लिथियम भंडार से बदलेगा भारत का ऊर्जा भविष्य : दीपक मैनी
- हरियाणा और एनसीआर बनेंगे नई बैटरी इकोनॉमी के केंद्र
- रियासी में 59 लाख टन लिथियम की खोज, भारत को मिली रणनीतिक
- गुरुग्राम बनेगा बैटरी टेक्नोलॉजी, रिसर्च और कॉरपोरेट निवेश का प्रमुख हब
गुरुग्राम। 21वीं सदी की वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था में निर्णायक भूमिका निभाने वाले लिथियम के क्षेत्र में भारत को बड़ी रणनीतिक बढ़त मिलने जा रही है। जम्मू कश्मीर के रियासी क्षेत्र में अनुमानित 59 लाख टन लिथियम भंडार की पुष्टि के बाद देश की औद्योगिक और ऊर्जा नीति में व्यापक बदलाव की संभावनाएं बनी हैं। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (पीएफटीआई) के चेयरमैन दीपक मैनी ने इसे भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़े बदलाव का संकेत बताया है।
दीपक मैनी ने कहा कि 20वीं सदी में वैश्विक शक्ति संतुलन तेल आधारित अर्थव्यवस्था पर टिका था, लेकिन 21वीं सदी में बैटरी और स्वच्छ ऊर्जा केंद्र में हैं। लिथियम आयन बैटरी आज स्मार्टफोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण की रीढ़ बन चुकी है। ऐसे में घरेलू लिथियम संसाधन भारत को तकनीकी और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की क्षमता रखते हैं।
उन्होंने कहा कि अभी तक भारत अपनी लिथियम जरूरतों के लिए शत प्रतिशत आयात पर निर्भर रहा है और इसका बड़ा हिस्सा चीन और उससे जुड़े आपूर्ति नेटवर्क से आता रहा है। घरेलू भंडार मिलने से आयात निर्भरता कम होगी और रणनीतिक क्षेत्रों में सप्लाई चेन से जुड़े जोखिम घटेंगे। इससे भारत को वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित होने का अवसर मिलेगा।
चेयरमैन मैनी के अनुसार इस खोज का सीधा लाभ औद्योगिक राज्यों को मिलेगा, जिनमें हरियाणा प्रमुख है। हरियाणा पहले से ही ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और ऑटो कंपोनेंट उद्योग का बड़ा केंद्र है। लिथियम आधारित बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के विस्तार से राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय सप्लाई चेन मजबूत होगी, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और उत्पादन लागत में कमी आएगी।
गुरुग्राम को लेकर उन्होंने कहा कि यह शहर देश के प्रमुख कॉरपोरेट और स्टार्टअप केंद्रों में शामिल है। बैटरी तकनीक, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ऊर्जा भंडारण से जुड़े अनुसंधान और विकास कार्यों के लिए गुरुग्राम एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। यहां मौजूद बहुराष्ट्रीय कंपनियां और तकनीकी स्टार्टअप भारत में विकसित हो रहे बैटरी इकोसिस्टम का लाभ उठाकर वैश्विक बाजार के लिए समाधान तैयार कर सकते हैं।
लिथियम आधारित उद्योगों के विकास से भारत में इलेक्ट्रिक वाहन सस्ते होंगे। घरेलू बैटरी उत्पादन से आयात लागत घटेगी और इसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। इसके साथ ही तेल आयात पर होने वाला भारी विदेशी मुद्रा खर्च भी कम होगा, जिससे अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
दीपक मैनी ने कहा कि लिथियम संसाधनों का दोहन पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों को स्पष्ट नीति ढांचा, पारदर्शी प्रक्रिया और पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वह दीर्घकालिक निवेश के साथ भारत में बैटरी रिफाइनिंग और उत्पादन क्षमता को विकसित करे।
उन्होंने कहा कि भविष्य पेट्रोल का नहीं, बल्कि बैटरी आधारित ऊर्जा का है। लिथियम के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भारत को केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा और तकनीक उत्पादन का मजबूत केंद्र बना सकती है। हरियाणा और गुरुग्राम जैसे औद्योगिक और कॉरपोरेट क्षेत्र इस बदलाव के प्रमुख लाभार्थी होंगे और भारत की नई ऊर्जा अर्थव्यवस्था को दिशा देंगे।
