नन्हीं सृष्टि गुलाटी के नाम विश्व रिकॉर्ड
पाँच वर्षों में 11 हजार से अधिक तिरंगे वितरित कर जगाई राष्ट्रप्रेम की अलख
आसाम बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ सृष्टि गुलाटी का नाम।
नन्हे हाथों में तिरंगा, आँखों में देशभक्ति और दिल में भारत—फरीदाबाद की बाल समाजसेविका सृष्टि गुलाटी बनीं प्रेरणा की मिसाल
फरीदाबाद, हरियाणा।
नन्हे हाथों में तिरंगा, आँखों में देश के प्रति सम्मान और हृदय में भारत माता के लिए अटूट प्रेम—फरीदाबाद की बाल समाजसेविका सृष्टि गुलाटी ने अपनी छोटी-सी उम्र में देशभक्ति और समाजसेवा की ऐसी मिसाल कायम की है, जो हर भारतीय के दिल को छू जाती है।
परिवार द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, सृष्टि ने पिछले पाँच वर्षों में 11,000 से अधिक राष्ट्रीय ध्वज वितरित किए हैं। उनकी इस उपलब्धि का उल्लेख आसाम बुक ऑफ रिकॉर्ड के प्रमाणपत्र में किया गया है, जिस पर विश्व रिकॉर्ड अंकित है। यह उपलब्धि सृष्टि के समर्पण, निरंतर प्रयास और राष्ट्रप्रेम की भावना को दर्शाती है।
सृष्टि के लिए तिरंगा केवल तीन रंगों से बना ध्वज नहीं, बल्कि भारत की आन, बान, शान, एकता, अखंडता और वीर जवानों के बलिदान का प्रतीक है। उनका तिरंगा अभियान बच्चों, युवाओं और आम नागरिकों में राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना जागृत करने का सराहनीय प्रयास है।
उनका संदेश बेहद सरल, लेकिन दिल को छू लेने वाला है—
“तिरंगे का सम्मान केवल राष्ट्रीय पर्वों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि हमारे विचारों, व्यवहार और कर्मों में भी दिखाई देना चाहिए।”
राष्ट्र की महान हस्तियों तक पहुँचाया तिरंगे का संदेश
सृष्टि गुलाटी को देश की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों से मिलने और उन्हें राष्ट्रीय ध्वज भेंट करने का अवसर मिला है। परिवार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इनमें राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति श्री राधा कृष्णन, एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एन. एस. राजा सुब्रमण्यम* तथा दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, हरियाणा मुख्यमंत्री नयाब सैनी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, सृष्टि ने न्यायाधीशों, पुलिस अधिकारियों, आम जनमानस और प्रशासनिक अधिकारियों तक भी तिरंगा पहुँचाकर राष्ट्रसम्मान का संदेश दिया है। देश की रक्षा में समर्पित जवानों और राष्ट्रसेवा में जुटे अधिकारियों के प्रति सम्मान व्यक्त करना उनके अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
एक छोटी बच्ची द्वारा तिरंगे के माध्यम से देश के प्रति प्रेम और सम्मान प्रकट करना न केवल भावुक कर देने वाला है, बल्कि लाखों लोगों के लिए प्रेरणादायक भी है।
तिरंगे के साथ समाजसेवा का संकल्प
सृष्टि की पहचान केवल राष्ट्रीय ध्वज वितरण तक सीमित नहीं है। पढ़ाई के साथ-साथ वह जरूरतमंद बच्चों को कपड़े, स्कूल बैग, पानी की बोतलें और शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने जैसी सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहती हैं।
इसके साथ ही वह पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता अभियानों में भी भाग लेती हैं। सृष्टि का मानना है कि—
खुशियाँ बाँटने से बढ़ती हैं और सेवा करने के लिए उम्र नहीं, संवेदनशील हृदय चाहिए।”
उनके प्रयास बच्चों और युवाओं को यह संदेश देते हैं कि पढ़ाई के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के लिए भी सकारात्मक योगदान दिया जा सकता है।
छोटी उम्र, बड़ा जज़्बा—हर भारतीय के लिए प्रेरणा
आसाम बुक ऑफ रिकॉर्ड के प्रमाणपत्र में दर्ज उपलब्धि सृष्टि के तिरंगा अभियान को एक विशेष पहचान देती है।
सृष्टि गुलाटी की यात्रा यह साबित करती है कि देशप्रेम उम्र, पद या पहचान का मोहताज नहीं होता। जब एक बच्ची अपने छोटे-छोटे प्रयासों से हजारों लोगों तक तिरंगे का सम्मान पहुँचाने का संकल्प लेती है, तो उसकी यह पहल समाज में नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच का संचार करती है।
नन्हीं सृष्टि के हाथों में लहराता तिरंगा और दिल में बसा हिंदुस्तान हर भारतीय के भीतर गर्व और देशभक्ति की भावना जगाता है। उनकी कहानी उन बेटियों की शक्ति और संवेदनशीलता को दर्शाती है, जो छोटी उम्र में बड़े सपने देखती हैं और अपने कर्मों से समाज में बदलाव लाने का प्रयास करती हैं।
