एक राष्ट्र, एक चुनाव: विकसित भारत के संकल्प का सशक्त माध्यम
— गुरुग्राम में आयोजित संगोष्ठी में उद्योग-व्यापार जगत की एकजुट आवाज
“एक राष्ट्र, एक चुनाव मात्र नारा नहीं, बल्कि मंत्र है”— यह विचार बोध राज सीकरी , विभाग प्रमुख ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’, ने गुरुग्राम में आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किया। उनका कहना था कि राष्ट्र की उन्नति, विकास, आर्थिक बढ़ोतरी, जीडीपी में इज़ाफ़ा और ‘विकसित भारत’ के प्रधानमंत्री के सपने को समय से पहले साकार करने का यह एक प्रभावी उपाय है।
इसी क्रम में *सुभाष सिंगला* , संयोजक, ने कहा कि *“एक राष्ट्र, एक चुनाव संविधान के अनुसरण का ज्वलंत उदाहरण है।”*
*आयोजन का विवरण*
दिनांक *9 जनवरी* को *अप्रैल हाउस, सेक्टर 44, गुरुग्राम* के सभागार में यह संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें गुरुग्राम ज़िले के उद्यमी, व्यापारी बंधु और उद्योगपतियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय सचिव *ओम प्रकाश धनखड़* मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उनका सभी अतिथियों द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
कार्यक्रम में भाजपा के ज़िला अध्यक्ष *सर्वप्रिय त्यागी* तथा *कमल यादव* , प्रभारी बल्लभगढ़, की गरिमामयी उपस्थिति रही।
*मंचासीन विशिष्ट अतिथि*
मंच पर उद्योग और व्यापार जगत के कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व उपस्थित रहे, जिनमें—
पी.एफ.टी.आई. के चेयरमैन *दीपक मैनी, आर. एल. शर्मा, अग्रवाल, श्रीमती कटारिया* , मानेसर उद्योग एसोसिएशन के प्रधान *अतुल मुखी* , एम.एस.एम.ई. चैम्बर के उपाध्यक्ष *विनोद गुप्ता* , बिल्डर प्रतिनिधि *सुभाष अरोड़ा* , कैटरिंग एसोसिएशन के चेयरमैन *संजीव कुमार* , भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ गुरुग्राम के संयोजक *चंदन मुंजाल* , एडवोकेट *प्रमोद सलूजा* , ट्रक एसोसिएशन के प्रधान *सतपाल नासा* , दौलताबाद एसोसिएशन के प्रधान *विनोद* , भारतीय उद्योग व्यापार मंडल हरियाणा के मंत्री *पवन के जिंदल* , डी.आर.आई.ए. के प्रेसिडेंट, तथा टेंट एसोसिएशन के पदाधिकारी *खट्टर* और *गंगाधार खत्री* प्रमुख रहे।
*प्रारंभिक रूपरेखा और ऐतिहासिक संदर्भ*
संगोष्ठी की प्रारंभिक रूपरेखा *बोध राज सीकरी* ने प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि आज़ादी के बाद प्रारंभिक वर्षों में लगातार तीन बार लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ हुए थे। बाद में किन्हीं कारणों से यह परंपरा टूट गई, जिससे चुनाव अलग-अलग होने लगे। इसका परिणाम यह हुआ कि सरकारी खर्च बढ़ा और प्रशासनिक तंत्र पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।
उन्होंने यह भी बताया कि *25 से अधिक राजनीतिक दलों* ने इस अवधारणा के समर्थन में सहमति दी है, जबकि मात्र 15 दल इसके विरोध में रहे हैं। कई विरोधी दलों के वरिष्ठ नेताओं— जैसे *शरद पवार* और दिवंगत *एम. करुणानिधि* — ने भी समय-समय पर ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का समर्थन किया है।
*शेरो-शायरी के माध्यम से उन्होंने जब यह प्रश्न रखा—*
“जब राष्ट्र एक है, संविधान एक है, झंडा एक है, राष्ट्रगान एक है, राष्ट्रगीत एक है, हिमालय एक है, गंगा-यमुना एक हैं, हम सब एक हैं— *तो एक चुनाव क्यों नहीं?* ”
तो सभागार करतल ध्वनि से गूंज उठा।
*मुख्य वक्ता का प्रेरक संबोधन*
*बोध राज सीकरी* के आग्रह पर *ओम प्रकाश धनखड़* ने अपने संबोधन में तथ्यों के साथ यह सिद्ध किया कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ राष्ट्रहित में है। उन्होंने बताया कि किन-किन देशों में यह व्यवस्था अपनाई गई है और वहां इसके क्या लाभ सामने आए हैं।
उन्होंने विस्तार से समझाया कि इससे *जीडीपी में संभावित बढ़ोतरी, पब्लिक एक्सचेकर पर सकारात्मक प्रभाव* , और *चुनावी आचार संहिता के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान में कमी कैसे आएगी* । उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि चुनावी प्रक्रिया में हर वर्ष प्रधानमंत्री के लगभग तीन महीने व्यस्त रहते हैं; यदि चुनाव एक साथ हों, तो यह समय देश के विकास कार्यों में लगाया जा सकता है।
साथ ही, उन्होंने उन राज्यों के उदाहरण दिए जहां एक साथ चुनाव होने पर *मतदान प्रतिशत में वृद्धि* दर्ज की गई। उनके तथ्यों और प्रस्तुति ने श्रोताओं को पूरी तरह प्रभावित किया।
*सर्वसम्मति और समापन*
मुख्य वक्ता के संबोधन के बाद उपस्थित सभी लोगों ने खड़े होकर प्रस्ताव का समर्थन किया और विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों ने हस्ताक्षर कर अपनी सहमति प्रकट की।
धन्यवाद प्रस्ताव *कमल यादव* ने रखा। उन्होंने मुख्य वक्ता की भूरी-भूरी प्रशंसा की और आयोजक *बोध राज सीकरी* की कार्यशैली को सराहा। कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी सज्जनों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
अंत में, संगोष्ठी का समापन *“भारत माता की जय”* के उद्घोष के साथ हुआ। यह आयोजन न केवल विचार-विमर्श का मंच बना, बल्कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के समर्थन में उद्योग-व्यापार जगत की एकजुट और सशक्त आवाज़ के रूप में भी यादगार रहा।
