राष्ट्रीय नियामक प्रदर्शन रैंकिंग में हरियाणा को ‘ए’ ग्रेड, 100 में से 88.5 अंक

राष्ट्रीय नियामक प्रदर्शन रैंकिंग में हरियाणा को ‘ए’ ग्रेड, 100 में से 88.5 अंक



चंडीगढ़, 20 फरवरी 2026 ।

हरियाणा ने राष्ट्रीय स्तर पर बिजली क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की पहली नियामक प्रदर्शन रैंकिंग में 100 में से 88.5 अंक प्राप्त कर ‘ए’ ग्रेड हासिल किया है। यह रिपोर्ट पावर फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया द्वारा आरईसी लिमिटेड के सहयोग से जारी की गई है। इस उपलब्धि के साथ हरियाणा देश के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल हो गया है और उसे राष्ट्रीय स्तर पर 8वां स्थान प्राप्त हुआ है।


 विश्वसनीयता और नियामक शासन में पूर्ण अंक

‘बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता (संसाधन पर्याप्तता)’ श्रेणी में हरियाणा को 32 में से पूरे 32 अंक प्राप्त हुए। राज्य ने संसाधन पर्याप्तता संबंधी विनियम अधिसूचित किए हैं, बिजली खरीद के लिए योजना आरक्षित मार्जिन निर्धारित किया है तथा दीर्घकालिक योजना के लिए समय-सीमा तय की है। राज्य ट्रांसमिशन यूटिलिटी और डिस्कॉम की तीन-वर्षीय पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) योजनाओं को स्वीकृति दी गई है तथा अनुपालन न होने की स्थिति में दंडात्मक प्रावधान भी सुनिश्चित किए गए हैं।


नियामक शासन के क्षेत्र में भी हरियाणा को पूरे 5 में से 5 अंक मिले हैं। अधिकारियों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित किए गए हैं तथा स्वीकृत पदों का समूह–ए, बी, सी और डी में वर्गीकरण कर प्रशासनिक पारदर्शिता और संस्थागत मजबूती को सुदृढ़ किया गया है।


 डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति सुदृढ़

‘डिस्कॉम की वित्तीय सेहत’ श्रेणी में हरियाणा को 25 में से 23.5 अंक प्राप्त हुए। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए टैरिफ आदेश समय पर जारी किए गए तथा वित्त वर्ष 2023-24 का ट्रू-अप भी निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया गया। उल्लेखनीय है कि पिछले ट्रू-अप तक कोई नियामकीय परिसंपत्ति (रेगुलेटरी एसेट) सृजित नहीं की गई, जो वित्तीय अनुशासन का स्पष्ट संकेत है।

राज्य में ईंधन एवं बिजली खरीद लागत समायोजन अधिभार (एफपीपीएएस) की मासिक व्यवस्था लागू है, जिसके माध्यम से लागत का स्वतः समायोजन किया जाता है। इससे वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिरता को मजबूती मिली है।


ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और एनर्जी ट्रांजिशन में प्रगति

'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' श्रेणी में हरियाणा को 23 में से 16 अंक मिले हैं। नए बिजली कनेक्शन के लिए समय-सीमा निर्धारित है - मेट्रो क्षेत्र में 3 दिन, नगर पालिका क्षेत्र में 7 दिन और ग्रामीण क्षेत्र में 15 दिन। निर्धारित समय में सेवा न देने पर मुआवजे का प्रावधान है। मीटर परीक्षण एवं प्रतिस्थापन की समय-सीमा तय है तथा नेट मीटरिंग कनेक्शन 10 दिनों में जारी किए जाते हैं।

‘एनर्जी ट्रांजिशन’ के क्षेत्र में राज्य को 15 में से 12 अंक प्राप्त हुए। 100 किलोवाट तक ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस की सुविधा लागू है। ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया और वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं के लिए क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज एवं अतिरिक्त सरचार्ज में छूट दी गई है। नवीकरणीय खरीद दायित्व की रूपरेखा वित्त वर्ष 2029-30 तक निर्धारित की गई है और कमी होने पर दंड का प्रावधान भी सुनिश्चित किया गया है।


इस श्रेणी में पंजाब, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम और मध्य प्रदेश जैसे अग्रणी राज्य भी शामिल हैं। राज्यों का मूल्यांकन पांच प्रमुख मानकों—बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता, वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की वित्तीय स्थिति, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, एनर्जी ट्रांजिशन तथा नियामक शासन के आधार पर किया गया।


अध्यक्ष का वक्तव्य

इस उपलब्धि पर हरियाणा विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष नन्द लाल शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय नियामक प्रदर्शन रैंकिंग में ‘ए’ ग्रेड प्राप्त होना राज्य सरकार, आयोग और विद्युत उपयोगिताओं की पारदर्शी विनियमन व्यवस्था, वित्तीय अनुशासन और उपभोक्ता-केन्द्रित सुधारों के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि 100 में से 88.5 अंक प्राप्त करना इस बात को दर्शाता है कि हरियाणा का विनियामक ढांचा सुदृढ़, दूरदर्शी और राष्ट्रीय विद्युत सुधारों के अनुरूप है। बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता और नियामक शासन में पूर्ण अंक मिलना संसाधन पर्याप्तता की सुविचारित योजना, समयबद्ध टैरिफ आदेश और उपभोक्ताओं पर अनावश्यक भार डाले बिना वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की नीति को रेखांकित करता है।


उन्होंने आगे कहा कि आयोग राज्य के प्रत्येक उपभोक्ता को किफायती, विश्वसनीय और सतत विद्युत उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिरता को और मजबूत करने, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा व्यवसाय सुगमता में सुधार के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।


अंततः उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्देश्य केवल उच्च रैंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि हरियाणा में पारदर्शी, जवाबदेह और भविष्य उन्मुख विद्युत तंत्र का निर्माण करना है, जो राज्य की आर्थिक प्रगति और उपभोक्ता कल्याण को सुदृढ़ आधार प्रदान करे।


फोटो: 

श्री नन्द लाल शर्मा, अध्यक्ष, हरियाणा विद्युत नियामक आयोग


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