श्री दुर्गा रामलीला में थिएटर जैसा एहसास, AI तकनीक से सजी भव्य लीला; नारद मोह से हुआ शुभारंभ

श्री दुर्गा रामलीला में थिएटर जैसा एहसास, AI तकनीक से सजी भव्य लीला; नारद मोह से हुआ शुभारंभ


बाबा प्रकाशपुरी जी महाराज के शिष्य महंत रवि पुरी जी महाराज एवं महामंडलेश्वर आत्म चेतना गिरी जी महाराज के आशीर्वाद से शुरू हुआ 61वां रामलीला महोत्सव



विधायक मुकेश शर्मा ने रिबन काटकर एवं गणेश वंदना के साथ किया शुभारंभ, पहले दिन नारद मोह से लेकर रावण जन्म और मेघनाद के पराक्रम तक का हुआ मंचन


गुरुग्राम। जैकबपुरा स्थित श्री दुर्गा रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित 61वें रामलीला महोत्सव का मंगलवार को भव्य शुभारंभ हुआ। बाबा प्रकाशपुरी जी महाराज के शिष्य महंत रवि पुरी जी महाराज एवं महामंडलेश्वर आत्म चेतना गिरी जी महाराज के पावन आशीर्वाद से धार्मिक अनुष्ठानों के बीच रामलीला का श्रीगणेश किया गया। गुरुग्राम के विधायक मुकेश शर्मा ने रिबन काटकर तथा गणेश वंदना के साथ लीला का शुभारंभ किया। पहले दिन कलाकारों ने नारद मोह, रावण जन्म, रावण-कुंभकर्ण-विभीषण की तपस्या और मेघनाद द्वारा देवताओं को बंदी बनाने जैसे प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन किया।


AI तकनीक और आधुनिक मंच सज्जा ने दिया थिएटर जैसा अनुभव


इस वर्ष श्री दुर्गा रामलीला में पारंपरिक धार्मिक प्रस्तुतियों के साथ आधुनिक तकनीक का अनूठा समावेश देखने को मिल रहा है। भव्य मंच सज्जा, आकर्षक दृश्य संयोजन और AI तकनीक के इस्तेमाल ने दर्शकों को थिएटर जैसा अनुभव प्रदान किया। खास बात यह है कि मंच पर लीला का मंचन कर रहे कलाकारों के दृश्य AI तकनीक की सहायता से पीछे लगे पर्दे पर भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं, जिससे प्रस्तुति और अधिक जीवंत एवं प्रभावशाली बन रही है। कमेटी का प्रयास है कि धार्मिक परंपराओं को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और रामायण के आदर्शों से परिचित कराया जाए।


नारद मोह की लीला से हुआ मंचन का आगाज


रामलीला के प्रथम दृश्य में देवर्षि नारद की तपस्या का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। हिमालय की पवित्र गुफा में नारायण-नारायण का जाप करते हुए नारद जी तपस्या में लीन हो जाते हैं। उनकी तपस्या से भयभीत देवराज इंद्र कामदेव को उनकी तपस्या भंग करने के लिए भेजते हैं। कामदेव वसंत ऋतु, अप्सराओं के नृत्य और संगीत के माध्यम से नारद जी का ध्यान भंग करने का प्रयास करते हैं, लेकिन वे सफल नहीं होते। नारद जी द्वारा कामदेव को क्षमा करने के बाद उनके मन में अपनी तपस्या और विजय का अहंकार उत्पन्न हो जाता है।


इसके बाद नारद जी भगवान शिव और भगवान विष्णु के समक्ष अपनी तपस्या की सफलता का वर्णन करते हैं। भगवान विष्णु उन्हें अहंकार से मुक्त करने के लिए अपनी माया से एक भव्य नगर और राजा शीलनिधि की पुत्री विश्वमोहिनी के स्वयंवर की रचना करते हैं। विश्वमोहिनी के रूप से मोहित होकर नारद जी भगवान विष्णु से सुंदर रूप प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं। भगवान विष्णु उन्हें उनके परम हित के लिए हरि का एक अन्य अर्थ लेते हुए वानर जैसा मुख प्रदान करते हैं।


स्वयंवर में विश्वमोहिनी भगवान विष्णु के गले में वरमाला डाल देती हैं। अपना रूप देखकर क्रोधित हुए नारद जी शिवगणों को राक्षस बनने का श्राप देते हैं और भगवान विष्णु को भी मनुष्य रूप में जन्म लेकर पत्नी-वियोग सहने का श्राप देते हैं। साथ ही वे कहते हैं कि जिन वानरों जैसा रूप देकर उनका उपहास हुआ, वही वानर भविष्य में भगवान विष्णु की सहायता करेंगे। इस प्रसंग ने दर्शकों को अहंकार, मोह और ईश्वर की लीला का संदेश दिया।


रावण जन्म और शिवजी की तपस्या का प्रभावशाली मंचन


नारद मोह की लीला के बाद रावण के जन्म और उसके भाइयों विभीषण तथा कुंभकर्ण के साथ भगवान शिव की घोर तपस्या का मंचन किया गया। भगवान शिव तपस्या से प्रसन्न होकर तीनों भाइयों को वरदान देते हैं। रावण अमरता प्राप्त करने की इच्छा प्रकट करता है, विभीषण भगवान श्रीहरि की भक्ति का वरदान मांगता है, जबकि कुंभकर्ण को निद्रासन का वरदान प्राप्त होता है। इन दृश्यों के माध्यम से कलाकारों ने रावण के अहंकार, विभीषण की भक्ति और कुंभकर्ण के विशिष्ट चरित्र को दर्शाया।


इसके बाद रावण पुत्र मेघनाद के पराक्रम का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसमें उसने देवताओं सहित काल को भी बंदी बना लिया। इन प्रसंगों ने रामायण की आगे की कथा के लिए उत्सुकता बढ़ाई और दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।


विधायक मुकेश शर्मा ने की कमेटी के प्रयासों की सराहना


इस अवसर पर विधायक मुकेश शर्मा ने श्री दुर्गा रामलीला कमेटी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि श्री दुर्गा रामलीला गुरुग्राम की सबसे पुरानी रामलीलाओं में से एक है, जिसकी नींव हमारे बुजुर्गों ने रखी थी। आज युवा पीढ़ी इस धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि धर्म और संस्कृति से जुड़ाव युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है। हमें धार्मिक आयोजनों के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रखकर भक्ति, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी के मार्ग पर आगे बढ़ाना चाहिए।


कार्यक्रम में श्री दुर्गा रामलीला कमेटी के चेयरमैन बनवारी लाल सैनी, सतीश माचीवाल, रमेश कालरा, प्रधान कपिल सलूजा, महासचिव अशोक प्रजापति, कोषाध्यक्ष प्रदीप गुप्ता, रामा ठाकुर, यशपाल सैनी, रजनीश पाहुजा, देविंदर जैन, मुकेश राज, पार्षद आशीष गुप्ता, गगन गुलाटी सहित कमेटी के अन्य पदाधिकारी, सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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