डॉक्टर भी रह गए हैरान: एक ही छिद्र, दो गर्भाशय और दो योनियां लेकर जन्मी बच्ची को मिली नई जिंदगी

जब डॉक्टर भी रह गए हैरान: एक ही छिद्र, दो गर्भाशय और दो योनियां लेकर जन्मी बच्ची को मिली नई जिंदगी



लगभग 50 हजार नवजात बच्चियों में से एक को प्रभावित करने वाली कॉमन क्लोआका बीमारी के साथ दो गर्भाशय और दो योनियों जैसी अत्यंत दुर्लभ जन्मजात विकृतियों का सफल उपचार; आयुष्मान भारत योजना ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की बेटी को दिलाई नई जिंदगी


नई दिल्ली, जन्म के साथ ही जिंदगी ने इस मासूम बच्ची के सामने ऐसी चुनौती खड़ी कर दी थी, जिसे देखकर अनुभवी डॉक्टर भी हैरान रह गए। एक वर्षीय बच्ची के शरीर में मूत्र, प्रजनन और मल त्याग प्रणाली के लिए केवल एक ही छिद्र था। इतना ही नहीं, उसके दो गर्भाशय (डबल यूटेरस), दो अलग-अलग योनियां (ट्विन वैजाइना) और बड़ी आंत से जुड़ी एक बेहद दुर्लभ जन्मजात विकृति भी मौजूद थी। लेकिन अमृता अस्पताल, फरीदाबाद के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जटिल पुनर्निर्माण सर्जरी कर बच्ची को सामान्य जीवन की नई उम्मीद दी है।


डॉक्टरों के अनुसार बच्ची कॉमन क्लोआका (Common Cloaca) नामक एक गंभीर जन्मजात बीमारी से पीड़ित थी। इस स्थिति में मूत्र मार्ग, प्रजनन तंत्र और आंत अलग-अलग विकसित होने के बजाय एक ही सामान्य मार्ग में मिल जाते हैं। यह बीमारी लगभग हर 50 हजार नवजात बच्चियों में से एक को प्रभावित करती है।


हालांकि इस मामले को और भी दुर्लभ बनाने वाली बात यह थी कि बच्ची में दो गर्भाशय, दो योनियां और टाइप-1 कंजेनिटल पाउच कोलन जैसी जटिल विकृतियां भी एक साथ मौजूद थीं। कंजेनिटल पाउच कोलन एक ऐसी दुर्लभ स्थिति है, जिसमें सामान्य बड़ी आंत की जगह एक असामान्य थैलीनुमा संरचना विकसित हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार इन सभी विकृतियों का एक साथ पाया जाना चिकित्सा विज्ञान के सबसे दुर्लभ और जटिल मामलों में गिना जाता है।


इस कहानी का एक महत्वपूर्ण पहलू आर्थिक संघर्ष भी था। बच्ची का परिवार इतने जटिल और महंगे इलाज का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं था। ऐसे में आयुष्मान भारत योजना उनके लिए जीवनदायिनी साबित हुई। योजना के तहत उपचार उपलब्ध होने से बच्ची को अमृता अस्पताल, फरीदाबाद में विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में यह दुर्लभ और जटिल सर्जरी मिल सकी। परिवार का कहना है कि इस योजना ने उनकी बेटी को केवल इलाज ही नहीं, बल्कि एक नया भविष्य भी दिया है।


जन्म के तुरंत बाद बच्ची की जान बचाने के लिए दूसरे अस्पताल में आपातकालीन सर्जरी की गई थी। बाद में उसे स्थायी उपचार और पुनर्निर्माण सर्जरी के लिए अमृता अस्पताल, फरीदाबाद लाया गया।


सर्जरी से पहले विशेषज्ञों ने एमआरआई और उन्नत एंडोस्कोपिक जांचों के जरिए बच्ची की आंतरिक संरचना का विस्तृत अध्ययन किया। जांच में दो गर्भाशय, दो योनियां और मूत्र, प्रजनन तथा आंतों के बीच बेहद जटिल संरचनात्मक संबंध सामने आए।


इसके बाद पीडियाट्रिक सर्जरी, एनेस्थीसिया और अन्य विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम ने विस्तृत योजना बनाकर सर्जरी की। ऑपरेशन के दौरान नया गुदा मार्ग बनाया गया, मूत्र तंत्र का पुनर्निर्माण किया गया तथा प्रजनन अंगों को सावधानीपूर्वक व्यवस्थित किया गया। साथ ही दोनों योनियों की संरचना को सुरक्षित रखते हुए शरीर की तीनों प्रणालियों के लिए अलग-अलग कार्यात्मक मार्ग विकसित किए गए।


डॉ. नितिन जैन, वरिष्ठ सलाहकार, पीडियाट्रिक सर्जरी, अमृता अस्पताल, फरीदाबाद ने कहा, "यह हमारे सामने आए सबसे चुनौतीपूर्ण पुनर्निर्माण मामलों में से एक था। कई दुर्लभ जन्मजात विकृतियां एक साथ मौजूद थीं, जिससे हर चरण बेहद जटिल हो गया था। हमारा लक्ष्य केवल शारीरिक संरचना को ठीक करना नहीं था, बल्कि बच्ची को भविष्य में बेहतर जीवन गुणवत्ता और सामान्य विकास का अवसर देना भी था। इस सफलता के पीछे पूरी टीम की विशेषज्ञता, समर्पण और सूक्ष्म योजना का महत्वपूर्ण योगदान है।"


सर्जरी के दौरान कई घंटे तक चली जटिल प्रक्रिया में शरीर की अत्यंत नाजुक संरचनाओं को सुरक्षित रखते हुए पुनर्निर्माण किया गया, जो अपने आप में एक बड़ी चिकित्सा चुनौती थी।


डॉ. ऋधिमा भाटिया, कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया, अमृता अस्पताल, फरीदाबाद ने कहा,"एक साल की बच्ची में इतनी लंबी और जटिल सर्जरी के दौरान हर पल विशेष सतर्कता की आवश्यकता होती है। मरीज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एनेस्थीसिया और सर्जिकल टीम के बीच निरंतर समन्वय और सूक्ष्म निगरानी बेहद महत्वपूर्ण थी।"


सर्जरी के बाद बच्ची ने तेजी से रिकवरी की। स्वास्थ्य में सुधार होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और अब वह अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन की ओर बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि आधुनिक पीडियाट्रिक सर्जरी, उन्नत इमेजिंग तकनीकों और बहु-विषयक चिकित्सा सहयोग के कारण अब ऐसी जटिल जन्मजात विकृतियों का भी सफल उपचार संभव हो रहा है। परिवार के लिए यह केवल एक सफल ऑपरेशन नहीं, बल्कि उनकी बेटी के सामान्य बचपन, बेहतर भविष्य और नई उम्मीदों की शुरुआत है।


क्या है कॉमन क्लोआका?

कॉमन क्लोआका लड़कियों में पाई जाने वाली सबसे गंभीर जन्मजात विकृतियों में से एक है। इसमें मूत्र मार्ग, प्रजनन तंत्र और आंत तीनों एक ही सामान्य चैनल में मिल जाते हैं और शरीर में केवल एक ही बाहरी छिद्र बनता है। इस बच्ची के मामले में दो गर्भाशय, दो योनियां और कंजेनिटल पाउच कोलन जैसी अतिरिक्त जटिलताओं ने इसे चिकित्सा विज्ञान के सबसे दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण मामलों में शामिल कर दिया।

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