मासूम बेटियों की चीख अब पूरे समाज की आवाज़ बननी चाहिए" — अनु यादव, गुरुग्राम

 "मासूम बेटियों की चीख अब पूरे समाज की आवाज़ बननी चाहिए" — अनु यादव, गुरुग्राम


श्रीगंगानगर की घटना ने मानवता को झकझोर दिया, दोषियों को कठोरतम दंड देने की मांग



गुरुग्राम | 07 जुलाई 2026


राजस्थान के श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई अमानवीय घटना ने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। इस जघन्य घटना ने न केवल मानवता को शर्मसार किया है, बल्कि प्रत्येक माता-पिता के मन में अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता भी पैदा कर दी है।


नेशनल चाइल्ड एंड वूमेन डेवलपमेंट काउंसिल, गुरुग्राम की जिला अध्यक्ष अनु यादव ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि 13 वर्ष की आयु किसी भी बच्ची के जीवन का सबसे सुंदर और सुनहरा समय होता है। यह उम्र शिक्षा प्राप्त करने, सपने देखने और निडर होकर अपना बचपन जीने की होती है। ऐसे में किसी मासूम के साथ इस प्रकार की दरिंदगी केवल एक बच्ची पर नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता पर हमला है।


अनु यादव ने कहा कि आज हर माँ की आँखों में भय, हर पिता के मन में चिंता और हर बेटी के भविष्य पर असुरक्षा की छाया दिखाई दे रही है। यदि समाज आज भी मौन रहा, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी क्षमा नहीं करेंगी।


उन्होंने कहा कि "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जब तक हमारी बेटियाँ घर, विद्यालय, कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं करेंगी, तब तक हमारा विकास अधूरा रहेगा।


नेशनल चाइल्ड एंड वूमेन डेवलपमेंट काउंसिल, गुरुग्राम की प्रमुख मांगें :


● इस जघन्य मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कर त्वरित एवं निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित किया जाए।


● सभी दोषियों को कानून के अनुसार कठोरतम दंड दिया जाए, ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी दरिंदगी करने का साहस न कर सके।


● पीड़ित बच्ची एवं उसके परिवार को पूर्ण सुरक्षा, समुचित चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक परामर्श तथा आवश्यक आर्थिक सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाए।


● महिलाओं एवं बच्चियों की सुरक्षा के लिए प्रदेशभर में प्रभावी निगरानी व्यवस्था और विशेष सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत किया जाए।


● विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर महिला एवं बाल सुरक्षा के प्रति नियमित जागरूकता अभियान चलाए जाएँ।


अनु यादव ने कहा कि अपराधियों का कोई धर्म, जाति या समाज नहीं होता। ऐसे जघन्य अपराध करने वालों के विरुद्ध कानून का भय स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। समाज के प्रत्येक नागरिक का यह नैतिक दायित्व है कि वह महिलाओं एवं बच्चियों के सम्मान और सुरक्षा के लिए आगे आए तथा किसी भी प्रकार के अपराध के विरुद्ध बिना भय के आवाज़ उठाए।


उन्होंने राजस्थान सरकार एवं संबंधित प्रशासन से आग्रह किया कि मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं त्वरित जांच सुनिश्चित करते हुए पीड़िता को शीघ्र न्याय दिलाया जाए।


"मौन अब विकल्प नहीं है।


हर बेटी की सुरक्षा हमारा राष्ट्रीय संकल्प होना चाहिए।


न्याय में देरी, अन्याय को बढ़ावा देती है।"


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