सोनीपत महानगर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की टीम ने किया जीएमडीए के आईसीसीसी का दौरा
गुरुग्राम की तर्ज पर सोनीपत में भी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) स्थापित किया जाएगा।
-डिजिटल गवर्नेंस के लिए जीएमडीए के आईसीसीसी मॉडल की करी सराहना
-जीएमडीए के सीसीटीवी नेटवर्क के माध्यम से इस वर्ष 3.43 लाख से अधिक ई-चालान जारी
-आईसीसीसी से एमसीजी के कचरा संग्रहण स्थलों पर 24×7 निगरानी
गुरुग्राम, 23 जून: सोनीपत महानगर विकास प्राधिकरण (एसएमडीए) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती मोना श्रीनिवास के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने आज गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर आईसीसीसी का दौरा किया। सोनीपत में आईसीसीसी की स्थापना के लिए एसएमडीए के अधिकारियों ने जीएमडीए के आईसीसीसी की कार्यप्रणाली और तकनीक आधारित शहर प्रबंधन मॉडल का अध्ययन किया।
जीएमडीए के स्मार्ट सिटी प्रभाग के प्रमुख श्री सुशील कुमार ने अधिकारियों को आईसीसीसी की कार्यप्रणाली, इसकी प्रमुख विशेषताओं तथा यहां से संचालित विभिन्न एकीकृत सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी। इसके बाद अधिकारियों को कंट्रोल सेंटर का भ्रमण कराया गया, जहां लाइव डेमो के माध्यम से बताया गया कि किस प्रकार एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से शहर की निगरानी, ट्रैफिक प्रबंधन, शिकायत निवारण, आपातकालीन सेवाओं तथा अन्य नागरिक सुविधाओं का संचालन किया जाता है। इस अवसर पर जीएमडीए की अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती सुमन भांकर, एसएमडीए की अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती वीणा हुड्डा तथा दोनों प्राधिकरणों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
अधिकारियों को बताया गया कि जीएमडीए ने सिटी सर्विलांस परियोजना के प्रथम चरण के तहत गुरुग्राम और मानेसर के 218 स्थानों पर 1,200 से अधिक सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए हैं। दूसरे चरण में 258 स्थानों पर 2,722 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे स्थापित हो रहे हैं तथा लगभग 300 किलोमीटर भूमिगत ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जाएगी, जिससे शहर की निगरानी व्यवस्था और मजबूत होगी।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि जीएमडीए के एएनपीआर, रेड लाइट वायलेशन डिटेक्शन तथा अन्य आधुनिक तकनीकों से लैस कैमरों की सहायता से गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस प्रतिदिन लगभग 3,500 ई-चालान जारी कर रही है। इससे मैनुअल चालान की आवश्यकता काफी कम हुई है। वर्ष 2025 में इस प्रणाली के माध्यम से 8,02,194 ई-चालान जारी किए गए, जबकि वर्ष 2026 में अब तक 3,43,184 से अधिक ई-चालान जारी किए जा चुके हैं।
एसएमडीए अधिकारियों को यह भी बताया गया कि नगर निगम गुरुग्राम की 20,000 तथा जीएमडीए की 878 स्ट्रीट लाइटों को सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल एंड मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से आईसीसीसी से जोड़ा गया है। इससे स्ट्रीट लाइटों की रियल टाइम निगरानी, खराबी की पहचान और समय पर रखरखाव सुनिश्चित किया जा रहा है।
सेंट्रलाइज्ड इंटीग्रेटेड वाटर मैनेजमेंट सिस्टम के तहत पहले चरण में 38 भूमिगत जल टंकियों पर सेंसर लगाए जा चुके हैं, जिनकी सहायता से शहर की पेयजल आपूर्ति की रियल टाइम निगरानी और नियंत्रण किया जा रहा है। इसके अलावा 251 अन्य यूजीटी पर सेंसर लगाने का कार्य प्रगति पर है। अगले चरण में सीवर नेटवर्क पर भी फ्लो मीटर लगाए जाएंगे, जिससे सीवर प्रवाह की रियल टाइम निगरानी की जा सकेगी।
जीएमडीए द्वारा तकनीक आधारित ठोस कचरा प्रबंधन की जानकारी भी अधिकारियों के साथ साझा की गई। बंधवाड़ी लैंडफिल साइट तथा नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) के सेकेंडरी गार्बेज कलेक्शन प्वाइंट्स पर 45 सीसीटीवी कैमरे और 26 स्मार्ट फ्लडलाइट्स स्थापित की गई हैं, जिन्हें आईसीसीसी से जोड़ा गया है। इन कैमरों के माध्यम से बंधवाड़ी लैंडफिल साइट, एमसीजी के कचरा संग्रहण स्थलों, कचरा परिवहन और अवैध डंपिंग पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।
अधिकारियों को यह भी बताया गया कि भविष्य में पुलिस, अन्य विभागों तथा सोशल मीडिया सहित विभिन्न स्रोतों के डाटा को एकीकृत कर शहर का व्यापक डाटा बैंक विकसित किया जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन, फेस रिकग्निशन और डाटा विश्लेषण जैसी सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
दौरे के दौरान श्रीमती मोना श्रीनिवास ने जीएमडीए द्वारा विकसित आईसीसीसी की सराहना करते हुए कहा कि विभिन्न विभागों और नागरिक सेवाओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करने की यह व्यवस्था अत्यंत प्रभावी है। उन्होंने कहा कि बेहतर डाटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग भविष्य में देशभर में स्थापित किए जा रहे इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटरों के संचालन को और अधिक प्रभावी बनाएगा।
