गुड़गाँव |अविघ्न थिएटर ग्रुप द्वारा विख्यात व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की चर्चित कहानी पर आधारित नाटक ‘बातूनी’ का सफल मंचन शनिवार शाम, 27 जून 2026 को गुरुग्राम कल्चरल फोरम के रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम में किया गया। नाटक में कर्नल सुमेश सेठ, अनिल कौशिक और संदीप जोशी ने अपनी प्रभावशाली अभिनय प्रतिभा का परिचय दिया। नाटक का निर्देशन सुहासिनी दिघे रस्तोगी ने किया, जबकि संपूर्ण संयोजन संदीप जोशी ने संभाला।
नाटक में समाज में प्रचलित इस धारणा पर तीखा व्यंग्य किया गया कि केवल महिलाएँ ही अधिक बातूनी होती हैं, जबकि पुरुष भी इस मामले में किसी से कम नहीं हैं। हास्य और व्यंग्य से भरपूर प्रस्तुति ने दर्शकों को अंत तक बाँधे रखा। कलाकारों के सशक्त अभिनय और प्रभावशाली संवादों ने दर्शकों को हँसी से लोटपोट कर दिया, जिससे यह मंचन अत्यंत सफल रहा।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सारस्वत, मोहन मनीषी और डॉ. अशोक बत्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही। सरस्वती वंदना, काव्यपाठ, गीत एवं मोनो एक्टिंग जैसी विविध प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और अधिक आकर्षक एवं मनोरंजक बनाया।
कार्यक्रम का मुख्य संयोजन प्रसिद्ध कवि करमचंद गर्ग और राजपाल यादव ने किया। करमचंद गर्ग के अथक परिश्रम और राजपाल यादव के प्रभावी मंच संचालन की सभी ने सराहना की। कार्यक्रम के समापन पर कलाकारों, कवियों एवं दर्शकों के लिए रात्रिभोज का भी आयोजन किया गया।
करमचंद गर्ग ने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी प्रतिभागियों एवं दर्शकों का आभार व्यक्त किया। वहीं राजपाल यादव ने अविघ्न थिएटर ग्रुप की प्रस्तुति की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा, “अविघ्न थिएटर की प्रस्तुति इस पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। सुहासिनी जी, संदीप जोशी, अनिल कौशिक और कर्नल सुमेश सेठ ने शानदार अभिनय से मन मोह लिया।”
अविघ्न थिएटर ग्रुप की निर्देशिका सुहासिनी दिघे रस्तोगी ने अपने संबोधन में कहा कि वरिष्ठ साहित्यकारों की उपस्थिति कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रही। उन्होंने कहा, “साहित्य समाज का दर्पण है और समाज साहित्य का आधार। श्रेष्ठ साहित्य ही श्रेष्ठ समाज का निर्माण करता है। रंगमंच साहित्य की अनेक विधाओं और विविध कलाओं का संगम होने की वजह से अप्रतिम आध्यात्म है। भविष्य में भी ऐसे साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक चेतना का प्रसार करने का प्रयास जारी रखने की आवश्यकता है।”
