न्यूनतम वेतन में अचानक वृद्धि पर उद्योग जगत की चिंता, चरणबद्ध लागू करने की मांग- चिया

न्यूनतम वेतन में अचानक वृद्धि पर उद्योग जगत की चिंता, चरणबद्ध लागू करने की मांग- चिया

 


जिला उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन, पुनर्विचार की मांग।


कन्फेडरेशन ऑफ हरियाणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (CHIA), जो गुरुग्राम, मानेसर, सोहना, रेवाड़ी, बहादुरगढ़, कुंडली, पानीपत, सोनीपत, राई, फरीदाबाद, पलवल, नूह और रोहतक सहित राज्य के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों के 30 से अधिक औद्योगिक संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है, ने राज्य में न्यूनतम वेतन में हाल ही में की गई अत्यधिक एवं अचानक वृद्धि पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।


चिया का प्रतिनिधिमंडल, संरक्षक अशोक कोहली एवं प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (पीएफटीआई) के चेयरमैन व चिया के संयोजक दीपक मैनी के नेतृत्व में गुरुग्राम के जिला उपायुक्त उत्तम कुमार से उनके कार्यालय में मिला। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हरियाणा के नाम ज्ञापन सौंपते हुए न्यूनतम वेतन वृद्धि को पुनः विचार कर चरणबद्ध तरीके से लागू करने की मांग रखी।

ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि ₹4,000 की एकमुश्त वृद्धि से उद्योगों पर प्रति कर्मचारी ₹6,000–₹7,000 तक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ रहा है, जो वर्तमान परिस्थितियों में वहन करना अत्यंत कठिन है।


पीएफटीआई के चेयरमैन व चिया के संयोजक दीपक मैनी ने कहा कि उद्योग पहले ही कोविड-19 महामारी और वैश्विक परिस्थितियों से प्रभावित रहे हैं, और अब वेतन में अचानक वृद्धि ने उद्योगों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डाल दिया है, जिसे वहन करना संभव नहीं होगा।

संरक्षक अशोक कोहली ने कहा कि चिया श्रमिकों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का पूर्ण समर्थन करता है, किन्तु इस वृद्धि की मात्रा और समय-निर्धारण ने विशेष रूप से लघु एवं निर्यात-उन्मुख इकाइयों—जैसे परिधान उद्योग—पर गंभीर प्रभाव डाला है।


चिया  के सदस्य व सीआईआई से विनोद बापना ने बताया कि उद्योग पहले से ही कई लागत दबावों का सामना कर रहे हैं, जिनमें—

बिजली दरों में वृद्धि

ईएसआई एवं पीएफ अंशदान में बढ़ोतरी

अनुपालन लागत

पर्यावरण एवं नियामकीय खर्च का साथ साथ

ऐसे में वेतन वृद्धि का अतिरिक्त भार उद्योगों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण है।

 

चिया के सदस्य व सोहना मेवात इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी खटाना ने कहा कि इस प्रकार की अचानक वृद्धि न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायसंगत। इससे उद्योगों की स्थिरता, रोजगार सृजन और प्रतिस्पर्धात्मकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

पीएफटीआई के महानिदेशक एडवोकेट आर एल शर्मा ने सरकार से आग्रह किया कि वेतन वृद्धि को चरणबद्ध एवं संतुलित तरीके से लागू किया जाए, ताकि उद्योगों पर वित्तीय दबाव कम हो और रोजगार एवं श्रमिक हित सुरक्षित रह सकें। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे निर्णय लेते समय उद्योगों पर पड़ने वाले समग्र लागत प्रभाव का समुचित मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख सदस्य

इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल में चिया के संरक्षक

कर्नल राज सिंगला , संरक्षक

अशोक कोहली, चिया के संयोजक व पीएफटीआई के चेयरमैन

दीपक मैनी, 

विनोद बापना जिला अध्यक्ष, सीआईआई,

डॉ. एसपी अग्रवाल (वाइस चेयरमैन, पीएफटीआई)

एडवोकेट आर एल शर्मा (महानिदेशक, पीएफटीआई)

आरपी खटाना (अध्यक्ष, सोहना मेवात इंडस्ट्रीज एसोसिएशन)

किशन कपूर (अध्यक्ष, हरियाणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन)

श्रीपाल शर्मा (अध्यक्ष, कादीपुर इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन)

अश्वनी शर्मा (महासचिव, चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज, उद्योग विहार)

सहित अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

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