुरू कर दिया गया है। यह प्रशासनिक प्रक्रिया और जनता की भावनाओं, दोनों की अनदेखी है।


दिनेश वशिष्ठ ने आरोप लगाया कि वार्ड-35 में विकास कार्यों के नाम पर भारी अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का माहौल बना हुआ है। कौन-सा कार्य किसकी स्वीकृति से हो रहा है और किसके हित में किया जा रहा है, इसकी कोई स्पष्टता नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता के हितों की बजाय राजनीतिक स्वार्थों को प्राथमिकता दी जा रही है।


उन्होंने प्रशासन, नगर निगम और राज्य सरकार से मांग की कि ग्रीन बेल्ट में चल रहे टॉयलेट निर्माण को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए, मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा स्थानीय निवासियों की शिकायतों पर शीघ्र कार्रवाई की जाए। यदि जनभावनाओं की लगातार अनदेखी की गई तो सेक्टरवासी लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की होगी।

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